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उत्तराखंड क्रिकेट:Ethics Officer भी UP से लाने की कोशिश!

एपेक्स काउंसिल में कोषाध्यक्ष पृथ्वी के कड़े ऐतराज ने रोका फैसला

सचिव के चुनाव में माहिम वर्मा घिरे हैं हितों के टकराव में

वोटर लिस्ट को ले कर भी है तमाम आरोप

प्रत्याशी राजीव जिंदल अस्पताल भर्ती,संजय गुसाईं को समर्थन

Chetan Gurung

UP-शुक्ला-लॉबी उत्तराखंड क्रिकेट में विवादों के सुल्टाव के लिए आचरण अधिकारी (Ethics Officer) भी उत्तराखंड के बाहर से लाना चाहते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला के ईशारे पर किसी जस्टिस के नाम की सिफ़ारिश क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की एपेक्स काउंसिल की बैठक में दो बार की जा चुकी है। कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी के कड़े एतराज के कारण इस फैसले पर अमल नहीं हो पाया है। CaU सचिव के चुनाव में BCCI उपाध्यक्ष माहिम वर्मा के प्रत्याशी बनने और BCCI बाई लॉज के उल्लंघन के बाद हितों के टकराव संबंधी विवाद वोटर लिस्ट को ले कर सवाल सामने आ रहे हैं।

दोनों मामले आचरण अधिकारी और लोकपाल (Ombudsman) से जुड़े हैं। दोनों में पूर्व जस्टिस या फिर चीफ जस्टिस ही हो सकते हैं। उत्तराखंड में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस PC Pant, BK Kandpal, VK Bisht उपलब्ध हैं। इसके बावजूद न तो आचरण अधिकारी और न ही लोकपाल की नियुक्ति CaU में की गई है। सूत्रों के अनुसार वर्मा-शुक्ला-यूपी लॉबी इस कुर्सी पर अपने किसी खास पूर्व जस्टिस को बिठाना चाहते हैं। कभी कोई विवाद की सूरत उत्पन्न होने पर अपने हक में फैसले के लिए वह ऐसा चाह रहे हैं।

एक खास पूर्व जस्टिस का नाम पिछली दो एपेक्स काउंसिल बैठक में आचरण अधिकारी के लिए लिया गया। ये भी कहा गया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री शुक्ला ने इस नाम की संस्तुति की है। कोषाध्यक्ष नेगी ने इस पर ये कहते हुए आपत्ति जताई कि उत्तराखंड में पूर्व जस्टिस उपलब्ध हैं। ऐसे में बाहर के किसी शख्स की सिफ़ारिश पर अंजान को आचरण अधिकारी बनाने की क्या मजबूरी है। इसके बाद ये मामला लटका हुआ है। लोकपाल के लिए भी CaU ने अभी तक कुछ नहीं किया है।

इसका नुक्सान अब सचिव के चुनाव में दिखाई दे रहा है। माहिम के बोर्ड में रहने के बावजूद राज्य में चुनाव लड़ना सीधे-सीधे हितों का टकराव है। इसके बावजूद इस पर कार्रवाई रुकी हुई है। चुनाव अधिकारी सुबर्द्धन ने इस मामले को अपनी हद से बाहर बताया है। साथ ही वोटर लिस्ट को ले कर भी अंगुलियाँ उठाई जा रही हैं। इस बात को ले कर हैरानी और आपत्ति जताई जा रही है कि जूनियर और अनुभवहीन माहिम कैसे संयुक्त सचिव, सचिव, बोर्ड उपाध्यक्ष और पिछले साल BCCI की तरफ से उत्तराखंड के लिए गठित कोंसेंसेस कमेटी के समन्वयक भी बन गए?

आखिर किस आधार पर संस्थापक सदस्य और आजीवन सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से भी बाहर कर दिए गए। 150 के करीब सदस्यों वाली CaU से सिर्फ 41 लोग कैसे मतदाता रह गए हैं? कैसे और किसने वोटर लिस्ट तैयार की? आचरण अधिकारी न होने के कारण इन सब पर कोई कार्रवाई और सुनवाई नहीं हो पा रही है? ये कोशिश भी सामने आई है कि दोनों मामलों में हाई कोर्ट जाने के लिए लोग तैयार हैं। वे चुनाव नतीजे का इंतजार कर रहे हैं।

इस बीच सचिव के चुनाव को ले कर रोचक संघर्ष का प्लेटफार्म तैयार हो चुका है। CaU और खुद को उत्तराखंड हितैषी बताने वाली लॉबी के एक ओहदेदार ने `Newsspace’ से कहा-`जिंदल और संजय गुसाईं एक ही हैं। मतदान सिर्फ एक नाम के लिए होगा। जिंदल अस्वस्थ होने के कारण सिनर्जी अस्पताल में भर्ती हैं। हमारी लड़ाई उत्तराखंड क्रिकेट को ऊपर उठाना, UP-शुक्ला लॉबी का दखल खत्म करना, वर्मा वंशवाद का क्रिकेट में खात्मा करने से जुड़ी है’। 8 मार्च को होने वाले चुनाव से पहले इन दिनों जम पर प्रचार दोनों धड़ों की ओर से चल रहा है। उसी दिन नतीजे भी घोषित हो जाएंगे।

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