Home उत्तराखंड उत्तराधिकारी पर पसोपेश से फंसे मुख्य सचिव उत्पल!

उत्तराधिकारी पर पसोपेश से फंसे मुख्य सचिव उत्पल!

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utpal kumar singh

न केंद्र जा पाए, न ही विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष बन पा रहे

ओमप्रकाश,संधु,राधा रतुड़ी में किसके सिर सजेगा नौकरशाहों के अगले मुखिया का ताज

Chetan Gurung

उत्तराखंड नौकरशाही के बॉस उत्पल कुमार सिंह के उत्तराधिकारी कौन होंगे? वरिष्ठता में तीसरे नंबर पर (रामासामी-उत्पल के बाद) मौजूद ओमप्रकाश या राधा रतुड़ी? या फिर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे सुखबीर सिंह संधु? केंद्र के लिए चयनित हुए महीनों गुजर जाने के बावजूद मुख्य सचिव की कुर्सी पर बैठे उत्पल को कार्यमुक्त नहीं किया गया है। इसकी वजह उनके उत्तराधिकारी को ले के तस्वीर साफ न होना माना जा रहा है।

ओमप्रकाश को आज के दिन सबसे शक्तिशाली नौकरशाह माना जाता है। उनकी पैठ का अंदाज इतने से लगाया जाता है कि वह जो चाहते हैं, उसका तकरीबन 90 फीसदी क्रियान्वयन हो जाता है। सरकार में जिन नौकरशाहों का जबर्दस्त जलवा है, उनमें नितेश झा और उनकी पत्नी राधिका झा सबसे ऊपर है। ओमप्रकाश के साथ उनके समीकरण न सिर्फ बहुत मजबूत हैं बल्कि ज़्यादातर नौकरशाहों के उलट झा दंपत्ती विवादों से बचे रहे हैं।

कुछ नौकरशाहों पर बहुत विश्वास के बावजूद ये बात अलग है कि तबादलों के मामलों में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत किसी खास नौकरशाह की अधिक नहीं सुनते हैं। इस मामले में वह खुद पर यकीन करते हैं। साथ ही कार्मिक विभाग की राय को तरजीह देना पसंद करे हैं। इस वक्त जितने भी जिलाधिकारी-कलेक्टर हैं, उनमें ऐसा कोई नहीं है, जो जुगाड़-सिफ़ारिश के जरिये आए हों। ऐसा ही आलम जिलों के पुलिस कप्तानों का है। इसके बावजूद अन्य मामलों में ओमप्रकाश की पूरी चलती है। वह शुरू से ही मुख्यमंत्री के करीबियों-विश्वासपात्रों में शुमार हैं।

उनको किसी भी वजह से सुपरसीड कर के राधा या संधु को मुख्य सचिव बनाया जाता है तो ये अचंभा ही होगा। साथ ही उनको सिस्टम से बाहर भी जाना पड़ेगा। जूनियर के मुख्य सचिव बनने की सूरत में वरिष्ठ को सिस्टम में रखा नहीं जाता है। ओमप्रकाश को मुख्य सचिव बनाने में लगता है मुख्यमंत्री में कोई हिचक पक्का है। ऐसा न होता तो उत्पल को केंद्र के लिए कार्यमुक्त कर ओमप्रकाश को लोक सभा चुनाव से पहले ही मुख्य सचिव बना दिया गया होता।

राधा रतुड़ी की प्रतिष्ठा अच्छी है, लेकिन उनको मुख्य सचिव बनाया जाता है तो फिर ओमप्रकाश कहाँ जाएंगे? ये सवाल उनको अभी इस कुर्सी पर बिठाने से मुख्यमंत्री को हर हाल में रोकेगा। संधु के बारे में पक्की खबर है कि वह तभी उत्तराखंड आएंगे, जब उनको मुख्य सचिव बनाने का ठोस आश्वासन मिलता है। ACS बनने के लिए वह नहीं आने वाले। आईएएस अफसरों की एक लॉबी संधु को केंद्र से लौटने न देने को प्रतिबद्ध दिखती है। वैसे अभी किसी को भी मुख्य सचिव बनने की जल्दी नहीं होनी चाहिए।

राधा के पास 6 साल की सेवा बची है। संधु के पास 5 साल की। ओमप्रकाश का भी रिटायरमेंट मई-2022 में है। सबसे वरिष्ठ आईएएस अनूप वधावन हैं, जो 1985 बैच के हैं। वह केंद्र में हैं। उत्तराखंड आना नहीं चाहते हैं। उनके पास भी पौन दो साल और हैं, रिटायर होने के लिए। राज्य में मौजूदा सबसे आला नौकरशाह पूर्व मुख्य सचिव रामास्वामी हैं। उनके रिटायरमेंट को चार महीने बचे हैं। उत्पल की नौकरी अभी 8 महीने बची है। ये उम्मीद अब है नहीं कि वह केंद्र में जाएंगे।

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष की कुर्सी सुभाष कुमार के हटने के बाद से खाली है। ज्यादा उम्मीद यही है कि वह शायद इस कुर्सी पर जाएंगे। उत्पल अपनी भावी योजनाओं के बारे में अपने पत्ते खोलने के मूड में नहीं हैं। `Newsspace’ से उन्होंने कहा-`केंद्र में जाने या फिर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग जाने के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। मैं तो यहाँ (मुख्य सचिव के लिए) भी खुद नहीं आया था। जो होगा देखा जाएगा।’

अंदरखाने की खबर ये है कि मुख्यमंत्री बेदाग छवि-अच्छी प्रतिष्ठा वाले उत्पल को कार्यमुक्त कर अपनी पेशानी पर कोई बल नहीं पड़ने देना चाहते हैं। वह जहां तक मुमकिन हो उनको मुख्य सचिव बनाए रख के उत्तराधिकारियों को ले कर पैदा होने वाली समस्या से बचने की कोशिश कर रहे हैं।  

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