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क्रिकेट:CaU चुनाव में माहिम की दावेदारी से BCCI में हलचल

राज्य चुनावों से दूर रहते आए हैं बोर्ड ओहदेदार

बिष्ट की नाम वापसी के बाद त्रिकोणीय हुआ सचिव का चुनाव

बेटे को फिर कुर्सी पर बिठाने के लिए जिद पर अड़े पीसी

वंशवाद को बढ़ावा देने पर वर्मा से खफा पूर्व क्रिकेटर

पूर्व मंत्री राजीव शुक्ला पूरे खेल में पर्दे के पीछे!

Chetan Gurung

BCCI के ओहदेदार शायद ही कभी राज्य क्रिकेट संघ के चुनावों में दावेदारी करने उतरे हैं। बोर्ड के उपाध्यक्ष होने के बावजूद क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव के चुनाव में उतर कर माहिम वर्मा ने इस कानाफूसी को पुख्ता कर दिया कि BCCI में वह अनिच्छा के बावजूद जबर्दस्ती भेजे गए थे। वहाँ वह पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला की डमी भर हैं। शुक्ला की बोर्ड में वापसी के आसार हैं। ऐसे में माहिम उनके लिए कुर्सी खाली कर उत्तराखंड क्रिकेट की सियासत में लौटना चाह रहे हैं। शनिवार को सिद्धार्थ बिष्ट समेत तीन ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव के चुनाव से दावेदारी वापिस ले ली। राजीव जिंदल और संजय गुसाईं के बने रहने से चुनाव अब त्रिकोणीय हो गया।

बोर्ड उपाध्यक्ष के पास कोई अधिकार नहीं होता है, लेकिन अगर इस पर बैठने वाले बड़े नाम हो तो इसकी कदर काफी है। माहिम के उपाध्यक्ष बनने के पीछे की कहानी के लेखक राजीव शुक्ला को ही माना जाता है। लोढ़ा कमेटी के कारण वह फिर से उपाध्यक्ष नहीं बन पाए। उम्मीद है कि स्पोर्ट्स बिल ला के सरकार उस प्रावधान को खत्म कर देगी, जिसमें पदाधिकारियों के लिए कार्यावधि तय है। ये बिल पास होने के बाद शुक्ला फिर से उपाध्यक्ष बन जाएंगे। ऐसी उम्मीद है।

सूत्रों के मुताबिक को शुक्ला की वापसी के लिए माहिम से इस्तीफ़ा करवाया जाएगा। ऐसा लग रहा है कि शुक्ला को पद पर बने रहने के प्रावधान में बन्दिशों से राहत मिलने वाली है। माहिम की उत्तराखंड क्रिकेट में फिर वापसी की कोशिश इसका नतीजा है। CaU सचिव की जिस कुर्सी पर लड़ रहे हैं, वह उन्होंने ही खाली की थी। उत्तराखंड के पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट कभी माहिम और उनके पिता PC वर्मा के अगुआ-आका हुआ करते थे। बिष्ट ने जब अपने बेटे सिद्धार्थ को सचिव की कुर्सी पर लड़ाने का फैसला किया तो वर्मा अपने बेटे माहिम के नाम पर एक बार फिर अड़ गए।

शुक्रवार शाम और शनिवार सुबह बिष्ट के आवास पर वर्मा-शुक्ला लॉबी के लोग पहुंचे। बिष्ट से सिद्धार्थ का नाम वापिस ले कर माहिम को एक बार फिर सचिव बनाने की गुजारिश की। खास बात ये है कि न तो पीसी और न ही माहिम इसके बावजूद बैठकों में आए। सूत्रों के मुताबिक वर्मा के एक खासमखास और CaU में संरक्षक ने आखिर कह दिया कि राजीव शुक्ल के दबाव में माहिम को BCCI से CaU लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है।

करीबी लोगों के मुताबिक पीसी अपने लोगों से ये बोल रहे हैं कि माहिम का मन BCCI की ऊंचे दर्जे के माहौल में लग नहीं रहा है। न ही वहाँ कोई अधिकार है और न हि कोई पूछ है। उसके मुकाबले CaU सचिव की अधिक अहमियत है। बिष्ट मान-मनौव्वल के बाद उत्तराखंड क्रिकेट की भलाई के नाम पर बेटे सिद्धार्थ का नाम वापिस कराने को राजी हो गए। इसके बाद सिद्धार्थ के साथ ही कुमार थापा और दीपक मेहरा ने CaU दफ्तर पहुँच के सचिव पद से दावेदारी वापिस ली।

बिष्ट ने `Newsspace’ से कहा-सिद्धार्थ के अच्छे अंतर से जीतने की पूरी संभावना थी। उत्तराखंड में क्रिकेट का माहौल खराब न होने देने की खातिर नाम वापसी का फैसला किया गया’। उन्होंने कहा कि CaU चुनाव में UP का दखल दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही वंशवाद का ठप्पा भी वह खुद पर लगने नहीं देना चाहते थे। इसके बावजूद जिंदल और संजय के चुनाव मैदान से न हटने से लग रहा है कि माहिम को चुनाव में कड़ी चुनौती मिल के रहेगी। जिंदल और संजय कभी वर्मा-शुक्ला लॉबी के साथ थे।

PC-Mahim के रुख और बर्ताव से तमाम जो लोग नाखुश-नाराज हैं, उनमें ये दोनों भी शामिल हैं। वर्मा-शुक्ला लॉबी के साथ दिखने वाले कई वोटर्स और बिष्ट लॉबी भीतर ही भीतर जिंदल या फिर संजय को समर्थन और वोट देगी। ऐसा सूत्र कहते हैं। CaU के सदस्यों के साथ ही कई पूर्व क्रिकेटर्स वर्मा पिता-पुत्र के वंशवाद को बढ़ावा देने से बेहद नाराज हैं। उनको इस बात पर एतराज है कि माहिम पर तमाम गंभीर आरोप हैं। क्रिकेट पृष्ठभूमि भी नहीं है।

उनके मुताबिक माहिम को ही हर अहम कुर्सी देने के पीछे आखिर एसोसिएशन की मजबूरी क्या है? संयुक्त सचिव, सचिव, BCCI उपाध्यक्ष और फिर CaU सचिव की कुर्सी सिर्फ पीसी के बेटे को ही क्यों दी जाए? पीसी की ये लालसा उनकी उत्तराखंड क्रिकेट में एकाधिकार की इच्छा से ज्यादा लालच को जाहिर करती है? जो क्रिकेट के हित में नहीं है। उनके मुताबिक उत्तराखंड क्रिकेट के लिए जिन लोगों ने काम किए, उनमें वर्मा इकलौते नहीं, अनेक लोगों में शामिल हैं। अब पुत्र मोह में वह धृतराष्ट्र हो गए हैं।

उनके मुताबिक ये मिसाल साबित कर रहे हैं कि पीसी वर्मा उत्तराखंड क्रिकेट को अपनी बपौती मान चुके हैं। उत्तराखंड क्रिकेट उनकी जिद और लालसा के कारण चंद महीनों में ही देश भर में बदनाम हो चुकी है। एक पूर्व ओहदेदार और क्रिकेटर के अनुसार रणजी और महिला टीमों में खराब चयन, घूसख़ोरी, मनमानियाँ और धड़ेबाजी ने उत्तराखंड क्रिकेट का सत्यानाश कर दिया है। क्रिकेट का भला तभी होगा जब क्रिकेट पृष्ठभूमि वाले काबिल और नए चेहरे सामने आ के CaU को संभालेंगे।   

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