वंशवाद-कुर्सी पर कब्जे की साजिश की जबर्दस्त मिसाल  

Life Member रामप्रसाद,RM जिंदल,SS दुग्गल, हरबंस कपूर वोटर लिस्ट से बाहर कैसे?

चुनाव पूर्व General House न बुलाने पर एतराज

CaU अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला की निष्क्रिय भूमिका से नाराजगी

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट पर कब्जे की जंग में लालच, पद लोलुपता, साजिश और वंशवाद का तगड़ा तड़का दिख रहा है। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव के चुनाव में सिर्फ 41 लोग एसोसिएशन से वोटर हैं। इनमें प्रत्याशी माहिम वर्मा के घर से ही चार वोट हैं। चुनाव से पहले एसोसिएशन की General House बैठक न बुलाने और Founder तथा Life Members के नाम वोटर लिस्ट से उड़ाए दिए जाने को भी सोची समझी साजिश माना जा रहा है। चुनाव के गर्म माहौल से CaU अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला की गुमशुदगी से भी क्रिकेट हितैषियों में बहुत नाराजगी का आलम है।

वोटर लिस्ट को देखा जाए तो साफ हो जाता है कि एसोसिएशन में ताउम्र कब्जे की साजिश पहले ही बन गई थी। इसके चलते सबसे पहले तो उन लोगों के नामों को बाहर कर दिया गया, जिनको ले कर शक था कि वे उनके कहने-सुनने में नहीं आएंगे। ये वे लोग हैं जिन्होंने देहरादून की क्रिकेट को तब उठाया और संवारा जब दो पैसे खर्च करने या दो मिनट का वक्त देने को लोग जल्दी राजी नहीं हुआ करते थे। जब देहरादून क्रिकेट संघ DDSA (DehraDun District spors Association) से अलग हुआ तो इन लोगों ने क्रिकेट को संबल प्रदान किया था।

इनमें RM Jindal, RamPrasad, SS Duggal और BJP विधायक हरबंस कपूर भी शामिल हैं। ये CaU के आजीवन सदस्य हैं। इसके बावजूद इन तीनों के अलावा भी कई नाम हैं, जो आजीवन सदस्य थे। वोटर लिस्ट से उनके नाम साफ कर दिए गए हैं। कपूर के अलावा अन्य देहरादून क्रिकेट के सचिव भी रहे हैं। वोटर लिस्ट या आजीवन सदस्य बनाने में भी परचून की दुकान वाला अंदाज अपनाया गया। BCCI उपाध्यक्ष और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रहे राजीव शुक्ला तथा उनके भाई सुधीर शुक्ला को भी CaU का आजीवन सदस्य बना दिया गया था। उन दस्तावेजों पर दस्तखत माहिम वर्मा के हैं, जो तब खुद के सदस्य तक नहीं थे।

माहिम और उनके पिता PC Verma का फर्जीवाड़ा इससे साफ होता है कि माहिम साल 2008 में जा के संयुक्त सचिव बनाए गए। गज़ब तो ये है कि अगले साल (2009) में वह खुद जा के CaU के सचिव बने। बिना सदस्य बने संयुक्त सचिव और दस्तावेजों पर दस्तखत सिर्फ फर्जीवाड़ा कहा जा सकता है। रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज़ ऑफिस में भी कई फर्जी जानकारियाँ माहिम की तरफ से दी गईं। अब जब ये माना जा रहा है कि BCCI से माहिम की छुट्टी तय हो चुकी है, तो वह फिर उत्तराखंड क्रिकेट की सियासत में कूद पड़े हैं।

CaU सचिव चुनाव को ले कर दो आपत्ति तेजी से उठ रही। एक तो चुनाव में एसोसिएशन के जो 41 लोग वोट देंगे, उनमें से चार लोग माहिम के घर से हैं। माहिम के अलावा अन्य नाम ये हैं-PC Verma (माहिम के पिता), Vivek Verma (भाई), Sharad Chand Verma (भाई)। शरद के अलावा बाकी तीनों के घर के पते भी एक ही हैं (विवेक विहार, सहस्त्रधारा रोड)। शरद रिंग रोड (लाडपुर) में रहते हैं। एक तरफ तो Life Members और Founder Members के नाम वोटर लिस्ट से गायब हैं, दूसरी तरफ एक ही परिवार से चार वोट खुद ही कहानी बयां कर रहे हैं।

चुनाव से पहले एसोसिएशन की General House बैठक बुलानी भी जरूरी होती है। इसमें कई तरह की आपत्तियाँ-सुझाव आते हैं। ऐसा न कर के सीधे चुनाव कराए जा रहे हैं। वोटर लिस्ट में भी कोई संशोधन नहीं किया गया है। इस मामले में CaU अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला भी ज़्यादातर लोगों के निशाने पर हैं। उनके मुताबिक अध्यक्ष के नाते उनका फर्ज था कि तीनों दावेदारों (माहिम, संजय गुसाईं और राजीव जिंदल) के साथ ही सभी गुटों को एक साथ बिठा के सर्वसम्मति से सचिव का नाम तय कराते।

BCCI मान्यता मिलने के छह महीने के भीतर CaU में विध्वंस के हालात और तमाम आरोप घोटालों-भ्रष्टाचार-चयन को ले कर लगे हैं। इससे उत्तराखंड का नाम देश भर में खराब हुआ है। इस बीच ये भी पहलू सामने आ रहे हैं कि जिंदल-गुसाईं में आपसी सहमति बन जाएगी कि एक ही नाम चुनाव में उतरे। साथ ही गुपचुप हो रही बैठकों में वे लोग भी इनके साथ आ रहे हैं, जिनको वर्मा-राजीव शुक्ला लॉबी का खास समझा जाता है।

सूत्रों के मुताबिक वे उत्तराखंड क्रिकेट में वंशवाद और हर अहम कुर्सी पर सिर्फ माहिम वर्मा को ही बिठाने की PC वर्मा की जिद से भी नाखुश-असहमत हैं। साथ ही BCCI उपाध्यक्ष होने के बावजूद राज्य सचिव बनने की जिद से भी वे नाराज हैं। चुनाव 8 मार्च को है। तब तक समीकरण काफी हद तक बदल जाने की गुंजाइश पूरी दिख रही है। एक अहम तथ्य ये भी है कि उत्तराखंड को BCCI मान्यता दिलाने और प्रोत्साहन देने वाले मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, खेल मंत्री अरविंद पांडे और पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट को आज पूरी तरह वर्मा-शुक्ला लॉबी ने किनारे कर दिया है।

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