, ,

राज्यपाल ने UTU के कुलपति-रजिस्ट्रार को दी सख्त वॉर्निंग

मिल कर विवि को ऊंचा उठाने की दी नसीहत

VC चौधरी की कार्यशैली पर जताई नाराजगी

शासन के अफसरों के प्रति भी दिखाई तल्खी

Chetan Gurung

राज्यपाल आम तौर पर किसी यूनिवर्सिटी के आंतरिक कामकाज में दखल नहीं देते हैं। वे रूटीन से जुड़ी फाइलों को करते हैं या फिर जरूरी बैठक ही लेते हैं। उत्तराखंड तकनीकी विवि में हाल इस कदर बर्बादी की ओर दिख रहे हैं कि आज राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कुलपति नरेंद्र चौधरी और रजिस्ट्रार अनीता रावत को तलब कर लिया। साथ ही शासन के अफसरों को भी इस मौके पर मौजूद रहने का फरमान सुनाया। बैठक में कुलाधिपति बेबी ने चौधरी-अनीता को मिल कर काम न करने की सूरत में अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहने का अल्टिमेटम दिया।

हाल के सालों में ये विवि अपने अच्छे कामकाज के कारण नहीं विवादों के लिए कुख्यात रहा है। खास तौर पर पिछले डेढ़ साल में विवि लगातार गर्त में गया है। एक भी काम ऐसा नहीं हुआ है, जिसके लिए विवि प्रशासन की पीठ ठोकी जा सके। कोढ़ में खाज की नौबत आई कुलपति और रजिस्ट्रार के बीच बेहद कड़वे रिश्ते होने के कारण। आलम ये बताया जाता है कि दोनों के बीच सामान्य बोलचाल भी नहीं है। वे सिर्फ जरूरी और अनिवार्य बातचीत करते हैं। बैठक भी नहीं होती है।

विवि के अहम पदों पर बैठे अफसरों की विदाई करने के मौजूदा कुलपति के फैसले से भी और नुक्सान पहुंचा। दोनों की तल्खी उस वक्त और बढ़ गई, जब कुलपति चौधरी ने अनीता को भी कार्यमुक्त करने का फैसला किया। शासन से डेपुटेशन बढ़ाने के बाबत कोई जवाब न आने के कारण उनकी तनख्वाह भी रोक दी गई। इससे शासन भी चौधरी से बहुत खफा हो गया। विवि में रजिस्ट्रार सरकार का प्रतिनिधि होता है। ऐसे में उसको भेजना और वापिस बुलाना पूरी तरह सरकार के हाथ में होता है।

सरकार से प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए अफसरों के बारे में फैसला करने का अंतिम हक कुलपति के बजाए शासन के हाथ में ही होता है। प्रतिनियुक्ति मामलों के साथ ही अन्य फैसलों में भी कुलपति के अतिरिक्त दखल से रजिस्ट्रार के साथ उनकी रिश्ते और खराब हुए। इससे विवि रसातल में जा चुका है। विवि के संघटक और अन्य कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की तादाद बहुत कम हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत तक विवि के दोनों शीर्ष अफसरों के बीच द्वंद्व से नाखुश हैं।

विवि के कुलाधिपति राज्यपाल बेबी मौर्य ने विवि की बदहाली को देख चौधरी और अनीता के साथ ही शासन के अफसरों को राजभवन तलब किया। उन्होंने दोनों को न सिर्फ समझाया बल्कि अल्टिमेटम भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर विवि को ले कर दोनों गंभीर नहीं हुए और उसको ऊंचा उठाने की कोशिश नहीं करते हैं तो किसी एक की विवि से छुट्टी करनी पड़ेगी। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल कुलपति से अधिक नाराज और नाखुश दिखे। उन्होंने शासन के अफसरों से भी कुलपति चयन में उचित भूमिका न निभाने के लिए खिंचाई की।

शासन के अफसरों ने राज्यपाल को बताया कि रजिस्ट्रार की प्रतिनियुक्ति का मामला शासन से संबन्धित है। जब तक नए रजिस्ट्रार की व्यवस्था नहीं हो जाती है, तब तक कार्य कर रहे रजिस्ट्रार को यूं ही कार्यमुक्त कर दिया जाना विवि संचालन में और दिक्कत पैदा करेगा। प्रतिनियुक्ति के लिए नए रजिस्ट्रार के चयन में पाँच-छह महीने का वक्त लग जाता है। ऐसे में अनीता को तत्काल कार्यमुक्त किया जाना मुमकिन नहीं है। बैठक में तकनीकी शिक्षा के सचिव अशोक कुमार भी मौजूद थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *