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CAU:अमृत माथुर के आगे न अध्यक्ष न सचिव की कोई हैसियत!

CEO के सामने बौने साबित हो रहे गुनसोला-माहिम

दफ्तर के बजाए `Ida’ होटल से कर रहे काम

राजीव शुक्ला के खासमखास के सामने वर्मा लॉबी को भी झटके

UP का दखल और बढ़ा,श्रीवास्तव भी प्लेयर्स एसोसिएशन में

Chetan Gurung

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमृत माथुर असली शक्ति केंद्र साबित हो रहे हैं। उनके आगे न तो अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला और न ही सचिव माहिम वर्मा की ही कोई हैसियत नजर आती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और BCCI के उस्तादों में शुमार राजीव शुक्ला के खासमखास माथुर अपने हिसाब से काम कर रहे हैं। एसोसिएशन के लोगों की बोलती उनके आगे बंद नजर आती है। माथुर उनसे आदेश लेने के बजाए खुद ही फैसले कर रहे। इसके पीछे शुक्ला और सहारनपुर के एक कुख्यात चेले को देखा जा रहा है। आलम ये है कि एसोसिएशन को तुगलकी अंदाज में शुरू में चलाने वाली वर्मा लॉबी को भी दिक्कत होने लगी है।

माथुर का चयन और नियुक्ति ही जिस तरह हुई, वह साबित करने के लिए काफी है कि वह आखिर क्या हैसियत उत्तराखंड क्रिकेट में रखने वाले हैं। CAU के अध्यक्ष-सचिव को उनकी नियुक्ति के बारे में भनक तक नहीं लगी थी। अब खिसियाहट में और अपनी इज्जत बचाने के लिए पदाधिकारी कहते फिर रहे कि माथुर की नियुक्ति उन्होंने की। अगर उनके बात को सच माना जाए तो फिर वे ये क्यों नहीं बता पा रहे कि माथुर के चयन और नियुक्ति में क्या प्रक्रिया अपनाई गई?

CAU में पीसी वर्मा-माहिम वर्मा के रूप में अभी तक पिता-पुत्र लॉबी ही हावी थी। माहिम बीसीसीआई में उपाध्यक्ष हो चुके हैं। फिर भी लोढ़ा कमेटी की सिफ़ारिशों को धता बता दोहरे पदों पर जमे हुए हैं। माहिम का नाम तमाम विवादों में आ रहा है। प्लेयर्स एसोसिएशन में अब रोहित प्रकाश श्रीवास्तव को शामिल करने से एक बार फिर सवाल उठ खड़े हो रहे हैं। देहरादून में संजीव जखमोला और दिनेश नौटियाल सरीखे प्रथम श्रेणी खिलाड़ी उपलब्ध हैं। फिर क्यों यूपी के ईलाहाबाद के रोहित को एसोसिएशन में लाया गया? समझा जा रहा है कि शुक्ला के ईशारे पर रोहित को भी माहिम ही ले के आए।

इससे पहले मीनाक्षी घिल्डियाल सरीखी बेहद वरिष्ठ क्रिकेटर की भी उपेक्षा कर कहीं जूनियर निष्ठा फ़रासी को प्लेयर्स एसोसिएशन में सदस्य बना दिया गया था। इस पर भी खूब अंगुली उठाई जा रही है। माहिम का नाम टीमों के चयन में सिफ़ारिश करने को ले के भी उछल चुका है। जो गंभीर अपराध है। इसके बावजूद शुक्ला ने अपनी गोटियाँ चलते हुए माहिम को अपनी जगह BCCI में उपाध्यक्ष बनवा दिया। माथुर भी यूपी में शुक्ला के साथ काम कर चुके हैं। शुक्ला ही पर्दे के पीछे से उत्तराखंड क्रिकेट को चला रहे हैं। वर्मा पिता-पुत्र उनके परम करीबियों में शुमार होते हैं।

सूत्रों के मुताबिक वर्मा पिता-पुत्र अब माथुर के कार्य करने की शैली से परेशान और नाखुश हैं। दोनों ने शुक्ल से इस बारे में शिकायत की है। ये ताज्जुब की बात है कि माहिम BCCI में भी होने के बावजूद माथुर के सामने कुछ नहीं कर पा रहे। आलम ये है कि माहिम के चेलों से ज्यादा तनख्वाह उन लोगों को मिल रही, जो माथुर के विश्वासपात्र हैं। एसोसिएशन का दफ्तर कान्वेंट रोड पर है। इसके बावजूद माथुर ने EC रोड पर स्थित `ida’ होटल को अपना दफ्तर और रिहाइश बनाया हुआ है। यहाँ तकरीबन चार कमरे उनके पास CAU के खर्चे से बुक हैं। वह सीएयू दफ्तर पलट के भी नहीं गए हैं। होटल से ही काम कर रहे हैं।

गुनसोला-वर्मा की हैसियत नहीं हो पा रही कि वे माथुर को होटल छोड़ दफ्तर आने को बाध्य कर सके। आने वाले दिनों में ये दंगल और परवान चढ़ेगा। ऐसी आशंका जताई जा रही है। आपसी तालमेल न होने और चयनकर्ताओं के विवादित होने को विजय हज़ारे और अंडर-23 ट्रॉफी में उत्तराखंड की निराशाजंक प्रदर्शन को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। उत्तराखंड विजय हज़ारे ट्रॉफी के मुख्य दौर में क्वालिफ़ाई नहीं कर पाया। खास बात ये है कि शुक्ला आने वाले दिनों में भी दोनों ही तरफ हाथ रखे रहेंगे। वैसे माहिम खुद भी EC रोड पर ही स्थित एक कोचिंग सेंटर में अधिक बैठ रहे हैं। ये सेंटर भी यूपी पृष्ठ भूमि वाले व्यक्ति की है।

हाल ये है कि CAU फिलहाल, छुट्टे सांड जैसा दिख रहा है। जिसकी कोई दशा-दिशा का अंदाज नहीं। कोई किसी के साथ न सामंजस्य बैठा रहा न क्रिकेट को ले के उनमें गंभीरता दिख रही। बाकी नीचे से ले के ऊपर तक यूपी का साम्राज्य छा चुका है। कम से कम तीन लॉबी अब CAU में काम कर रही है। आने वाले दिनों में ये खेल क्या गुल खिलाता है, इस पर नजर रहेगी।

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