सेना, कैंट बोर्ड,पुलिस और सरकार नाकाम

सारे नदी-नालों-खालों पर अवैध कब्जे

Chetan Gurung

सेना के नियंत्रण वाले डाकरा-गढ़ी कैंट में सरकारी-सेना और नजूल ज़मीनों पर अवैध कब्जों का सिलसिला तेजी से बढ़ा है। न सेना, न कैंट बोर्ड, न पुलिस और न ही राज्य सरकार इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए सख्त कदम उठाने को राजी दिख रही हैं। हाल के दिनों में कैंट बोर्ड ने जरूर इस दिशा में कदम उठाने की दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन नदी-नालों और खालों पर माफिया तंत्र के अवैध कब्जों को रोक नहीं पाया है। डाकरा में संजय विहार और टप्केश्वर मंदिर इलाके में धुआंधार कब्जे हो रहे हैं।

संजय विहार डाकरा-गढ़ी कैंट की सबसे बड़ी कॉलोनी है। तीन तरफ से ये बड़े और विशाल बरसाती नालों से घिरा है। पहले तो जिस शख्स ने इस कॉलोनी के प्लॉट काटे, उसने ही अपनी जमीन के साथ ही नालों की जमीन तक के पैसे खा दिये। एक दिन जब कॉलोनी वालों ने उनको पकड़ लिया, और जमीन का हिसाब पूछा, तब जा के वह कभी पलट के कॉलोनी नहीं आए। जिन लोगों को जमीन बेची गई, उनको दाखिल खारिज के कागज नहीं दिए। सिर्फ रजिस्ट्री हुई।

इस जमीन पर कब्जे जब बहुत हुए तो कैंट बोर्ड ने ही दो दशक पहले नाले के बीचों-बीच बोर्ड लगा दिया था। इसमें लिखा था कि बोर्ड के दोनों तरफ 30-30 गज तक कोई निर्माण नहीं होगा। ये बोर्ड आज भी मौजूद है। उसके एकदम करीब निर्माण हो चुके हैं। अवैध रूप से। माफिया तत्वों के साथ ही स्थानीय लोगों ने भी नालों पर कब्जा जमा लिया है। ये ताज्जुब की बात इसलिए है कि ये कॉलोनी कैंट बोर्ड कार्यालय से महज 200 मीटर की दूरी पर है।

इस जमीन पर अवैध कब्जों को ले कर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अशोक कुमार ने स्पेशल टास्क फोर्स को जांच सौंपी है। इसकी दूसरी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। हैरानी की बात है कि जमीन के मालिकाना हक का पता आज तक किसी को नहीं है। न राज्य सरकार को न कैंट बोर्ड को। बोर्ड की मुख्य अधिशशी अधिकारी तनु जैन ने जरूर `Newsspace’ से वादा किया कि वह अवैध कब्जों को हटाने पर कार्य करेगी। बोर्ड के इंजीनियर की अगुवाई में संजय विहार में अवैध कब्जों का निरीक्षण करने दल पहुंचा। ये कब्जा करने वाले का दुस्साहस है कि निरीक्षण के बावजूद कुछ देर बाद निर्माण के लिए चूने से मार्किंग कर चुके हैं।

टप्केश्वर मंदिर क्षेत्र में भी नालों को भर के मकानों का निर्माण का कार्य चल रहा है। पुलिस की एसटीएफ़ की रिपोर्ट में कहीं इसका जिक्र नहीं है कि नालों को भर के किस तरह लोगों को प्लॉट बेचे जा सकते हैं। अशोक कुमार ने `Newsspace’ से कहा कि वह खुद ज़मीनों पर अवैध कब्जों के सख्त खिलाफ हैं। एसटीएफ़ को वह लगातार निर्देश दे रहे हैं। इस बारे में में एसटीएफ़ से एक और रिपोर्ट उन्होंने तलब की है।

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