शहर के बीचों बीच रोज अवैध धंधा और प्रशासन बेखबर

मेंबर्स-एजेंट्स को पैसे लौटाने को राजी नहीं माफिया

पुलिस-दलालों की धौंस दे रहे माफिया

Chetan Gurung   

क्रॉस रोड मॉल से किटी चला रहे माफिया दंपत्ति पर पुलिस और प्रशासन की मेहर है। ऐसा न होता तो अब तक तमाम किटी माफिया के जेल जाने के बावजूद इस दंपत्ति का खेल निर्बाध न चलता। पुलिस और दलाल किस्म के लोगों का नाम ले के एजेंट्स-मेम्बर्स को धमकियाँ न दिलाती। `Newsspace’ के पास सिर्फ इस किटी माफिया के नहीं, कई और की भी शिकायतें परेशान बुजुर्ग महिलाओं के जरिये मिल रही हैं। इस बीच किटी माफिया एजेंट्स-मेम्बर्स पर राशन पानी बेचने और नई किटी भी खेलने का दबाव बढ़ा रही हैं।

मॉल में बेदी ज्वेलर्स के नाम से दुकान चला रही और एक अन्य चर्चित किटी माफिया नागर सिस्टर्स से भी लोग बेहद परेशान हैं। पिछले कुछ दिनों से पूजा बेदी की किटी में शामिल महिलाओं ने बताया कि उनको पैसा अक्तूबर में देने का वादा किया था। यानि, एक साल बाद। अब नवंबर भी आ गया। उनको पैसा देने से साफ इंकार किया जा रहा है। पुलिस में जान पहचान होने और जेल जाने से न डरने का भी दावा कर उनको डराने की कोशिश की जा रही है।

आज एक बुजुर्ग महिला और एक फौजी की पत्नी ने फोन पर परेशान हो कर बताया कि खुद को पूजा का खास बताने वाले के शख्स ने उनको फोन कर पूजा को परेशान न करने को कहा। वह खुद के भी किटी का सदस्य होने और पूजा से पैसे उनको दिलाने का दावा कर रहा था। नागर सिस्टर्स की तरफ से भी ऐसे कई दलाल मेंबर्स को धमका और बहला रहे हैं। उनको पुलिस के पास जाने से नुक्सान हो जाने की गीदड़ भभकी दे रहे हैं।

इन मेंबर्स के मुताबिक लाखों रुपए वे किटी में लगा चुके हैं, लेकिन पैसे लौटाने के नाम पर वे सिर्फ आश्वासन और धमकियाँ दे रहे हैं। पुलिस का नजरिया बहुत ही पक्षपातपूर्ण है। उनके अनुसार पुलिस की शह न होती तो किटी माफिया उनको नाना किस्म की धमकियाँ देने की हिम्मत न दिखाती। पूजा तो उनको अब पाँच हजार रुपए के राशन का पैक बेचने पर ही पैसे लौटाने की बात कर रही है। इसमें चावल, आटा, दाल और तेल समेत अन्य सामान हैं। वे लोगों के घरों में जा के इनको क्यों बेचें? वह भी अपना पैसा वापिस लेने के लिए।

ताज्जुब है कि शहर के बीचों बीच आज भी किटी का धंधा चला रहीं और करोड़ों रुपए हर महीने बटोर रहीं किटी माफिया पुलिस की नजरों में नहीं आ रही हैं। इससे किटी माफिया के दावे सही लगते हैं, कि उनकी पहुँच पुलिस-प्रशासन में भी है।

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