,

पुलिस ने गायब कर दी 35 पेटी शराब!

FL-2 से 500 पेटियाँ निकली थीं,फिर 465 ही क्यों पकड़ी गईं?

रायवाला अँग्रेजी ठेके की शराब थी, अल्मोड़ा में तस्करी में बिकना था

एक ऐसा कांड, जिसमें आबकारी, पुलिस, मालिक, तीनों पर अंगुली

संयुक्त आयुक्त-डीईओ को और कितनी आजादी देगी सरकार

Chetan Gurung

रायवाला के आगे मोती चूर के करीब पकड़ी गई अँग्रेजी शराब की पेटियों में से काफी माल गायब है। देहरादून के FL-2 से 500 पेटियों का परमिट काटा गया है। फिर 465 पेटियाँ ही क्यों पकड़ी गईं? 35 पेटियाँ आसमान खा गई या धरती निगल गई? इस मामले में डीईओ मनोज उपाध्याय के साथ ही बॉन्ड मैनेजर, पुलिस और ठेका मालिक भी शक के दायरे में है।

सूत्रों के मुताबिक जांच में आबकारी महकमे ने पाया है कि 35 पेटियों का हिसाब नहीं मिल रहा है। इस रिपोर्ट को अभी तक आबकारी आयुक्त सुशील कुमार के सम्मुख पेश नहीं किया गया है। इसकी वजह भी समझ नहीं आ रही है कि आखिर रिपोर्ट का दबाने में आबकारी महकमे का कौन सा बड़ा स्वार्थ सिद्ध हो रहा है। सिवाय इसके कि ठेके के मालिक बूंदी (या बोंदी) सेठ के रिश्ते आबकारी के अफसरों संग बहुत अच्छे बताए जा रहे हैं।

इन अफसरों में वही चर्चित संयुक्त आयुक्त और कुछ डीईओ हैं।देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल के साथ ही अल्मोड़ा में बूंदी सेठ का शराब की दुनिया में जबर्दस्त दबदबा है। समझा जा रहा है कि देहरादून कोटे की शराब की खपत देहरादून में नामुमकिन देख कर ही अल्मोड़ा में खपाने की कोशिशें की जा रही थी। ये तो साफ लग रहा है कि पुलिस की थ्योरी में कई झोल है, लेकिन ये भी सच है कि शराब की तस्करी पहाड़ों में हो रही थी।

पुलिस ने शराब से भरे ट्रक को रायवाला से आगे पकड़ा। वह भी दूसरे नंबर के ट्रक को। दोनों ही गलत है। नियमों के मुताबिक माल से भरा ट्रक रूट को खुद नहीं बदल सकता है। मजबूरी हो तो आबकारी महकमे को सूचित कर वह ऐसा कर सकता है। जो इस मामले में नहीं किया गया। सूत्रों के मुताबिक अंदेशा ये है कि आबकारी महकमे की मिली भगत के बिना ये काम हो नहीं सकता। पुलिस ने ट्रक को पकड़ तो लिया लेकिन 35 पेटियाँ कम मिलने से अब पुलिस ही शक के घेरे में आ गई है कि ऐसा कैसे हो गया।

मालिक का भी विरोध में सामने न आना इंगित कर रहा है कि दामन उसका भी दागदार है। आज भी मुनि की रेती में देसी शराब की सौ से ज्यादा पेटियाँ पकड़ी गईं। अब तो प्रदेश भर में आए दिन अवैध शराब पकड़ी जा रही है। घुमा-फिरा के सरकार की नाकाम आबकारी नीति को ही इसके लिए असल जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। अधिबार अधिक होने और अपना राजस्व लक्ष्य बढ़ाने के फेर में उत्तराखंड में शराब सरकार ने महंगी करा दी। इससे हरियाणा-चंडीगढ़-हिमाचल-यूपी से सस्ती शराब तस्करी से यहाँ आ रही। चारों राज्यों में उत्तराखंड के मुक़ाबले शराब बहुत सस्ती हैं।

इसके साथ ही सरकार ने देहरादून समेत प्रदेश भर में सौ से ज्यादा शराब की दुकानों को बंद कर दिया है। इससे माल की खपत बढ़ाने का दबाव खुली दुकानों पर आ गया है। शराब के विशेषज्ञों के मुताबिक अगर सरकार बंद दुकानों को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर सस्ते दर में खोल दे, तो 250 करोड़ का राजस्व और आ जाएगा। साथ ही तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगेगा। शराब की दुकानों को बंद करने के पीछे भी शराब महकमे के कुछ अफसरों की लॉबी जिम्मेदार है। जिनके बारे में कहा जाता है कि उनकी पत्ती दुकानों-बारों में हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *