माहिम के खिलाफ राजीव जिंदल ने दिया संजय गुसाईं को समर्थन

हीरा बिष्ट और दिग्गजों की नाराजगी वर्मा लॉबी को पड़ सकती भारी

अध्यक्ष गुनसोला:जिसकी चुन्नी उसकी मुन्नी

दांव पर लगी है CM त्रिवेन्द्र-BCCI की भी इज्जत

Chetan Gurung

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव के इतवार को होने वाले चुनाव में जबर्दस्त मोड़ आ गया है। तीन में से एक प्रत्याशी राजीव जिंदल ने माहिम वर्मा और UP लॉबी के खिलाफ जंग में संजय गुसाईं को समर्थन दे दिया है। जिंदल ने समर्थन पत्र भी जारी किया है। बीमारी के कारण स्वास्थ्य लाभ कर रहे राजीव के बैठ जाने से चुनाव आमने-सामने का हो गया है। चुनाव अब पहाड़ बनाम UP-वंशवाद और भ्रष्टाचार हो गया है। चुनाव में BCCI की इज्जत और साख के साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की भी प्रतिष्ठा दांव पर हैं। गुसाईं उसी United Cricket Association of Uttarakhand से CaU में हैं, उसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री थे। माहिम बिना BCCI उपाध्यक्ष की कुर्सी से इस्तीफा दिए ही चुनाव में उतरे हैं।

गुसाईं के साथ CaU के पूर अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट, जिनके बूते कभी माहिम वर्मा के पिता PC वर्मा काफी आगे बढ़े, हैं। जिंदल बिष्ट के ही खासमखास हैं। उनके ईशारे पर ही राजीव ने चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया था। बिष्ट के बेटे सिद्धार्थ ने भी नामांकन भरा था। बिष्ट ने सर्वसम्मति बनाने की कोशिश करते हुए बेटे का नाम वापिस करवा दिया था। वह चाहते थे कि वर्मा भी अपने बेटे का नाम वापिस कराए। किसी तीसरे के नाम पर सहमति बनाएँ। बिष्ट ने तो सिद्धार्थ का नाम वापिस करवा दिया, लेकिन PC-माहिम ने मना कर दिया। अब राजीव ने भी बिष्ट के ईशारे पर ही गुसाईं के समर्थन में बैठ जाने का विधिवत ऐलान कर दिया। उनकी चिट्ठी `Newsspace’ के पास है।

सूत्रों के मुताबिक इस सुलह बैठक में PC ने साफ कह दिया कि CaU को BCCI मान्यता मिली तो फिर उनके परिवार को क्या फायदा हुआ, अगर बेटा सचिव नहीं बना। उन्होंने साफ कहा कि सचिव उनके परिवार से ही होगा। इसके बाद सुलहनामे की कोशिश खत्म हो गई। गुसाईं को एसोसिएशन से जो पुराने दिग्गज समर्थन दे रहे हैं, वे खुद को वर्मा की वंशवादी सोच के खिलाफ हैं। उनका तर्क है-बिना सदस्य बने एसोसिएशन में संयुक्त सचिव, फिर कॉन्सेंसस कमेटी का समन्वयक, फिर सचिव, फिर BCCI उपाध्यक्ष और अब फिर से सचिव का ओहदा। क्या एसोसिएशन का मतलब वर्मा लॉबी हो गया है? जिसको UP के दागी लोग समर्थन दे रहे हैं।

उनका कहना है कि उत्तराखंड में कई लोग हैं, जो युवा और काबिल हैं। क्रिकेट के लिए जी जान से काम कर रहे हैं। उनको आगे आने का मौका कब मिलेगा? वर्मा-UP लॉबी उत्तराखंड क्रिकेट को अपनी बपौती मान बैठे हैं। इसका ही नतीजा है कि रणजी ट्रॉफी में उत्तराखंड की दुर्दशा और बे-इज्जती के साथ विदाई हुई। नियुक्तियों के साथ ही टीमों के चयन को ले कर तमाम आरोप लग रहे हैं। BCCI से बिलों का भुगतान रुक रहा है। कोषाध्यक्ष से दस्तखत हुए बिना बिल भेजे जाएंगे तो और क्या होगा। उनका आरोप है कि अध्यक्ष गुनसोला भी वर्मा-UP लॉबी के ईशारे पर चल रहे हैं।

