संयुक्त आयुक्त पंत पर मुख्यमंत्री ने की आखिर कार्रवाई

बीएस चौहान को लाइसेन्स,शीरा और अल्कोहल का चार्ज

Chetan Gurung

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का जीरो टालरेंस सिद्धान्त आज कुछ पूरा कुछ अधूरा रहा। ऑडियो रिकॉर्डिंग पर महिला इंस्पेक्टर विष्णु को आबकारी मुख्यालय से अटैच कर दिया। संयुक्त आयुक्त टीके पंत से सारे काम छीन कर संयुक्त आयुक्त बीएस चौहान को सौंप दिए। दूसरी तरफ सरकार पर हमले का प्रमुख कारण बने देहरादून के जिला आबकारी अधिकारी मनोज उपाध्याय के खिलाफ दो-दो जांच रिपोर्ट में कार्रवाई की सिफ़ारिश पर अभी तक अमल नहीं हुआ है।

शराब महकमे में शक्तिशाली लॉबी का न सिर्फ दबदबा है, बल्कि त्रिवेन्द्र सरकार के लिए लगातार मुसीबत और आरोपों का सबब भी साबित होता रहा है। देहरादून में दो दिन पहले ही महिला इंस्पेक्टर विष्णु की तैनाती की गई थी। उनका किसी लॉबी से वास्ता नहीं था। पूरे महकमे को अपने ईशारे पर चला रही लॉबी फौरन सक्रिय हो गई। उसने इस महिला इंस्पेक्टर को हटाने के लिए पूरी ताकत लगा ली। अपनी लॉबी के इंस्पेक्टर को लाने के लिए उसको हटाने में शासन के लोगों का भी इस्तेमाल किया। एक ऐसा ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक महिला और एक पुरुष की बातचीत है। इस रिकॉर्डिंग में 50 हजार रुपए दिए जाने का जिक्र है। क्यों और किस लिए, ये साफ नहीं है। न ही ये साफ है कि ये बातचीत आखिर किन दो लोगों के बीच हो रही है? कहा जा रहा है कि इसको वायरल भी इसी लॉबी ने किया।

सूत्रों के अनुसार आबकारी आयुक्त सुशील कुमार इस ऑडियो के परीक्षण के पक्ष में थे। शासन इसके लिए तैयार नहीं हुआ। उसके दबाव में उन्होंने विष्णु को मुख्यालय अटैच कर दिया। ये बात अलग है कि उन्होंने लॉबी विशेष को झटका देते हुए ज्योति वर्मा को उनकी जगह तैनाती दी है, जो उस लॉबी की नहीं है। शासन का ये रुख सही कहा जा सकता है, लेकिन जिला आबकारी अधिकारी उपाध्याय के खिलाफ शासन एक बार फिर पूरी तरह कार्रवाई करने के बजाए बचाव के अंदाज में नजर आ रहा है। उपाध्याय के खिलाफ संयुक्त आयुक्त और अपर आयुक्त की दो-दो जांच रिपोर्ट में बेहद गंभीर आरोप भ्रष्टाचार और अनियमितता के लगाए गए हैं।

राजधानी के पथरिया पीर हादसे में सात लोगों की मौत भी हुई। कई पुलिस और शराब महकमे के लोग निलंबित हुए। उपाध्याय को शासन ने न सिर्फ निलंबन से बचाए रखा, बल्कि कुर्सी तक बरकरार रखा। चार्जशीट देने में भी देरी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक शासन इस फेर में है कि उपाध्याय को अभी भी निलंबित न किया जाए या न हटाया जाए। इसके लिए अनेक रास्ते अपनाए जा सकते हैं। इस बीच मुख्यमंत्री कार्यालय सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत आबकारी महकमे के हालात से बहुत खफा हैं।

उन्होंने उपाध्याय और मुख्यालय में अहम कुर्सी पर बैठे अफसर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आबकारी आयुक्त ने `Newsspace’ से कहा कि उपाध्याय को चार्जशीट देने में दिक्कत नहीं है। कुछ कमी-बेशी थी, उसको दुरुस्त किया जा रहा है। निलंबन का अधिकार शासन के पास है। उसको ही इस पर कार्रवाई करनी है। इस बारे में प्रमुख सचिव (आबकारी) आनंदबर्द्धन का कहना है कि उपाध्याय के निलंबन की कार्रवाई से पहले आरोपों की गंभीरता देखी जाएगी।

इंस्पेक्टर विष्णु को हटाए जाने पर उन्होंने कहा कि ऑडियो के आधार पर ये फैसला किया गया है। ऑडियो का परीक्षण किया जाएगा। इस बीच मुख्यमंत्री के आदेश पर आयुक्त ने मुख्यालय के रसूख वाले संयुक्त आयुक्त टीके पंत से सारे महकमे वापिस ले लिए। उनके पास लाइसेन्स, एल्कोहल, शीरा और आईटी महकमे थे। ये सभी महकमे संयुक्त आयुक्त बीएस चौहान को दे दिए गए हैं। इसके आदेश आज जारी हो गए। पंत लगातार दो सालों से आबकारी नीति के चलते सरकार को अरबों का राजस्व घाटा होने और कई तरफ के विवादित फैसलों के कारण सुर्खियों में थे।

उनके खिलाफ मुख्यमंत्री के सख्त रुख के कारण खास लॉबी को बहुत बड़ा झटका लगना तय है। महकमे के अफसरों-इंस्पेक्टरों और शराब कारोबारियों में उनका जलवा था। चौहान को तटस्थ अफसर माना जाता है। साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय के करीबियों में शुमार होते हैं।

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