आसान नहीं होगा अब यूपीसीए के उस्ताद के लिए मोहरा बिठाना

माहिम के हटने के बाद सचिव की कुर्सी के लिए अब खुल के जंग के आसार

बड़े और रसूखदार भी अब कूद सकते हैं जंग में

CAU के विवादों में घिरने से बीजेपी भी सक्रिय

CoA की उत्तराखंड को ले के SC में पेश स्टेटस रिपोर्ट पर सभी की नजरें

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट में अबकी बार तूफान आ के रहेगा। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव माहिम वर्मा के BCCI में बतौर उपाध्यक्ष चले जाने के बाद कई सरदार लोग अब समरभूमि में तलवार ले के उतरने के मूड में हैं। अब तक उत्तराखंड क्रिकेट को कठपुतली की तरफ चला रहे यूपीसीए के निदेशक और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला के लिए माहिम की तरफ एक और मोहरा सचिव की कुर्सी पर बिठाने के लिए तलाशना आसान नहीं होगा। साथ ही इस बार उनको इसके लिए भी जंग लड़नी पड़ सकती है।

शुक्ला ने भले उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड क्रिकेट के लिए कुछ न किया हो, लेकिन दोनों जगह की क्रिकेट दुनिया में भरपूर दखल रखते हैं। ये उनका जलवा ही है कि यूपीसीए में केन्द्र में रहते हुए भी CAU में छोटे भाई सुधीर के साथ साल 2004 की फरवरी में खामोशी के साथ सदस्य बन गए। एक साथ यूपी और उत्तराखंड में वह कैसे सदस्य बन गए, ये राज है। घपले को इंगित करता है। उत्तराखंड क्रिकेट में जबर्दस्त दखल रखने वाले पीसी वर्मा और माहिम उनके ईशारे के बगैर कोई काम नहीं करते हैं। शुक्ला के दखल को सुप्रीम कोर्ट की प्रशासकों की समिति ने भी गलत माना है। साथ ही इसके चलते समिति ने सीएयू के चुनाव पर ही अंगुली उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट को अपनी सनसनीखेज स्टेटस रिपोर्ट दी है।

इस रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट क्या संज्ञान लेता है, इस पर उत्तराखंड-यूपी ही नहीं देश भर के क्रिकेट से जुड़े लोग और खिलाड़ी भी नजर रखे हुए हैं। बीसीसीआई चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने जाने के दौरान भी माहिम को शुक्ला के साथ मुंबई में छाए की तरह देखा गया। शाहरुख खान के बंगले में भी शुक्ला माहिम और सहारनपुर निवासी अपने एक विवादित चेले को ले कर पहुंचे थे। बीसीसीआई में उपाध्यक्ष बनते ही माहिम को तत्काल CAU सचिव की कुर्सी छोड़नी होगी। अभी तक जोत सिंह गुनसोला को अध्यक्ष बनाए जाने पर तो नहीं लेकिन माहिम को सचिव बनाए जाने पर बहुत विवाद चल रहा है।

माहिम का क्रिकेट पृष्ठभूमि और योगदान न होने के कारण अंदरखाने विरोध पहले दिन से है, लेकिन जिस तरह विजय हज़ारे ट्रॉफी के साथ ही अन्य प्रतियोगिताओं के लिए टीमों का चयन हुआ, उसके कारण भी उनको ले के जबर्दस्त विवाद और विरोध के सुर उठे हुए हैं। `Newsspace’ के पास ऐसे ऑडियो क्लिप्स हैं, जिसमें गंभीर आरोप चयनकर्ता लगा रहे हैं। ये क्लिपिङ्ग्स चयनकर्ताओं की भी है और महिला खिलाड़ियों की भी। CAU के चुनाव में पिछली बार भले शुक्ला की मनमर्जी चली लेकिन एक पहलू और भी है। उत्तराखंड के क्रिकेट क्षत्रपों ने भी पहले चुनाव में कोई गैर जरूरी दिलचस्पी नहीं ली थी। अब जबकि उत्तराखंड क्रिकेट में तमाम आरोपों की झड़ी लगी हुई है, और अचानक सचिव की कुर्सी खाली हो गई है तो वे अब कोई लापरवाही कुर्सी की लड़ाई में करने को राजी नहीं हैं।

इस बीच सभी को तत्काल ये पता चल चुका है कि CAU को बीसीसीआई से जबर्दस्त फंडिंग, जो करोड़ों में है, हो रही है, सो ये भी अब सभी को सचिव की कुर्सी के प्रति आकर्षित कर रहा है। वे अपने तार जोड़ रहे हैं। एसोसिएशन के एक प्रमुख शख्स ने माना कि इस बार सचिव के चुनाव में खूब ज़ोर लग रहा है। जिलों के अध्यक्ष और सचिव भी ताल ठोंक रहे हैं। वे भी सियासी ज़ोर लगा रहे हैं। बीजेपी से जुड़े पदाधिकारी भी इन चुनावों में खामोशी संग दिलचस्पी ले रहे हैं। साथ ही सियासत करने लगे हैं। ऐसे में शुक्ला या किसी और के लिए अब CAU में एकाधिकार रखना आसान नहीं होगा।

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