उत्तराखंड क्रिकेट शुरुआत से ही गलत ढंग से गलत दिशा में!

चयनकर्ता आशीष विंस्टन जैदी कैसे और क्यों गेंदबाजी प्रशिक्षक हो गए?

बीसीसीआई के कार्यकारी अध्यक्ष खन्ना के देहरादून दौरे पर भी चर्चा

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट की कर्णधार CAU से ऐसी उम्मीद किसी ने नहीं की होगी। टीमों के चयन से ले के CEO और चयनकर्ताओं-प्रशिक्षकों की नियुक्तियों को ले के संदिग्ध कदम उठाए गए। पारदर्शिता को दूर से नमस्कार कर दिया गया। अंगुली उठी तो अपनी कमियों और खामियों को बीसीसीआई के माथे डाल दिया गया। मामला उछला तो भी खुद को बेदाग साबित करने में जुट गए। यूपी के क्रिकेट उस्तादों को भड़काया जा रहा कि तुम लोग मीडिया में निशाने पर हो। ऐसे ही एक शख्स ने आज मुझे फोन कर के पहले तो गुस्सा जताया कि आप मुझे जबर्दस्ती फंसा रहे। फिर बातों का सिलसिला आगे बढ़ा। उसी शख्स ने खुद माना, `उत्तराखंड क्रिकेट शुरुआत से ही गलत ढंग से और गलत दिशा में जा रही है’।

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यूपी और उत्तराखंड की दुनिया में सुर्खियां बटोर रहे सहारनपुर के अकरम सैफी ने भी `Newsspace’ से कहा-`मेरा उत्तराखंड क्रिकेट से कोई वास्ता नहीं। न ही मैं चयन में कोई भूमिका निभा रहा हूँ। एक अन्य शख्स ने कहा-मुझे उकसाया जा रहा। ये कहा जा रहा कि आपके खिलाफ यहाँ काफी लिखा जा रहा’। उत्तराखंड क्रिकेट में दखल के आरोपों पर इस बंदे ने कहा-ऐसा होता तो जिस खिलाड़ी को मैं बहुत पसंद करता हूँ, वह टीम में जरूर होता। उसके साथ क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड ने काफी ना-इंसाफ़ी की है।

सैफी ने टेलिफोनिक बात की। उसने माना-क्रिकेट में पारदर्शिता होनी चाहिए। इससे खेल और व्यवस्था के प्रति खिलाड़ियों तथा मीडिया में यकीन पैदा होगा। एक खिलाड़ी जिसने अपनी कप्तानी में उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय चैंपियन बनाया, उसके साथ उत्तराखंड में बेहतर व्यवहार हो सकता था। मैंने वह लिस्ट देखी, जिसमें एक खिलाड़ी का नाम काट के दूसरे का लिखा गया है। ये एकदम गलत है। मैंने ये बात CAU के लोगों से कही’। स्टैंड बाई में न होने के बावजूद खिलाड़ी को टीम में शामिल करना भी ठीक नहीं है।

यूपी के ही एक और शख्स ने नाम न छापने की गुजारिश के साथ कहा-`जो गलत है, वह गलत है। जो आप लिख रहे हैं, वह बहुत सही है, लेकिन CAU के लोग जबर्दस्ती मेरे और सर लोगों (राजीव शुक्ला और युद्धवीर सिंह) की तरफ ध्यान मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों का भी उत्तराखंड के मामलों में कोई हाथ नहीं है। जो भी गड़बड़ियाँ हो रही हैं, वह CAU के स्तर पर हो रही है’। CAU पर ये भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि बीसीसीआई संबद्धता के बाद सरकार तक की अनदेखी-उपेक्षा की जा रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, खेल मंत्री अरविंद पाण्डेय, स्थानीय सांसद, विधायक और खेल सचिव उपलब्ध होने के बावजूद राजीव गांधी स्टेडियम में पहले मैच में उनको निमंत्रित ही नहीं किया गया।

दरअसल, समारोह ऐसा लग रहा था, मानो यूपी में हो रहा हो। मुख्यमंत्री और खेल मंत्री के साथ ही खेल सचिव बृजेश संत ने भी संबद्धता के मामले में CAU की भरपूर मदद की थी। इतना ही नहीं। चयनकर्ता भी अचानक ही बुलाए गए। कोई औपचारिकता नहीं अपनाई गई। आशीष विंस्टन जैदी उत्तराखंड टीम के गेंदबाजी प्रशिक्षक हैं।  उनको पहले चयनकर्ता बनाया गया था। फिर अचानक क्या हुआ पता नहीं। चयनकर्ता मुद्गल भी चले गए। इस तरह बीपीएस चौहान और अंबरीष गौतम की चयन समिति में एंट्री हुई। क्यों और कैसे हुई? कुछ नहीं पता।

जैदी क्यों कर चयनकर्ता से प्रशिक्षक हो गए, इसका जवाब भी देने के लिए न CAU सामने आया न मीडिया ही सवाल पूछ रही। 23 अक्तूबर को BCCI के चुनाव हैं। चुनाव के बाद बोर्ड पूरा हिसाब ढंग से सभी राज्य क्रिकेट संघों से लेगा। उस सूरत में CAU को कई मामलों में बोर्ड के सवालों का जवाब देने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, तय है। इस बीच BCCI के शक्तिहीन कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना का चुनाव से ऐन पहले देहरादून आना और CAU की तारीफ कर जाना भी सवालों के घेरे में है।

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