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चीफ जस्टिस रंगनाथन ने की देहरादून जेल की भरपूर तारीफ

बोले-सीमित संसाधनों के बावजूद व्यवस्था बहुत अच्छी

Chetan Gurung

चीफ़ जस्टिस रमेश रंगनाथन ने देहरादून में जेल का मुआयना करने के बाद जेल स्टाफ की भरपूर तारीफ की। उन्होंने इस बात के लिए जेल स्टाफ की प्रशंसा लिखित में की कि सीमित संसाधनों के बावजूद उनको जेल में कमी या किसी किस्म की शिकायत नहीं मिली।

चीफ़ जस्टिस रमेश रंगनाथन

चीफ जस्टिस के साथ ही हाई कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया और न्याय सचिव प्रेम सिंह खिमाल भी सुद्धोंवाला जेल पहुंचे। अपर महानिदेशक (जेल) अतर सिंह ने उनकी आगवानी की। उत्तराखंड गठन के बाद शायद ही हाई कोर्ट के कोई चीफ जस्टिस या जस्टिस देहरादून जेल में निरीक्षण में आए थे। चीफ जस्टिस को पहले जेल सुरक्षाकर्मियों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। फिर उन्होंने जेल सुपरिटेंडेंट महेंद्र से कैदियों से मिलवाने को कहा।

चीफ जस्टिस रंगनाथन ने विजिटर बुक में जेल व्यवस्थाओं को काबिले तारीफ करार दिया

उन्होंने तकरीबन डेढ़ घंटे से ज्यादा अरसा कैदियों की बैरकों में जा के और उनसे बातचीत कर के गुजारा। उनकी दिलचस्पी इस पर ज्यादा दिखाई दी कि जेलों में कैदियों के साथ अच्छा बर्ताव हो रहा कि नहीं। या फिर उनको किसी किस्म की तकलीफ तो नहीं है। जेल मैन्युअल का पालन हो रहा कि नहीं। किसी भी कैदी ने उनके सामने समस्या नहीं रखी।

पूर्व IRS अफसर श्वेताभ सुमन, पूर्व मंत्री और आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे डीपी यादव और पूर्व बहुचर्चित रजिस्ट्रार मृत्युंजय मिश्र भी जेल में बंद हैं, लेकिन उनसे किसी किस्म की मुलाक़ात चीफ जस्टिस की नहीं हुई। जेल बंदोबस्त से चीफ जस्टिस इस कदर खुश हुए कि उन्होंने जेल के विजिटर्स बुक में लिखित रूप से इसकी तारीफ करने से खुद को नहीं रोका। उन्होंने इस जेल को अपनी देखी गई कुछ बेहतरीन जेलों में एक करार दिया।

जेल में पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी भी बंद थे, लेकिन कई महीने पहले गोरखपुर तारीख पर जाने के बाद वह उत्तर प्रदेश की जेल में ही है। उनके लौटने के बारे में उत्तराखंड जेल महकमे को कोई सूचना उत्तर प्रदेश ने नहीं दी है।

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