कैजुअल अप्रोच और सेटिंग का बोलबाला!

न टीम चयन और न ही ऐलान में पारदर्शिता

पहले ही कदम में बुरी तरह डगमगा रहा CAU  

Chetan Gurung

विजय हज़ारे ट्रॉफी में पहली बार क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के बैनर के नीचे खेल रही टीम को ले कर आए दिन नए विवाद और खुलासों से हैरानी का आलम है। एसोसिएशन का रवैया बेहद गैर पेशेवराना नजर आ ही रहा। आरोप लगाए जा रहे हैं की उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की छांव तले चल रहे CAU के काम करने का तरीका एक दम कैजुअल है और टीम चयन में सेटिंग का बोलबाला चल रहा। पारदर्शिता का घोर अभाव तो है ही।

CAU अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला

आरोपों के मजबूत होने की वजह खुद CAU दे रही है। रोज ही नए मामलों का खुलासा हो रहा है। टीम के चयन को ले कर जबर्दस्त अंगुली उठाई जा रही है। कहा जा रहा है कि चयनकर्ताओं पर या तो बहुत दबाव है या फिर वे अपने फर्ज का निर्वहन ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। ये जवाब किसी के पास नहीं है कि आखिर जो खिलाड़ी पिछले साल अंडर-23 में उत्तराखंड के लिए ओपनर के तौर पर खेला, वह विजय हज़ारे ट्रॉफी में कुछ ही महीने बाद विशेषज्ञ गेंदबाज के और पर कैसे चुन लिया जा सकता है? उसकी बल्लेबाजी स्किल अचानक खत्म हो गई? वह रातों-रात इतना अच्छा गेंदबाज हो गया कि सालों से गेंदबाजी कर रहे खिलाड़ियों पर भारी पड़ गया? यहाँ बात आदित्य सेठी की हो रही है।

सहारनपुर का अकरम सैफी उत्तराखंड क्रिकेट में अचानक ही सक्रियता से चर्चाओं में। UPCA के राजीव शुक्ला-युद्धवीर सिंह का करीबी बताया जाता है।

सेठी को अंतिम-15 में शामिल किया गया है। बतौर विशेषज्ञ गेंदबाज। और सुनिए। ये भी कम दिलचस्प या फिर हैरान करने वाला मामला नहीं है। टीम में प्रदीप चमोली भी शामिल है। उसको माध्यम तेज गेंदबाज दीपक धपोला के इंजुरी के चलते बाहर होने के कारण टीम में शामिल किया गया। इसमें खास बात ये है कि चमोली टीम तो दूर, स्टैंड बाई खिलाड़ियों में भी नहीं चुना गया था। फिर न जाने क्या आकाशवाणी हुई। अचानक चमोली को पहले तो स्टैंड बाई में रखा गया। वह भी सबसे ऊपर। पहले नंबर पर। फिर जब धपोला बाहर हुआ तो जाहिर है कि उसको ही जगह मिलनी थी। तो क्या किसी सेटिंग के कारण चमोली को स्टैंड बाई में और वह भी नंबर एक लाया गया? सवाल कई आँखें खामोशी के साथ पूछ रही हैं। जवाब किसी के पास नहीं।   

CAU पर एक अंगुली ये भी उठाई जा रही है कि आखिर वह कर क्या रहा है? क्या वह चयन में हो रही गड़बड़ियों पर नजर नहीं रख रहा? उसको पता नहीं चल रहा कि चयन में क्या हो रहा? या फिर उसके ही ईशारे पर ये सब हो रहा? ये सवाल बहुत मौजूं है। आरोप तो ये लगाए जा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के एक टीम फिक्सर और पिछले साल उत्तर प्रदेश में चयन में घूस को ले कर बदनाम सहारनपुर के शख्स के ईशारे पर जम के खेल हो रहे हैं। ये शख्स बीसीसीआई और यूपीसीए का शार्प शूटर समझा जाता है। CAU के काम करने का तरीका पसंद न आने के कारण ही सख्त मिजाज और ईमानदार किस्म के चयनकर्ता मनोज मुद्गल खामोशी संग बीच में ही काम छोड़ के दिल्ली लौट गए थे।

पारदर्शिता का आलम ये है कि अंडर-23, अंडर-16 टीमों का चयन कब हो जाता है और कैसे हो रहा, पता ही नहीं चल रहा। बीसीसीआई हर टीम का ऐलान अधिकृत प्रेस रीलीज़ जारी कर करता है। टीम के प्रशिक्षकों और अन्य स्टाफ की जानकारी भी देता है। इस सबके लिए उसने अलग-अलग लोगों को ज़िम्मेदारी सौंपी है। CAU में सारी शक्तियाँ केंद्रीकृत हैं। अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला तक को जानकारी कम रहती हैं। यही वजह है कि उनको भी नहीं मालूम कि आखिर चयनकर्ताओं से ले के CEO अमृत माथुर तक की नियुक्ति कैसे हुई और किसने की? क्या प्रक्रिया अपनाई गई? वह सीधे इसके लिए बीसीसीआई का नाम लेते हैं, जबकि क्रिकेट का संचालन CoA कर रहा। बीसीसीआई के चुनाव तो इसी महीने 23 अक्टूबर को होने हैं।

ये भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तराखंड पर मैच न होने देने (पुडुचेरी-मेघालय मैच बारिश के कारण रद्द हुआ था) के भी आरोप लग गए। पुडुचेरी का कहना है कि कमजोर मेघालय को वह आसानी से हरा के पूरे अंक बटोर सकता था। उत्तराखंड के इशारे पर मैच नहीं हुआ। बारिश थमने और वक्त होने के कारण मैच 20-20 ओवरों के हो सकते थे। CAU पर स्थानीय और वरिष्ठ क्रिकेटर्स की अनदेखी करने और उनकी जगह बाहरी राज्यों के लोगों या फिर फुटबाल-हॉकी से जुड़े लोगों से काम लेने का आरोप भी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here