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अजय भट्ट की गद्दी पर पंत-धामी!

युवा चेहरों पर दांव खेलेगी बीजेपी आला कमान!

इसी महीने खत्म हो सकता है मौजूदा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का दौर

Chetan Gurung

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के बाद उनके उत्तराधिकारी कौन होंगे, इस पर तस्वीर एकदम धुंधली है। फिर भी ये कहा जा रहा है कि जातीय समीकरण नहीं देखा जाता है तो युवा पुष्कर सिंह धामी और देखा जाता है तो युवा कैलाश पंत प्रमुख दावेदारों में अभी तक सामने दिखते हैं। हालांकि, अभी कई और नाम सामने आ सकते हैं।

भट्ट नैनीताल से लोकसभा सदस्य हैं। उनको पिछले साल दिसंबर में कार्यकाल खत्म होने के बाद एक साल का सेवा विस्तार आला कमान ने दिया था। अपने बर्ताव और कार्य शैली से भट्ट ने पार्टी के लोगों का दिल तो जीता ही, कार्यकर्ताओं में ख़ासी पैठ भी बनाई। उनको हाई कमान का पसंदीदा माना जाता है। यही वजह है कि उनको सेवा विस्तार मिला। लोकसभा चुनाव जीतने के छह महीने से ज्यादा वक्त गुजरने के बावजूद वह अध्यक्ष बने हुए हैं।

उनका अतिरिक्त कार्यकाल भी इसी महीने खत्म हो रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस महीने कभी भी भट्ट का कार्यकाल समाप्त किया जा सकता है। अभी भले ये पता नहीं चल पा रहा है कि नया प्रदेश अध्यक्ष किसको बनाने पर हाई कमान विचार कर रहा, लेकिन इसी महीने नया प्रदेश अध्यक्ष आ सकता है। पार्टी में जो खुद को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त समझते हैं, वे हाई कमान तक पैठ बनाने की दौड़ धूप में जुट चुके हैं।

पार्टी के पास अध्यक्ष के लिए बहुत अधिक विकल्प नहीं हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल पर अब पार्टी दांव लगाएगी नहीं और किसी मंत्री को ये दायित्व दिया नहीं जाएगा। विधायकों में से बेशक किसी को भट्ट की कुर्सी सौंप दी जाती है तो अचंभा नहीं होगा। गैर विधायकों को भी इस कुर्सी के लिए सोचा जा सकता है। ऐसे में पार्टी के पास अल्मोड़ा के कैलाश पंत बेहतर विकल्प के तौर पर उपलब्ध हैं।

पंत की खासियत ये है कि वह खामोशी संग काम करते रहे हैं। बीजेपी से पहले संघ में गढ़वाल के महामंत्री (संगठन) और विभाग प्रचारक की ज़िम्मेदारी उठा चुके हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत भी गढ़वाल के महामंत्री (संगठन) रह चुके हैं। उनके बाद ये ज़िम्मेदारी पंत ने ही संभाली थी। वह ब्राह्मण भी हैं और पार्टी-संघ दोनों ही जगह पैठ रखते हैं। मुख्यमंत्री के ठाकुर और गढ़वाल से होने के कारण ये संभावना अधिक है कि अध्यक्ष कुमाऊँ से ही चुना जाए।

अगर जाते समीकरण कोई वजह नहीं होगी तो खटीमा के तेज तर्रार राजपूत विधायक धामी को नजर अंदाज करना आसान नहीं होगा। धामी युवा और वरिष्ठता की श्रेणी में आ गए हैं। साथ ही वह युवाओं, उधमसिंह नगर, ठाकुर तबके और पिथौरागढ़ कोटे को पूरा करने की कुव्वत रखते हैं। इन तीनों के अलावा एक विकल्प खुद भट्ट हैं। अंदरखाने की खबर है कि भट्ट एक और सेवा विस्तार चाहते हैं। सांसद बनने के बाद आला कमान पर उनकी पकड़ और बढ़ी है।

झारखंड चुनाव में व्यस्त होने और महाराष्ट्र में जबर्दस्त मुंह की खाने के बाद बीजेपी आला कमान अतिरिक्त रूप से सतर्क हो गया है। उसको अहसास हो गय है कि उत्तराखंड को अब कतई हल्के से नहीं लिया जा सकता है। ऐसे में वह ऐसा कोई मौका देने को राजी नहीं, जो उत्तराखंड में पार्टी की हैसियत और प्रतिष्ठा दोनों प्रभावित करें।

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