उत्तराखंड में सस्ती शराब से UP के माफिया शॉक में!

दुकानों की रेन्युअल फीस में पाँच गुना इजाफा से खलबली

बंद बॉन्ड के माल का भी हिसाब हो तो खेल सामने आएगा

नहीं उठीं तो दो हिस्सों में तोड़ दी जाएंगी बड़ी दुकानें

पिछले साल की सभी बंद दुकानों को खोलना अनिवार्य

चूना लगाने वाले DEO-बॉन्ड पर कार्रवाई होगी!

बार-होटेल्स सीधे दुकानों से ले सकेंगे माल

CSD कैंटीन में नहीं होगी सस्ती

Chetan Gurung

शराब नीति को ले कर लगातार बदनामी-फजीहत और अरबों का घाटा झेल रही त्रिवेन्द्र सरकार इस बार Action में दिखी। नई शराब नीति में कुछ कदम क्रांतिकारी दिख रहे। देखना ये होगा कि सरकार को करोड़ों का चूना लगाने वाले जिला आबकारी अधिकारियों (DEO) की मुश्कें भी कसी जाती हैं कि नहीं। उत्तराखंड में शराब सस्ती होने से राज्य की सरहद पर कारोबार कर रहे UP के शराब माफिया निश्चित रूप से सदमे में आएंगे। ये बात दीगर है कि आम लोगों को भले शराब सस्ती मिलेगी, लेकिन Excise ड्यूटी जस की तस होने से सेना की CSD कैंटीन्स में दामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सरकार ने तय किया है कि दुकानों का रेन्युअल कराने की मंशा रखने वालों को इसकी फीस पाँच गुना ज्यादा देनी होगी। पहले ये एक फीसदी थी। सरकार के सामने इसको 10 फीसदी करने का प्रस्ताव कैबिनेट में पेश किया गया था। फैसला 5 फीसदी पर हुआ। इतने में ही माफिया में खलबली है। वे इसको बहुत ज्यादा बता रहे हैं। सरकार के एक आला अफसर के मुताबिक रेन्युअल को पिछली पॉलिसी के कारण रोक नहीं सकते। इसलिए फीस बढ़ा कर मुनाफा देने वाली दुकानों से अधिक राजस्व लिया जा रहा है।

पॉलिसी में तय है कि दो साल लगातार दुकानदार अपने पास दुकान रख सकता है। इसके लिए उसको 20 फीसदी अधिक राजस्व देना होगा। इसमें हालांकि खेल होने की आशंका जताई जा रही थी। रेन्युअल खत्म करने पर उनके अदालत जाने की आशंका थी। उत्तराखंड को सबसे ज्यादा झटका UP सरहद से सटी दुकानों के बंद होने से लग रहा था। UP में सस्ती शराब होने के कारण दिवंगत पोंटी चड्ढा की कंपनियों की दुकानें उत्तराखंड सीमा पर UP में खोली गई थीं।

कोटद्वार की 18 करोड़ देने वाली दुकान इस कारण बंद हो गई थी। बंद 131 दुकानों में से 81 दुकानें UP सरहद वाली ही हैं। उत्तराखंड में शराब सस्ती होने से ये दुकानें अब खुल सकेंगीं। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत इस बार UP माफिया को काबू में करना चाह रहे थे। Monthly Minimum Guaranteed Duty में कमी लाए जाने से ये काम हो गया। खास बात ये है कि सरकार ने Excise Duty में कमी नहीं की है। इससे उसका राजस्व बना रहेगा। सेना की कैन्टीनों में जरूर शराब के दाम कम नहीं होंगे।

शराब सस्ती होने से दुकानों पर कोटा बढ़ाने का भार बढ़ गया है। उनको इस संकट से दूर करने के लिए होटेल्स-बार के लिए बॉन्ड के बजाए दुकानों से शराब उठाने का प्रावधान कर दिया गया है। अभी भी वे चोरी-छिपे यही कर रहे थे। सरकार को टैक्स भी नहीं मिल रहा था। बार लाइसेन्स का जिम्मा DM की अध्यक्षता वाली कमेटी को दिए जाने से मुख्यालय-शासन स्तर पर होने वाली घूसखोरी का खेल निस्संदेह कम होगा। प्रक्रिया सस्ती-सरल होने से पहाड़ों में ये आसानी से बढ़ेंगे।

त्रिवेन्द्र सरकार ने एक अहम फैसला बड़े राजस्व वाली दुकानों को ले कर किया है। जो दुकानें महंगी हैं, वे अगर पहले दौर की लॉटरी में नहीं उठती हैं तो उनको दो हिस्सों में बाँट दिया जाएगा। दोनों दुकानों का राजस्व बराबर किया जाएगा। दुकानें अगल-बगल ही खोल दी जाएंगीं। इस फैसले से बड़े शराब माफिया बहुत परेशान बताए जा रहे हैं। बड़ी दुकानों पर उनका एकक्षत्र साम्राज्य रहता है। उनको तोड़ दिया गया तो छोटे कारोबारी भी उसमें घुस आएंगे। उनका एकाधिकार इससे ध्वस्त हो जाएगा।

सरकार ने ये भी सुनिश्चित कर दिया है कि पिछले साल बंद की गई हर दुकान इस बार खोली जाएंगीं। पिछले साल दुकानें बंद होने से सरकार को बहुत ही बड़ा राजस्व नुक्सान सहना पड़ा। जो अरबों में गया। हैरानी इस पर है कि इस मामले में एक भी जिम्मेदार पर सरकार ने दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। सरकार की नजर बंद हुए बॉन्ड के बचे करोड़ों के माल का हिसाब न होने पर भी है। बंद होने के बाद बॉन्ड का बचा माल कहाँ गया, इसकी जांच बिठाई जा सकती है।

सरकार की सारी कसरत DEO-Inspectors पर सख्त कार्रवाई न होने से बेकार हो सकती है। पौड़ी में DEO तपन पांडे और अल्मोड़ा के DEO दुर्गेश्वर त्रिपाठी ने सीधे सरकार को चूना लगा दिया था। पौड़ी, कोटद्वार और श्रीनगर (22 करोड़ वाली, प्रदेश की सबसे बड़ी) की दुकानें पिछले साल बंद हो गईं। 55 करोड़ का राजस्व घाटा पौड़ी से ही हुआ। दुकानें बंद होने से शराब माफिया तंत्र की पौड़ी में मौज हो गई।

हाल के महीनों में जितना भी अवैध माल (शराब) पुलिस-आबकारी दस्ते ने पकड़ा, सब पौड़ी ही जा रहा था। इसके बावजूद Zero टालरेंस सरकार वहाँ के DEO का बाल भी बांका नहीं कर पाई। त्रिपाठी पर नैनीताल में सरकार को करोड़ों का चूना लगाने के पुख्ता आरोप हैं। वह अल्मोड़ा में DEO जमे हैं। अन्य कई जिलों में ऐसे DEO मौज में हैं। जीरो टालरेंस का मज़ाक उड़ा रहे। त्रिवेन्द्र सरकार इस दिशा में कुछ कार्रवाई करेगी या नहीं, इस पर भी सभी की नजरें टिकी हैं।

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