BCCI चुनाव नतीजों पर टिकेगा उत्तराखंड क्रिकेट का भी भविष्य

`क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड’ अब चयन में घूसख़ोरी के आरोपों में घिरा  

विरोधी गुट सुबूत जुटा के COA-BCCI को सौंप रहे

Chetan Gurung

BCCI चुनाव के बाद उत्तराखंड की क्रिकेट पर भी गहरा असर पड़ने की आशंका या संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। खास तौर पर क्रिकेट  एसोसिएशन और उत्तराखंड के अहम पदाधिकारियों पर काँग्रेस पृष्ठ भूमि का ठप्पा और उससे ज्यादा तमाम गंभीर आरोपों और विवादों को देखते हुए दिक्कत हो सकती है। जिस कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना से उम्मीदें लगाए हुए थे, वह तो खुद हल्ला करते फिर रहे कि उनको बीसीसीआई की AGM में बुलाया ही नहीं गया। ऐसी दुर्गति वाले क्या मदद कर पाएंगे उत्तराखंड की! CAU और उत्तराखंड के परोक्ष बॉस के तौर पर स्थापित समझे जा रहे राजीव शुक्ल खुद दिल्ली के होने के बावजूद UP से प्रतिनिधि होने के आरोपों का सामना कर रहे हैं। उनके ऊपर भी चुनाव प्रक्रिया से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है।

BCCI चुनावों के नतीजे CAU के लिए बेहद अहम साबित होंगे। बीजेपी अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय, पुराने बोर्ड अध्यक्ष श्रीनिवासन, पूर्वोत्तर का समर्थन लिए बैठे सौरव गांगुली और रजत शर्मा अध्यक्ष की होड़ में हैं। जय और गांगुली ही नहीं श्रीनिवासन भी अगर अध्यक्ष बन जाते हैं तो वे उत्तराखंड में आरोपों की लहर को देख जांच बिठा सकते हैं। खास तौर पर करोड़ों का बजट खर्च होने के कारण भी। जय बीजेपी वाले हैं तो गांगुली साफ छवि वाले। श्रीनिवासन से CAU के विरोधी गुटों के रिश्ते अच्छे बताए जाते हैं। पिछले साल जब सिर्फ दो लोग अमित पांडे और दिनेश शर्मा उत्तराखंड क्रिकेट को BCCI के निर्देश पर संभाल रहे थे, तब भी उत्तराखंड में 18 करोड़ के करीब खर्च हुआ था। इस बार ये बजट 25 करोड़ से ऊपर जाने की संभावना है।

CAU पर एक के बाद एक ऐसे-ऐसे आरोप लग रहे हैं, जिसमें CBI जांच बैठ जाती है तो ताज्जुब नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट खुद क्रिकेट की मॉनिटरिंग कर रहा है। वह अपने ऊपर एक धब्बा नहीं लगने देगा। टीम चयन को ले के बवाल शुरू से हो रहा है। हरिद्वार में अब पुलिस केस ही इस मामले में हो गया है। एक खिलाड़ी की ओर से SSP से शिकायत की गई कि विजय हज़ारे ट्रॉफी के लिए चयन की एवज में पाँच लाख रुपए मांगे गए। अगर आरोप झूठा है तो भी जांच सख्ती से होनी चाहिए। ताकि कोई आएँ-बाएँ आरोप न लगाए। अगर जांच में सही पाया जाता है तो CAU के लिए दिक्कतें बढ़ जाएंगी। CAU के `लोगो’ के साथ एसोसिएशन की ओर से सफाई और खुद सचिव माहिम वर्मा का पोस्ट को वायरल किया जाना भी संगीन आरोप है। इसका स्क्रीन शॉट सब कुछ बयां कर रहा है।

CAU सचिव माहिम वर्मा इस लोगो लगे स्क्रीन शॉट को वायरल कर रहे।

एक संदिग्ध और संदिग्ध गतिविधि वाले के साथ सचिव की करीबी खुफिया और सतर्कता विभाग के कान खड़े कर चुका है। आरोपों की बौछार के कारण सरकार भी क्रिकेट पर करीबी नजर रख रही है। अपने समारोह में मुख्यमंत्री, खेल मंत्री, खेल सचिव और अन्य सरकारी नुमाइंदों को नजरअंदाज किए जाने के साथ ही CAU में मुख्यमंत्री के रिश्तेदार संजय रावत की मौजूदगी के कारण भी सरकारी खुफिया एजेंसीज एलर्ट हैं। CEO अमृत माथुर की नियुक्ति खुद में बहुत बड़ा रहस्य है कि आखिर उनको नियुक्त किसने किया? इस पर `Newsspost’ पर अलग स्टोरी आएगी। COA और बीसीसीआई भी उत्तराखंड पर पैनी नजर गड़ाए हैं।

विजय हज़ारे ट्रॉफी के लिए उत्तराखंड टीम में चयन के नाम पर 5 लाख मांगने की पुलिस में शिकायत

CAU के लिए किसी झटके से कम नहीं है कि BCCI की AGM (23 october 2019) में सीके खन्ना को कार्यकारी अध्यक्ष होने के बावजूद COA ने नहीं बुलाया है। शुक्ल और खन्ना अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला और सचिव माहिम वर्मा दोनों के करीबी हैं। अभी ताजा-ताजा देहरादून दौरे पर पर खन्ना सपरिवार आए थे। वे CAU की भूरी-भूरी प्रशंसा कर गए थे। IPL मैचों के लिए बोल गए थे कि ये देहरादून में हो सकते हैं। वह ये बताना भूल गए थे कि IPL मैचों के स्थल BCCI नहीं बल्कि टीम फ्रेंचायजी करती हैं। उनको जहां मुनाफा दिखता है, वहाँ मैच कराते हैं। खन्ना से न किसी मीडिया वाले ने CAU पर लग रहे आरोपों के बारे में पूछा न उन्होंने खुद कुछ बोला। खन्ना आखिर किस हैसियत से आधिकारिक जवाब दे रहे थे, वही जाने।

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