Home उत्तराखंड उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेल अगले साल ही होंगे

उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेल अगले साल ही होंगे

0
16

37वां हो चाहे 38वां, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र आयोजन को कटिबद्ध  

IOA की टीम ने दी सचिव संत के प्रेजेंटेशन को क्लीन चिट

500 करोड़ का बजट केंद्र से मांगा

Chetan Gurung

किसी भी देश की प्रगति और विकास को मापना हो तो ओलिंपिक्स या अन्य बड़े-अहम खेल प्रतियोगिताओं में उसके प्रदर्शन को देखा जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर इसको मापना हो तो फिर राष्ट्रीय खेलों में उसके जीते गए पदकों और इसके सफल आयोजन को देखा जाता है। त्रिवेन्द्र सरकार ने इस गुर को समझ लिया है। 2022 विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के बूते वोट जुटाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे। उन्होंने राष्ट्रीय खेलों को सफल बनाने की ज़िम्मेदारी खेल सचिव बृजेश संत के कंधों पर छोड़ दी है। संत की महीनों की मेहनत अब रंग लाती नजर आ रही है। इस बात के पक्के आसार हो गए हैं कि 2021 में उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेल जरूर होंगे। त्रिवेन्द्र भी इसको पहले से ही अलग-अलग मंचों पर कहते रहे हैं।

राष्ट्रीय खेलों का आयोजन भारतीय ओलिम्पिक संघ की छत्रछाया में अलग-अलग राज्य करते हैं। खेलों के शौकीन और इसको बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री ने खेल मंत्री अरविंद पांडे और खेल सचिव संत को ताकीद की है कि उत्तराखंड को आवंटित 38वें राष्ट्रीय खेल हर हाल में अब अगले साल हो जाएँ। इस पर काम लगातार चल रहा है। तिरुअनंतपुरम के बाद अब हाल ही में गोवा भी खेल महकमे की टीम संत की अगुवाई में तैयारियों का जायजा ले के आई है।

सरकार के सामने राष्ट्रीय खेलों के आयोजन में सबसे बड़ी समस्या खेल गाँव का निर्माण करने की थी। इसमें न सिर्फ बहुत वक्त लगना तय होता है बल्कि अरबों रुपए की दरकार भी होती है। केंद्र सरकार से खेलों के आयोजन में वित्तीय मदद मिलती है। इसके बावजूद राज्य सरकार को भी अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। बाकी खेलों के लिए राज्य में बुनियादी सुविधाएं तकरीबन पूरी है। सिर्फ साइकिलिंग के लिए वेलोड्रम नहीं है। इसके चलते पहले राज्य सरकार ने इस स्पर्धा को न कराने का मन बना लिया था। आज राष्ट्रीय खेल तकनीकी और समन्वय समिति (GTCC) की टीम (ओंकार सिंह, राजीव भाटिया, डीके सिंह और इरीन कोशी) देहरादून पहुंची। खेल सचिव और अन्य खेल अधिकारियों के साथ बैठक की। सरकार की तरफ से उनके सम्मुख तैयारियों पर प्रस्तुतीकरण हुआ। समिति इससे संतुष्ट हो गई।

संत ने बाद में पत्रकारों से कहा कि सरकार ने भारतीय ओलिम्पिक संघ को आधिकारिक पत्र भेज के प्रस्ताव रख दिया है कि उत्तराखंड 37वां राष्ट्रीय खेल करने के लिए सक्षम और तैयार है। उसको ये खेल अगले साल कराने की मंजूरी प्रदान करें। राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर सकारात्मक कार्रवाई होने की झलक संघ के संयुक्त सचिव और समन्वय समिति के सदस्य ओंकार ने ये बोल के पत्रकारों को दी कि जरूरत पड़ी तो एक साल में दो राष्ट्रीय खेल भी किए जा सकते हैं। ऐसा भले कभी नहीं हुआ है, लेकिन नया करने में कोई हर्ज नहीं है। भारतीय ओलिम्पिक संघ के महासचिव उत्तराखंड के निवासी राजीव मेहता हैं। उत्तराखंड को खेलों की मेजबानी मिलने के पीछे बड़ी वजह मेहता भी हैं।

इस साल अंत में गोवा में और अगले साल छत्तीसगढ़ में खेल होने हैं। उत्तराखंड की इच्छा है कि अगले साल ही वह भी ये खेल आयोजित कर सके। उत्तराखंड में देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, नैनीताल, टिहरी, पिथौरागढ़ में ये खेल होंगे। खेल सचिव संत के मुताबिक खेलों के दौरान खिलाड़ियों को रुकवाने के लिए खेल गाँव बनाने के लिए प्री फैब कॉटेज का सहारा लिया जाएगा। तिरअनंतपुरम में भी ऐसा ही किया गया था। कुल 34 खेलों को इसमें शामिल किया गया है। मेजबान होने के कारण उत्तराखंड को हर खेल में शरीक होने का सुनहरा अवसर मिलेगा। इससे उत्तराखंड में खेलों का बढ़ावा मिलेगा। खिलाड़ियों का उत्साह-मनोबल बढ़ेगा। सियासी तौर पर त्रिवेन्द्र सरकार को चुनाव में फायदा मिल सकता है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

You cannot copy content of this page