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उत्तराखंड क्रिकेट पर अब 3 दिसंबर को सुप्रीम फैसला

चीफ जस्टिस ने नई बेंच बनाने का किया फैसला

UCA की याचिका से संकट में CAU

तमाम आरोपों में घिरे माहिम वर्मा के चलते मान्यता पर खतरा

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट पर अब अगले हफ्ते सुप्रीम फैसला आएगा। सुप्रीम कोर्ट में पूर्व निर्धारित तारीख के मुताबिक 27 और 28 नवंबर को सुनवाई और आदेश की संभावना थी। नए चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने नए सिरे से बेंच का गठन करने और अगले महीने के पहले हफ्ते में सुनवाई की तारीख तय करने का फैसला किया है। ये तारीख 3 दिसंबर है।

सुप्रीम कोर्ट में BCCI बनाम बिहार क्रिकेट एसोसिएशन पर जो फैसला होना है, उसके साथ ही उत्तराखंड, तमिलनाडू समेत कई अन्य राज्यों के मामलों को भी जोड़ दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन ने याचिका दायर की है। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन भी इसमें पार्टी है। दोनों ही एसोसिएशन ने उत्तराखंड में खुद को मान्यता देने के लिए BCCI को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की थी। इसके लिए दोनों ने सारे जरूरी दस्तावेज़ तैयार रखे थे। प्रतियोगिताएं भी कराई थीं।

इसके बावजूद मान्यता क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड ले उड़ा। खास बात ये है कि उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन को मान्यता देने की सिफ़ारिश साल 2001, 2004, 2008 में भी BCCI की ही समितियों ने उत्तराखंड का दौरा करने के बाद किया था। जब छत्तीसगढ़ और बिहार को मान्यता मिली थी तो उत्तराखंड को भी मान्यता मिलने की पूरी उम्मीद थी। यूपी और बीसीसीआई के एक खास बड़े नाम के ईशारे पर मान्यता रुकवा दिये जाने का आरोप है। तब ये मान्यता मिलती तो उत्तरांचल या फिर उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन को। न कि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को। मान्यता रुकवाने की असली वजह यही थी।

CAU को मान्यता मिलने की असली और इकलौती वजह सिर्फ सरकार का अनुदान उसको मिलना माना जा रहा है। अन्य बिन्दुओं में उत्तराखंड और उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन उससे कहीं आगे है। CAU के लिए सुप्रीम कोर्ट में दिक्कत साफ दिखती भी है। रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी ऑफिस में फर्जी दस्तावेजों को जमा करने और CoA की भी रिपोर्ट उसके खिलाफ होना इसकी प्रमुख वजह है। CoA का तो गठन ही सुप्रीम कोर्ट ने किया था। मान्यता मिलने के बाद से ही जिस तरह CAU विवादों की महासागर में डूब गया है, उसकी भी पूरी फ़ाइल विरोधियों ने तैयार कर ली है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ये दस्तावेजीकरण बहुत अहम भूमिका निभा सकते हैं। दूसरी ओर CAU में सत्ता के साथ ही फूट भी पड़ चुकी है। तीन धड़ों में वह बंट चुका है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का मतलब जांच होना भी है। इसमें कई मामले उधड़ जाएंगे। रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी को भी दिक्कतों को सामना करना पड़ सकता है। फर्जी दस्तावेजों के मामले में उसकी खामोशी सर्वोच्च अदालत में उसको भी पार्टी बना सकती है। चुनाव अधिकारी भी तलब किए जा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अगर CAU के खिलाफ फैसला दे दिया तो उत्तराखंड और BCCI की सियासत का नजारा एक झटके में बदल सकता है। तब CAU की मान्यता जा सकती है। किसी और एसोसिएशन को मान्यता दी जा सकती है। फिर CAU के कोटे से BCCI उपाध्यक्ष बन चुके माहिम वर्मा की कुर्सी पर भी आंच तय है। वर्मा का इस्तीफा जबरन और साजिश के तहत मंजूर होने से रोके जाने के कारण CAU का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में और कमजोर पड़ना तय है। वर्मा के खुद को सरकारी अधिकारी बताए जाने को भी UCA अहम मुद्दे के तौर पर सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करने वाला है। वर्मा उपनल कर्मचारी है। उत्तराखंड तकनीकी विवि में कनिष्ठ सहायक हैं। उनका झूठ बोलना CAU के साथ ही खुद उनके लिए भी भारी पड़ सकता है।

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