Home उत्तराखंड त्रिवेन्द्र का ऑपरेशन क्लीन:कई सूरमा DEO को सुँघाई जमीन

त्रिवेन्द्र का ऑपरेशन क्लीन:कई सूरमा DEO को सुँघाई जमीन

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शराब महकमे में अब जिलों पर बरसी CM की कयामत  

रंग लाई `Newsspace’ की मुहिम

अल्मोड़ा-नैनीताल का भी Time आएगा!

पॉलिसी में पहले ही ठिकाने लगाए जा चुके हैं माफिया

जोड़-तोड़-दबाव-मोटा माल नहीं आया काम

Chetan Gurung

इन दिनों सरकार का रिपोर्ट कार्ड सुधारने में व्यस्त मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आखिर शराब महकमे में ऑपरेशन क्लीन जारी रखते हुए कई सूरमा किस्म के जिला आबकारी आधिकारियों को माटी की गंध से दो-चार कराया। अल्मोड़ा-नैनीताल के DEO पहली खेप में बच गए, लेकिन उनका वक्त भी आएगा। ऐसा शीर्ष नेतृत्व से जुड़े लोग बता रहे। आबकारी नीति में पहले ही दिग्गज माफिया ठिकाने लगाए जा चुके हैं।

ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि शराब महकमे के साथ किसी भी सरकार या मुख्यमंत्री ने संयोग छोड़ प्रयोग को अंजाम देना पसंद किया है। इस महकमे ने सरकार सिर्फ अरबों का चूना पिछले दो सालों से नहीं लगाया था। जम के भद भी पिटवाई थी। दिल्ली में हाई कमान तक त्रिवेन्द्र की शिकायत गई थी। उनकी तकदीर और प्रतिष्ठा काम आई जो उन पर आंच नहीं आई। Newsspace' ने महकमे के हर खेल और राज को बेधड़क तथ्यों के साथ लगातार दुनिया के सामने पेश किया।`Newsspace’ की कोशिशों का कमाल है कि सरकार आखिर जाग उठी। कार्रवाई शुरू कर दी।

देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, उधमसिंह नगर, अल्मोड़ा और नैनीताल के DEO सरकार और मुख्यमंत्री के लिए सुरसा का मुख बने हुए थे। सरकार जो भी अच्छे काम करे, इन अफसरों की करतूतों के मुख में वे विलीन हो जा रहे थे। त्रिवेन्द्र ने इस बार हकीकत समझ ली। अफसरों की पहचान भी अच्छे से की। कौन उस्ताद है और कौन-कौन उसकी शागिर्दी में निजी लॉकर भर रहे। सरकार का खजाना ठन-ठन कर रहे। सबसे पहले उन्होंने मुख्यालय बैठे कथित सर्वशक्तिमान संयुक्त आयुक्त को बिना किसी काम के बिठा डाला।

इसके बाद शराब नीति को ऐसा रंग दे दिया कि उत्तराखंड के साथ ही UP और HP-Punjab के माफिया भी बेचैन हो उठे हैं। रही-सही कसर खास लॉबी से जुड़े DEO को आज तकरीबन पैदल कर के काफी हद तक पूरी कर दी। देहरादून के बहुचर्चित DEO मनोज उपाध्याय को शासन की दया दृष्टि के चलते मुअत्तल तो नहीं किया, लेकिन उनको नैनीताल मण्डल में AC बना के महत्वहीन कर दिया। उधम सिंह नगर के आलोक शाह को बार-बार अभयदान मिल रहा था। इस बार सरकार ने उनको भी लपेट दिया।

शाह को जिला प्रवर्तन, हरिद्वार के महत्वहीन कुर्सी पर भेज दिया। उन पर भी तमाम आरोप थे। पौड़ी के तपन पांडे और हरिद्वार के अशोक मिश्रा भी आरोपों से सने थे। मिश्र को बागेश्वर और पांडे को चंपावत के बेहद मामूली अहमियत वाले जिलों में भेजा गया। करोड़ों की गड़बड़ियों के मामले में घिरे अल्मोड़ा के DEO दुर्गेश्वर त्रिपाठी और नैनीताल के DEO राजीव पर अभी गाज नहीं गिरी, लेकिन अगली सूची में उनका नंबर आना तय माना जा रहा है।

जिन लोगों को अहम जिलों में DEO बनाया गया है, वे फिर भी बेहतर छवि रखने वाले हैं। रमेश चंद बंगवाल (देहरादून), ओमकार सिंह (हरिद्वार), कैलाशचंद बिंजोला (उधमसिंह नगर) और राजेंद्र लाल (पौड़ी) पूर्ववर्तियों से बेहतर समझे जाते हैं। खास बात ये है कि मुख्यमंत्री, जिनके पास आबकारी मंत्रालय भी है, ने तैनातियों में इस बात का खास ख्याल रखा कि बदनाम लॉबी से वास्ता न रखने वालों को ही अहम जिले सौंपे जाएँ।

मुख्यालय स्तर पर भी कुछ अहम कदम उठाए गए। संयुक्त आयुक्त BS Chauhan को अब पूरी तरह मुख्यालय सौंप दिया गया। उनसे गढ़वाल का प्रभार ले कर साफ-सुथरी छवि वाले उपायुक्त रमेश चौहान को प्रभारी संयुक्त सचिव बना के सौंप दिया गया। संयुक्त आयुक्त TK Pant को फिर कोई काम नहीं दिया गया। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री उनके कार्यकाल में बनी आबकारी नीतियों से हुए अरबों के घाटे से बेहद खफा हैं। कुछ वक्त पहले तक पंत ही शराब महकमे के सर्वेसर्वा हुआ करते थे।

उप आबकारी आयुक्त विवेक सोनकिया प्रोन्नत होने के बावजूद बागेश्वर में DEO बने हुए थे। उनको भी हटना पड़ा। लंबे समय तक खाली रहने के बाद पवन कुमार भी टिहरी के DEO बनने में सफल हो गए। वहाँ की DEO रेखा जुयाल को देहरादून में जिला प्रवर्तन में लाया गया है। शराब महकमे में मुख्यमंत्री के हालिया फैसलों ने ईशारा कर दिया है कि वह सफाई अभियान में किसी की नहीं सुनने वाले हैं। कई शराब माफिया और महकमे के अफसर मलाईदार पोस्टिंग पाने या फिर कुर्सी बचाए रखने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाए हुए थे।

उन्होंने मुख्यमंत्री के खासमखास और BJP के भी कई दिग्गजों की कई परिक्रमाएँ कीं। किसी को भी कामयाबी नहीं मिली। DEO की कुर्सी आधे करोड़ से ज्यादा में बिकती हैं। इस बार ये खेल बहुत हल्का हो गया। ऐसा कहा जा रहा है। त्रिवेन्द्र ने तबादला सीजन से पहले ही भारी संख्या में तबादले कर शराब महकमे की दुर्गंध कम करने की कोशिश की है। इसमें वह वाकई कामयाब रहते हैं या नहीं। ये देखने वाली बात होगी।

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