CM त्रिवेन्द्र ने की आला नौकरशाहों संग आपात बैठक

दिल्ली में फंसे उत्तराखंडियों को एयर लिफ्ट कराएगी त्रिवेन्द्र सरकार!

Chetan Gurung

पूरी धरती को काँपने के लिए मजबूर कर देने वाले Corona Virus (Covid-19) को शिकस्त देने के लिए त्रिवेन्द्र सरकार उत्तराखंड की सरहद को चारों तरफ से सीज करेगी। न कोई आ सकेगा, न जा सकेगा। मुख्यमंत्री से दिल्ली में फंसे उत्तराखंडियों ने भी खुद को निकाल के लाने की गुहार की है।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को Corona से जंग के बाबत तैयारियों और आगे की कदमों को ले कर आला नौकरशाहों से मंथन किया। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, DGP अनिल रतुड़ी, वित्त सचिव अमित नेगी और गृह सचिव नितेश झा इस अहम बैठक में थे। उन्होंने इस बैठक के बाद राज्य को Lock Down किए जाने पर कहा कि लोग इसकी अहमियत और Corona के प्रकोप को समझ नहीं पा रहे हैं।

उन्होंने कहा-`अब हम सख्त कदम उठाने वाले हैं। पूरे उत्तराखंड को सीज करने पर विचार कर रहे हैं। न कोई राज्य की सरहद में घुस सकेगा न ही यहाँ से कोई बाहर जा सकेगा’। वह कल जनता कर्फ़्यू के दौरान शाम 5 बजे के बाद लोगों के जुलूस की सूरत में सड़कों पर हो-हल्ला करते हुए निकल आने से नाखुश दिखाई दिए। मुख्य सचिव उत्पल ने `Newsspace’ से पहाड़ों को भी Lock Down’ करने की वजह बताई।

उन्होंने कहा, `पहाड़ों में भले Corona संदिग्ध पाया नहीं गया है, लेकिन सरकार कोई खतरा मोल लेने को राजी नहीं है। वहाँ भी कुछ लोग Observation में हैं’। इस बीच दिल्ली के भी Lock Down होने से कई उत्तराखंडी बस स्टॉप-रेलवे स्टेशन में फंस कर संकट का सामना कर रहे हैं। एक ऐसे ही युवक नरेश कुमार ने `Newsspace’ को व्हाट्स एप कर के अपनी संकट गाथा बयान की है।

इस नौजवान के मुताबिक कई उत्तरखंडी जो होटलों और कंपनियों में नौकरी करते थे, Corona संकट के कारण छुट्टी हो जाने से घर लौट रहे थे। अचानक दिल्ली के Lock Down हो जाने से वे दिल्ली में बस अड्डे में ही फंस गए हैं। नरेश ने कहा, `उनके पास पैसे भी नहीं हैं। कंपनी ने तनख्वाह दिए बिना घर भेज दिया है। बस अड्डे पर दिल्ली पुलिस रुकने नहीं दे रही। उनको भगा रही है। वे कहाँ जाएँ’?

ऐसे तमाम उत्तराखंडी वहाँ फंसे हुए हैं। त्रिवेन्द्र सरकार के लिए ये बहुत बड़ी चुनौती के साथ ही उपलब्धि होगी, अगर वह फंसे हुए सभी उत्तराखंडियों को किसी भी तरह, चाहे एयर लिफ्ट कर के ही सही, अपनी सरहद में ला के या तो घर तक छुड़वा दें। या फिर राज्य के भीतर कहीं सुरक्षित पनाहगाह संकट के नियंत्रण तक उपलब्ध कराए।  

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