शुक्ला-वर्मा लॉबी का दागी पहले भी चयन को ले कर घिरा है  

UP में FIR के बाद 6 को अपेक्स काउंसिल की बैठक

टीम के पूर्व कप्तान उन्मुक्त चंद की छुट्टी या खुद छुट्टी ली

अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला की मीडिया ड्यूटी वापिस ली जाएगी

माहिम वर्मा के CAU बैठक में मौजूद रहने पर मतभेद!

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट एक बार फिर बवंडर में घिरता दिख रहा है। इस बार कई मुद्दे गरम हैं। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की 6 फरवरी को एपेक्स काउंसिल की बैठक में इन सभी पर गर्मागर्म बहस-मंथन के आसार हैं। मुमकिन है कि बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला से मीडिया से बात करने की ज़िम्मेदारी वापिस ली जाएगी। BCCI चले गए माहिम वर्मा के अभी भी एसोसिएशन की बैठक में मौजूद रहने पर भी चर्चा हो सकती है। UP क्रिकेट में एक बार फिर चयन को ले कर घूसख़ोरी में फंसे अकरम सैफी को ले कर भी भरपूर बहस होनी तय है। ये भी मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा सकता है कि आखिर कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी की नाराजगी कैसे दूर के जाए। रणजी ट्रॉफी में टीम के घटिया प्रदर्शन और कप्तानी से हटाए गए उन्मुक्त चंद के अंडर-19 वर्ल्ड कप सेमी फ़ाइनल में कमेंटरी पर भी चर्चा मुमकिन है। एसोसिएशन के सचिव की खाली कुर्सी को भरने का मुद्दा भी अहम रहेगा।

CAU जब से अस्तित्व में आई, लगातार विवादों में है। खुद सुप्रीम कोर्ट की कमेटी, जिसके मुखिया विनोद राय थे, ने अपनी रिपोर्ट में तमाम अंगुलियाँ एसोसिएशन को ले के उठाई थी। इसके चुनाव को पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव शुक्ला के प्रभाव में होने पर ऐतराज जताया था। BCCI में माहिम के प्रवेश को अनुचित करार दिया था। इसके बावजूद न तो चुनाव रद्द हुए न माहिम को BCCI में चुने जाने से रोका गया। ताजा गंभीर विवाद सैफी को ले के भी है। जो भारतीय क्रिकेट में बहुत असर रखने वाले शुक्ला के बेहद विश्वासपात्र हैं। शुक्ला UPCA में एक किस्म से सर्वेसर्वा हैं।

शुक्ला जब भी देहरादून आते हैं, सैफी साए की तरह साथ दिखता है। ये आरोप शुरू से लगते रहे हैं कि सैफी और वर्मा लॉबी पर्दे के पीछे से उत्तराखंड क्रिकेट को अपनी मुट्ठी में किए हुए हैं। उनके ही इशारे पर हर पुरुष-महिला टीम का चयन हो रहा है। चयन में धांधली-घूसख़ोरी के आरोप भी CAU पर लग चुके हैं। उत्तराखंड क्रिकेट की डोर पर नियंत्रण रखने वाले पूर्व CAU सचिव पीसी वर्मा और उनके बेटे माहिम की मौजूदगी में सैफी को देहरादून में एसोसिएशन के समारोह में सम्मानित किया जा चुका है। उत्तराखंड क्रिकेट में जिलों से ले के राज्य स्तर तक अहम ओहदों पर वही काबिज हैं, जो लॉबी विशेष के कृपा पात्र हैं।

जिनका किसी खेल से कभी साबका नहीं रहा या फिर क्रिकेट से दूर तक भी वास्ता नहीं था, वे क्रिकेट खिलाड़ियों की तकदीर का फैसला कर रहे हैं। अध्यक्ष गुनसोला की पृष्ठभूमि सिर्फ राजनीतिक की रही है। वह मसूरी नगर पालिका अध्यक्ष और विधायक रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की लोढ़ा कमेटी की सिफ़ारिशों की अवहेलना करते हुए गुनसोला और माहिम अहम कुर्सियों पर काबिज हुए हैं। माहिम को जब CAU सचिव और BCCI उपाध्यक्ष बनाया गया था, तब उन्होंने सरकार के रजिस्ट्रार कार्यालय को खुद का राजकीय अधिकारी होना विधिवत बताया था।

ये बात अलग है कि वह उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम के ठेके के कर्मचारी थे। उत्तराखंड तकनीकी विवि में तैनात किए गए थे। निगम के प्रबंध निदेशक ब्रिगेडियर पाहवा ने खुद इसकी पुष्टि की है।  अपेक्स काउंसिल की बैठक के बारे में एसोसिएशन के संयुक्त सचिव अवनीश वर्मा ने `Newsspace’ से कहा कि बैठक में अकरम सैफी पर UP में पुलिस मुकदमा होने का मुद्दा जरूर उठेगा। हमने उसको सम्मानित किया है, ये सच है। ऐसे शख्स का नाम उत्तराखंड क्रिकेट से जुड़ना उचित नहीं है। अभी तक अध्यक्ष को ही मीडिया से बातचीत की ज़िम्मेदारी दी गई थी।

