Home उत्तराखंड क्रिकेट:वर्मा-शुक्ला लॉबी के खिलाफ एक होंगे जिंदल-गुसाईं!

क्रिकेट:वर्मा-शुक्ला लॉबी के खिलाफ एक होंगे जिंदल-गुसाईं!

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परिवार से ही सचिव की जिद से टूटी सर्वसम्मति की कोशिश

खुद की लॉबी के कुमार पर भी नहीं माने PC-माहिम    

आम सहमति न होने पर ही पीछे हटे हीरा बिष्ट

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट में आने वाले कुछ दिन तूफानी साबित होंगे। 8 मार्च को होने वाले सचिव पद के चुनाव से पहले शह-मात के खेल में UP पृष्ठभूमि वाली वर्मा-शुक्ला लॉबी और बिष्ट लॉबी कोई कसर नहीं छोड़ेगी। ये खुलासा हो रहा है कि हीरा सिंह बिष्ट और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के आशीर्वाद वाली संजय गुसाईं-संजय रावत लॉबी माहिम वर्मा के अलावा किसी भी नए नाम पर सर्वसम्मति को राजी थी। वे अपना दावा वापिस लेने को सहर्ष तैयार थे। PC वर्मा के इस जिद से सर्वसम्मति की कोशिश ध्वस्त हो गई कि `सचिव मेरे परिवार से ही होगा’।

बिष्ट के बेटे सिद्धार्थ का नाम कुछ दिन पहले तक दूर-दूर भी नहीं था। PC ने जब बेटे माहिम वर्मा को फिर से क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव के चुनाव में उतारने का फैसला किया तो अन्य लॉबी इसके विरोध में आ गईं। वे हर सीट पर माहिम को ही बिठाने की PC की सोच से पूरी तरह असहमत हैं। उनका कहना है कि उत्तराखंड क्रिकेट में कई लोगों ने अहम भूमिका निभाई है। सिर्फ वर्मा परिवार इकलौता नहीं है।

उनके अनुसार BCCI में उपाध्यक्ष बनाने, BCCI में वोटिंग अधिकार देने और CaU में सचिव बनाने का जब भी मौका आया PC ने अपने बेटे को ही आगे किया। अब फिर सचिव बनाने की जिद पकड़े हैं। ये तो UCA के सचिव दिव्य नौटियाल थे, जो सुप्रीम कोर्ट गए और अन्य राज्यों के साथ उत्तराखंड को भी मान्यता BCCI से मिल गई। नौटियाल को भी उत्तराखंड क्रिकेट से जोड़ने के बजाए उनको दूध से मक्खी की तरह निकाल बाहर कर दिया।

बिष्ट की अगुवाई में ही चार दशक तक वर्मा ने काम किया। इसके बावजूद वर्मा तब ऐंठ गए जब सिद्धार्थ को CaU सचिव बनाने का प्रस्ताव सामने आया। बैठक में मौजूद एक अहम CaU ओहदेदार के मुताबिक बिष्ट और वर्मा लॉबी के साथ ही गुसाईं-जिंदल भी एक साथ बैठे। ये प्रस्ताव पेश किया गया कि चुनाव की नौबत न लाई जाए। बेहतर होगा कि एक नाम पर आम राय बनाई जाए। माहिम के नाम को छोड़ के। गुसाईं-जिंदल भी अपनी दावेदारी वापिस लेने को तैयार हो गए। वे सिद्धार्थ को सचिव बनवाने के हक में बोल रहे थे।

सिद्धार्थ के नाम पर सहमति न होने की सूरत में उस कुमार थापा को ही सचिव बनाने की भी पेशकश की, जो वर्मा लॉबी से ही हैं। वर्मा इस पर भी नहीं माने। उन्होंने साफ कह दिया कि सचिव उनके परिवार से ही बनेगा। उनकी इस सोच से CaU और उत्तराखंड क्रिकेट से जुड़े लोग हैरान रह गए। एक CaU पदाधिकारी ने `Newsspace’ से कहा-`ये कुछ ऐसा ही है मानो राहुल गांधी बोले कि देश के लिए मेरे परिवार ने कुर्बानियाँ दी हैं। इसलिए प्रधानमंत्री मेरे खानदान से ही बनेगा’।

उनके मुताबिक वर्मा लॉबी को उत्तराखंड क्रिकेट की वाकई फिक्र होती तो वह चुनाव की नौबत न आने देते। किसी सही नाम पर सहमति दे देते। बेटे के लिए अड़े रहने से उनकी पद लोलुपता और वंशवाद साफ हो गई है। उनकी बातें सुन के साफ हो गया कि वह सचिव या अध्यक्ष पद को अपने घर की बपौती मान बैठे हैं। सूत्रों के मुताबिक BCCI में माहिम के चयन को ले कर अब असहमति के सुर हैं। लिहाजा उनके आका राजीव शुक्ला ने उनको उत्तराखंड लौट जाने के लिए बोल दिया।

CaU के एक अहम ओहदेदार ने कहा कि माहिम और गुसाईं में तब बहस हो गई, जब माहिम ने कहा कि उनके पास 28 वोट हैं। वह क्यों चुनाव लड़ रहे हैं। गुसाईं को इसमें दर्प दिखा। उन्होंने जवाब दिया कि उनके पास जितने वोट भी हों, वह लड़ेंगे जरूर। बेटे का नाम वापिस होने से बिष्ट PC-माहिम से नाराज हैं। उनको ये लग रहा है कि जिन पिता-पुत्र को उन्होंने आगे बढ़ाया, वे ही विरोधी हो गए।

आहत बिष्ट अब जिंदल-गुसाईं में से जिसके नाम पर भी सहमति बनेगी, उसको माहिम के खिलाफ चुनाव में मदद करेंगे। उम्मीद ये ही है कि जिंदल और माहिम में से एक ही बतौर प्रत्याशी माहिम के सामने होंगे। ये चुनाव पूरी दमदारी से लड़ा जाएगा। खूब संघर्ष दिखेगा। नैनीताल और उधम सिंह नगर का वोट चुनाव अधिकार सुवर्द्धन ने रद्द कर दिया है। इससे वर्मा लॉबी को ही नुक्सान हुआ है। ये भी सरगोशियाँ है कि चुनाव में ऊंट किस करवट लेगा, कह नहीं सकते हैं।

माना जा रहा है कि जिलों और CaU के वोटर्स, ऐन वक्त पर ही फैसला करेंगे। भले उन पर ठप्पा किसी भी लॉबी को हो। वे क्रिकेट हित और प्रत्याशी के योगदान को ध्यान में रखेंगे। गुसाईं लंबे समय से क्रिकेट एकेडमी के जरिये क्रिकेट को प्रोत्साहन दे रहे। चार्टेर्ड अकाउंटेंट राजीव जिंदल मुफ्त में अपनी सेवाएँ डेढ़ दशक से एसोसिएशन को देते रहे हैं।  

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