क्रिकेट:उत्तराखंड पर सुप्रीम सुनवाई फिर टली

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BCCI से जुड़े मामलों पर भी होना है फैसला

बेंच न बन पाने से अब फिर इंतजार करना होगा

BCCI भी प्रभावित होगा फैसले से

Chetan Gurung

उत्तराखंड में क्रिकेट पर किसकी बादशाहत होगी, इस पर ले के आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई एक बार फिर टल गई। इसके साथ ही BCCI के अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह के कार्यकाल बढ़ाने के बारे में भी सुनवाई शुरू नहीं हो पाई। सुनवाई के लिए बेंच का गठन न होना इसके टलने की वजह बताई जा रही है।

देश के कई अन्य राज्यों के क्रिकेट से जुड़े मामलों पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज की तारीख दी थी। उत्तरांचल क्रिकेट संघ के साथ ही उत्तराखंड क्रिकेट संघ ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपने तथ्यों को मजबूती से पेश करने के लिए भरपूर तैयारी की हुई है। दोनों क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को BCCI मान्यता दिए जाने का विरोध कर रहे हैं।

दोनों UCA के ओहदेदारों का कहना है की CaU को एक तो गलत तरीके से मान्यता दी गई है, दूसरा उस पर तमाम किस्म के घोटालों और भ्रष्टाचार के साथ ही संचालन न कर पाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। खिलाड़ियों के चयन में भी घूसख़ोरी के आरोप लगे। रणजी ट्रॉफी में टीम ने बहुत ही शर्मनाक खेल दिखाया। CaU की तुलना उनहोंने probation period वाले कर्मचारी से करते हुए कहा कि उसको अब आगे उत्तराखंड का क्रिकेट तबाह करने के लिए इजाजत नहीं दी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उत्तराखंड ही नहीं बल्कि BCCI पर भी प्रभाव पड़ना तय है। CaU के सचिव के चुनाव में माहिम वर्मा ने भी उतर के न सिर्फ चौंका दिया है, बल्कि उन पर हितों के टकराव के आरोप भी लग रहे हैं। वह BCCI मे उपाध्यक्ष हैं। बाई लॉज के मुताबिक वह राज्य संघ में चुनाव लड़ ही नहीं सकते हैं। ऐसा करते हैं

चुनाव अधिकारी सुबर्द्धन के मुताबिक ये देखना उनका काम नहीं है। उनको सिर्फ चुनाव कराने का जिम्मा मिला है। हितों का टकराव देखने का फर्ज आचरण अधिकारी (Ethics Officer) का है, जो सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या फिर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ही हो सकते हैं। CaU के कर्ता-धर्ताओं ने न सिर्फ आचरण अधिकारी बल्कि लोकपाल (Ombudsman) और दो दर्जन से अधिक समितियों तथा Players Association का गठन भी नहीं किया है।

इससे CaU पर अभी से तमाम आरोप लग रहे हैं और उन पर कोई सुनवाई तक नहीं हो पा रही है। वर्मा-शुक्ला लॉबी को इस हाल के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। सचिव पद पर संजय गुसाईं और राजीव जिंदल भी माहिम के खिलाफ मोर्चे पर हैं। दोनों में हाथ मिलाई होने के पक्के आसार हैं। मतदान 8 मार्च को है।

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