भगत दा बोले-सभी को साथ ले के चलना और पहाड़ों में निदेशालय जरूरी

मुख्यमंत्री ने किया महाराष्ट्र के राज्यपाल के साथ मिल के काम करने के दिनों को याद

Chetan Gurung

महाराष्ट्र के राज्यपाल और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी अपने अभिनंदन समारोह में पूरे रौ में दिखे। उन्होंने केडीएमआईपीई सभागार में बेहतरीन-यादगार भाषण दिया। वरिष्ठ दिवंगत काँग्रेस नेता एनडी तिवाड़ी की भरपूर तारीफ करते हुए कहा `वह जब मुख्यमंत्री थे तो औद्योगिक पैकेज के लिए पीएम अटल बिहारी वाजपाई से मिलने जाते वक्त मुझे भी ले गए थे। अभी मैं जब दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिला तो उत्तराखंड की बात चल रही थी। उन्होंने भी एनडी की भरपूर तारीफ की। आखिर उन्होंने कुछ तो उनमें देखा होगा न।’ ये तब हुआ जब तिवारी से शाह कभी मिले भी नहीं होंगे।

इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की ओर से आयोजित समारोह में इसका अर्थ उन्होंने बताया कि विपक्ष के भी गुणों को ग्रहण करना चाहिए। कोश्यारी ने एक और जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एनडी शासन में मुझे लोग कहते थे कि आप तो मित्र विपक्ष हो गए। मैं जवाब देता था कि क्या आप चाहते हैं कि मैं शत्रु विपक्ष रहूँ? मिल-जुल के राज-काज चलाने के महत्व को समझाने के लिए भी भगतदा ने पीएम नरेंद्र मोदी के चीन, रूस और अमेरिका के साथ रिश्ते बनाने की कोशिशों-नीतियों का सहारा लिया। उन्होंने कहा-मोदी जी नेहरू के गुट निरपेक्ष नीति से अलग सभी गुटों में शामिल होने की नीति अपना रहे हैं।

पहाड़ के विकास के लिए उन्होंने सभी जिलों में निदेशालय खोलने की दरकार जताई। देहरादून के लोग पिथौरागढ़ जाएँ। लोग गैरसैन जाएँ। चमोली,हरिद्वार, हल्द्वानी जाएँ। साथ ही नेताओं पर तंज़ कसा-सभी मैदान से चुनाव लड़ना चाहते हैं। वे क्यों नहीं पहाड़ से लड़ते? ऐसे विकास कैसे होगा। अपने कड़क बोल के लिए कोश्यारी ने अपने बहुत खराब और खरा बोलने के स्वभाव को जिम्मेदार ठहराया। दो दशक के बावजूद उत्तराखंड नया और सुंदर पर्यटन केंद्र विकसित नहीं कर पाए।

त्रिवेन्द्र ने भगत दा संग के दिलचस्प अनुभव बांटे। उन्होंने कहा कि जब वह प्रचारक थे, तब भगत दा कुमाऊँ के विभाग कार्यवाह थे। बाद में कोश्यारी जी सियासत में आ गए। प्रारब्ध मुझे भी ले आया। मैं कुछ कड़वा हूँ। भगत दा ऐसे नहीं हैं। तब बीजेपी का आलम ये था कि किसी ने 50 रुपए चंदा भी दे दिया तो लगता था बहुत बड़े आदमी हो गए हम। सरकार में आने की सोचते भी नहीं थे हम। हम सोचते थे कि कोई 8-10 हजार खर्च करने वाला मिल जाए। हमारा टिकट ले ले।

मुख्यमंत्री ने कहा-`एक बार देवेन्द्र शास्त्री (दिवंगत विधायक) पहाड़ जा रहे थे। रास्ते में एक फौजी रोडवेज बस में मिल गया। रिटायर हो के आया था। शास्त्री जी ने उनका टिकट बस में ही तय कर दिया। उसने कहा-मैं पागल थोड़ी हूँ जो चुनाव लड़ूँ। जनसभा में लोग होते नहीं थे। हम 20 आदमी होते थे तो 400 बताया करते थे।’ उत्तराखंड आंदोलन की रणनीति बनाने में भी कोश्यारी की भूमिका का त्रिवेन्द्र ने जिक्र किया। उनके विधायक से ले के महाराष्ट्र के राज्यपाल तक के सफर का जिक्र किया।

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