वर्मा के मुताबिक ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि अध्यक्ष पत्रकारों के लिए सुलभ नहीं हैं। ऐसे में ये देखा जा सकता है कि उनकी जगह शायद किसी और को मीडिया से बात करने की ज़िम्मेदारी विधिवत दी जाए। इससे एसोसिएशन की गतिविधियों के बारे में सही रिपोर्ट्स मीडिया में आएगी। इसके लिए मीडिया मैनेजर जैसी पोस्टिंग की जा सकती है। इससे अध्यक्ष को भी राहत मिलेगी और पत्रकारों को भी वांछित सूचनाएँ मिल सकेंगी। काउंसिल बैठक में रणजी ट्रॉफी में उत्तराखण्ड की बेहद शर्मनाक प्रदर्शन पर चयनकर्ताओं से जवाबदेही के बारे में भी विचार होगा। उनसे पूछा जा सकता है कि आखिर टीम इतने बदतर नतीजे कैसे दे रही? चयन में क्या गड़बड़ी हुई?

इस पर भी विचार किया जाएगा कि आखिर कोषाध्यक्ष नेगी क्यों नाराज हैं? नेगी न तो बैठकों में आ रहे न ही करोड़ों के बिलों पर दस्तखत कर रहे हैं। अवनीश ने कहा कि बैठक में CAU सचिव की खाली कुर्सी को भरने के लिए चुनाव कराने पर भी विचार होगा। अभी सचिव का काम भी अध्यक्ष ही कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक गुनसोला का सचिव और अध्यक्ष का काम एक साथ करना बाई लॉज के खिलाफ है। सचिव न होने पर ये काम संयुक्त सचिव को सौंपा जाना चाहिए।

इस वक्त आलम ये है कि गुनसोला अध्यक्ष-सचिव और कोषाध्यक्ष की जिम्मेदार अकेले खुद संभाले हुए हैं। इसको ले के अंगुली उठाई जा रही है। उत्तराखंड क्रिकेट का आलम ये है कि रणजी टीम की कप्तानी छोड़ के या फिर हटाए गए, उन्मुक्त चंद टीम के साथ बतौर मेंटर या वरिष्ठ खिलाड़ी मौजूद न रह के, अंडर-19 विश्व कप सेमी और फ़ाइनल में कमेंटरी करने चले गए। इस बारे में न अध्यक्ष और न ही संयुक्त सचिव को ही चंद ने सूचित करना उचित समझा। पूछे जाने पर अवनीश ने कहा कि न तो CAU से उन्मुक्त ने कोई NOC ली है, न ही एसोसिएशन की जानकारी में ऐसा कुछ है। उन्मुक्त अभी उत्तराखंड क्रिकेट से करार के कारण बंधे हुए हैं। ऐसे में वह स्वेच्छा से कुछ कर सकते हैं, इसमें शक है।

CAU की तरफ से ऐसा कहा जा रहा था कि खराब प्रदर्शन के कारण उन्मुक्त को टीम से बाहर किया गया है। ऐसा इसलिए नहीं लगता है कि ऐसा होता तो फिर उन्मुक्त कुछ ही दिनों के भीतर कैसे `Star Sports’ से करार और अभ्यास संग कमेंटरी कर सकते हैं। इसके लिए काफी वक्त की दरकार होती है। समझा जा रहा है कि उन्मुक्त सुनियोजित ढंग से टीम से अलग हुए। `Star Sports’ से करार को पूरा करने के लिए। CAU के लिए सबसे बड़ा सिर दर्द और खतरा सैफी के खिलाफ पुलिस मुकदमा साबित हो सकता है। बैठक में ये मामला भी उठ सकता है। साथ ही माहिम आखिर किस लिए विशेष आमंत्रित सदस्य की हैसियत ले कर CAU की बैठक में आ रहे, उस पर भी विचार होगा।

एक ओहदेदार के मुताबिक ये कुछ ऐसा है मानो PM होने के बावजूद नरेंद्र मोदी गुजरात की कैबिनेट बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर बैठने चले जाएँ। इन मुद्दों के साथ ही अगर सैफी के खिलाफ सख्त जांच हुई तो उसके तार उत्तराखंड से भी जोड़ने के लिए यूपी पुलिस देहरादून धमक सकती है। इस आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। UP पुलिस ये जानने की कोशिश कर सकती है कि आखिर किस हैसियत से सैफी को CAU की तरफ से इतनी तवज्जो दी जाती है। किसने उसका साबका उत्तराखंड क्रिकेट से कराया? उत्तराखंड क्रिकेट में कौन-कौन उसके खास हैं?

UP पुलिस ये देख सकती है कि उत्तराखंड क्रिकेट में भी चयन में कहीं अकरम की भी भूमिका अंदरखाने तो नहीं है? उत्तराखंड क्रिकेट के लिए सैफी घूसख़ोरी प्रकरण दाग ही नहीं बल्कि खतरा भी साबित हो सकता है। ऐसे में उत्तराखंड क्रिकेट के कई कथित आका मुश्किलों में घिर जाए तो अचंभा नहीं होगा। पहले ही CAU मान्यता का मामला सुप्रीम कोर्ट में अगली तारीख के इंतजार में है। नई बेंच का गठन न होने के कारण इसकी सुनवाई अभी लटकी हुई है।

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