अलीगढ़ के प्रदीप ने की प्रत्याशी पद के लिए अयोग्य ठहराने की मांग

उत्तराखंड में भी बाजी सजाए बैठे हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री

अध्यक्ष गुनसोला नहीं विश्वासपात्र सचिव माहिम को दिलाया है वोट का अधिकार

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट में तूफानी बैटिंग कर रहे उत्तर प्रदेश के राजीव शुक्ला की मंशा BCCI चुनाव में बाजी मारने की है। उत्तराखंड में अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला की जगह सचिव माहिम वर्मा को वोट का अधिकार दिलाने के पीछे भी उनकी इसी मंशा को देखा जा रहा है। अलीगढ़ के किसी प्रदीप सिंह ने शुक्ला के खिलाफ BCCI चुनाव अधिकारी से उनकी पात्रता को ले के गंभीर शिकायत कर उनकी तगड़ी घेराबंदी कर डाली है। प्रदीप ने शुक्ला को न सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया है बल्कि UPCA पर भी कई सनसनीखेज आरोप लगाते हुए विशेष जांच की दरकार भी की है।

शुक्ला का उत्तराखंड में शुरु से ही भरपूर रुझान रहा है। वह यहाँ लगातार आते रहे हैं। ऐसा जतलाते रहे हैं कि उनको उत्तराखंड क्रिकेट और यहाँ के क्रिकेटर्स की बेहद फिक्र है। ये बात अलग है कि उत्तराखंड 19 सवाल का गबरू जवान हो गया पर शुक्ला एक भी उत्तरखंडी को भारतीय टीम तो बड़ी बात है, उत्तर प्रदेश रणजी टीम में भी नहीं खिला पाए। यहाँ के खिलाड़ी यूपी के शिविर तक में नहीं आ पाए। उत्तराखंड मूल के महेंद्र सिंह धौनी या फिर ऋषभ पंत ने पूरी क्रिकेट झारखंड और दिल्ली के लिए खेली। उनके भारत से खेलने में शुक्ला की नहीं उनके खुद की प्रतिभा की भूमिका थी।

शुक्ला के आगे-पीछे पूरी CAU उसी तरह बिछी जा रही है, जैसे कभी ब्रिटिश महारानी या फिर वॉयसरॉय के आगे हिन्दुस्तानी राजा-महाराजा-नवाब-बादशाह। सम्मान देना अच्छी बात है पर स्वायत्त संस्था क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड का बाहरी लोगों को अधिक तरजीह देना समझ से बाहर है। BCCI चुनाव, जो 23 अक्तूबर को है, में वोट डालने का अधिकार अध्यक्ष गुनसोला की जगह सचिव माहिम को दिलाया जाना भी शुक्ला के प्रभाव का ही नतीजा समझा जा रहा है। माहिम और उनके पिता पीसी वर्मा शुक्ला के करीबियों में से हैं। उत्तराखंड क्रिकेट में तकरीबन सभी अहम पदों और जिम्मेदारियों पर यूपी तथा एमपी के लोग, जो शुक्ला के खासमखास समझे जाते हैं, काबिज हो चुके हैं। उत्तराखंड के पूर्व क्रिकेटर या फिर जिंदगी क्रिकेट को देने वाले एकदम दरकिनार हो चुके हैं।

कॉंग्रेस के पूर्व विधायक और मसूरी नगर पालिका अध्यक्ष रहे गुनसोला पर वोट के मामले में शायद अतिरिक्त दबाव डालना मुमकिन न होता। माहिम को ये अधिकार दिलवाए जाने के पीछे बीसीसीआई चुनाव के साथ ही उत्तराखंड क्रिकेट पर नियंत्रण को समझा जा रहा है। पहला चुनाव होने और वर्मा के दशकों तक क्रिकेट में लगे रहने को देखते हुए कार्यकारिणी ने भी इस पर खुले आम ऐतराज नहीं किया। BCCI चुनाव न सिर्फ ग्लैमर से भरपूर होता है, बल्कि देश के एक से एक दिग्गज इसके अध्यक्ष के चुनाव में उतरते हैं। इस बार केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय, पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन अध्यक्ष के लिए होड़ में हैं। अन्य पदों के लिए भी ऐसी ही मारामारी है। शुक्ला भी चुनाव लड़ने वाले हैं। ऐसे में उनके खिलाफ विरोधी सक्रिय हो गए।

चुनाव अधिकारी को की गई शिकायत में उनके नौ साल से अधिक समय से अहम पदों पर बने रहने, 20 साल से अधिक समय से उत्तर प्रदेश के बजाए दिल्ली में रहने, UPCA की तरफ से तमाम गड़बड़ियाँ किए जाने समेत अनेक मामले शामिल हैं। शिकायत के साथ ही शुक्ला के पैन और आधार कार्ड और पासपोर्ट की कॉपी भी नत्थी की गई है। साथ ही हॉकी इंडिया से भी जुड़े होने के कारण लोढ़ा कमेटी की सिफ़ारिशों के मुताबिक शुक्ला का BCCI में ही बने रहना अवैध करार दिया गया है। अब इस पर पूरे देश के साथ ही उत्तराखंड की भी नजर रहेगी कि उनके मामले में चुनाव अधिकारी क्या फैसला करते हैं।

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