गुनसोला को ले कर आरोप है कि उन्होंने लॉबी विशेष के दबाव में बिलों पर भी खुद ही दस्तखत किए और सचिव का जिम्मा भी खुद ही रखा। समझा जा रहा था कि अनुभवी और वरिष्ठ होने के नाते वह सभी धड़ों को समझा के रखेंगे। चुनाव में सर्वसम्मति बनाने की कोशिश करेंगे। वह गायब से हो गए हैं। बिष्ट उनके सियासी और क्रिकेट गुरु थे, लेकिन वह उनसे नाखुश हैं। चुनाव को ले कर अब गुसाईं तथा वर्मा लॉबी जम के दौड़-धूप कर रही है। गुसाईं को एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी का भी समर्थन हासिल है।

नेगी और गुसाईं ने `Newsspace’ से कहा-`राजीव भाई से बात हो गई है। वह हमको समर्थन दे रहे हैं। अस्वस्थ होने के कारण वह प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर पाए। कुछ मीडिया कर्मियों को उन्होंने कल अधिकृत बयान भी दिए। ये बात अलग है कि वे अखबारों में आज सामने नहीं आ पाए’। चुनाव अधिकारी सुबर्द्धन ने भी `Newsspace’ से कहा-`चुनाव की तैयारियां पूरी हो गई हैं। बैलेट पेपर छप चुके हैं। सुबह 11 बजे मतदान शुरू होगा। उसके तुरंत बाद मतगणना शुरू हो जाएगी। आधे घंटे में नतीजा सामने आ जाएगा। कुल 52 वोट डाले जाएंगे’।

उन्होंने कहा कि नैनीताल के दीपक मेहरा के दो वोट हैं, लेकिन वह एक ही डाल सकेंगे। कोई अप्रिय स्थिति न हो या फिर तनाव को देखते हुए पुलिस भी तैनात की जाएगी। चुनाव में पहाड़ से जुड़ी बड़ी लॉबी का समर्थन गुसाईं को मिलने और वर्मा को UP-राजीव शुक्ला लॉबी का समर्थन मिलने से चुनाव संघर्षपूर्ण और दिलचस्प हो गया है। माहिम के BCCI का ओहदेदार होने के कारण बोर्ड की इज्जत और साख भी दांव पर है।

बोर्ड के उपाध्यक्ष का राज्य के सचिव का चुनाव लड़ने को ले कर दो तरह की बातें वायुमंडल में तैर रहीं। एक-BCCI उपाध्यक्ष का पद राज्य के सचिव से कम तरजीह रखता है। दो-माहिम को बोर्ड से छुट्टी करने का सैद्धान्तिक फैसला हो गया है। इसलिए वह फिर से राज्य क्रिकेट की सियासत में उतर आए। माहिम का चुनाव लड़ना ही बोर्ड की साख को धक्का है। नतीजे अपेक्षित नहीं आए तो बोर्ड की प्रतिष्ठा को बहुत नुक्सान पहुंचेगा। सूत्रों के मुताबिक माहिम के पिता ने करीबी लोगों को बोला है कि शुक्ला ने ही माहिम को चुनाव लड़ने के लिए कहा है।

UCAUK के अध्यक्ष मुख्यमंत्री रावत ने सिर्फ क्रिकेट के हित में अपनी एसोसिएशन का समर्थन CaU को दिया है। उनके भतीजे संजय रावत भी CaU में उपाध्यक्ष हैं। वह भी उनकी ही एसोसिएशन से CaU में आए हैं। अभी तक त्रिवेन्द्र विधानसभा के बजट सत्र में व्यस्त थे। कल वह गैरसैण से देहरादून लौट आए हैं। उनकी एसोसिएशन और भतीजे से जुड़े गुसाईं का चुनाव में उतरना उनके लिए भी अहम है। वह शायद ही चाहेंगे कि CaU में उनकी एसोसिएशन से जुड़े प्रत्याशी के हाथ मायूसी लगे।

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