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`CORONA’ को देनी है शिकस्त! डॉक्टर्स-नर्सिंग स्टाफ को चाहिए PPE किट

SRHU चांसलर विजय धस्माना:Corona के खिलाफ लड़ाई में कूदेंगे पर PPE किट बाजार में ही नहीं

`SYNERGY’ के MD कमल गर्ग:Corona सूट मिले तो सरकार की पूरी मदद करेंगे

सिर्फ आइसोलेशन वार्ड दे पा रहे प्राइवेट मेडिकल कॉलेज-अस्पताल

सामने आई भारत सरकार की लापरवाही

Chetan Gurung

बॉयलोजिकल हमले (CORONA-Covid-19) से दहल उठी दुनिया इसका सामना करने के लिए कमर कस के मैदाने जंग में उतर गई है। भारत ने लापरवाही और देर एक साथ कर दी, लेकिन उत्तराखंड के लिए सबसे बड़ा संकट ये है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के पास PPE किट ही नहीं है। इसके बगैर उनके लिए Corona मरीजों या संदिग्धों का ईलाज कर पाना तकरीबन नामुमकिन है। वे दुनिया को थरथरा चुकी इस महामारी के खिलाफ मैदान में उतरना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए उनको PPE किट ही नहीं मिल पा रही है।

chancellor of SRHU:Vijay Dhasmana

जौली ग्रांट के स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी के पास एक भी PPE किट न होने के कारण वहाँ के डॉक्टर्स-नर्सेज ने Corona केस लेने में हाथ खड़े कर दिए हैं। `Synergy Hospital’ में सिर्फ एक PPE किट उपलब्ध है। CMI में भी कोई किट नहीं है।  देहरादून में अभी तक 4 केस Corona पॉज़िटिव के मिल चुके हैं। चारों दून मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में भर्ती हैं। शहर खतरे की सीमा को स्पर्श कर चुका है। इसको रोकने के लिए त्रिवेन्द्र सरकार ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को भी आंशिक तौर पर अधिग्रहित कर लिया है। जिस भी अस्पताल की बेडिंग क्षमता सौ या उससे ज्यादा है, वहाँ 25 फीसदी बेड सरकार के दिशा निर्देश पर खाली रखने के आदेश हो गए हैं।

kamal Garg:MD of Synergy Hospital

`Newsspace’ ने राजधानी के नामचीन प्राइवेट चिकित्सा संस्थानों के शीर्ष प्रबंधन से बात की। सभी ने कहा कि वे इस संकट की घड़ी में सरकार के साथ कंधे से कंधा मिला के Corona के खिलाफ जंग में उतरने को तैयार हैं। दिक्कत सिर्फ ये है कि उनके पास पर्सनल प्रोटेक्शन किट (PPE) नहीं है। ये मिल जाए तो वे भी अपने यहाँ Corona के ईलाज में जुट जाएंगे।

Dr.Mahesh Kuriyal:Direcor of CMI

स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी के चांसलर विजय धस्माना ने कहा, `Corona से जंग के लिए हमारे डॉक्टर्स-नर्सिंग और पैरा मेडिकल स्टाफ PPE किट की मांग कर रहे हैं। इसके बगैर वे Corona केस को हाथ में लेने को राजी नहीं है। PPE किट बाजार में कहीं उपलब्ध ही नहीं हैं। सरकार उपलब्ध करा देती है तो हमें Corona केस हाथ में लेने से गुरेज नहीं होगा। अभी हमारी दशा बिना हथियार के मैदाने जंग में कूदने जैसी है’।

राजधानी के प्रमुख अस्पतालों में शुमार `CMI’ के निदेशक और प्रसिद्ध सर्जन डॉ. महेश कुड़ियाल के मुताबिक, `शुरुआती और संदिग्ध मामले के परीक्षण के लिए तो फिर भी उन मास्क और किट से काम चल सकता है, जिसका इस्तेमाल HIV के मरीजों के परीक्षण में किया जाता है, लेकिन जो सुपर हाई रिस्क केस (Corona पॉज़िटिव) हैं, उसके लिए विशेष किट ही चाहिए’। अगर कोई केस आइसोलेशन का सरकारी अस्पताल से आता है, तो उनको रखने के लिए अस्पताल में वार्ड नियत कर दिया है’।

बल्लुपुर चौक के करीब स्थित विख्यात `SYNERGY’ अस्पताल के MD कमल गर्ग ने `Newsspace’ से कहा, `हमारे डॉक्टर्स और अन्य स्टाफ `Corona’ के खिलाफ जंग में सरकार का पूरा साथ देने में पीछे नहीं हटेंगे। दिक्कत ये है कि हमारे पास सिर्फ एक PPE किट है, जबकि कम से कम एक केस के लिए छह किट चाहिए। ये किट देश में कहीं उपलब्ध भी नहीं हैं कि खरीदा जाए। सरकार अगर उनको किट मुहैया कराती है तो उनका अस्पताल जम के Corona के खिलाफ मोर्चा लेगा’।

गर्ग के अनुसार अस्पताल में सरकार के आदेश के मुताबिक वार्ड आरक्षित कर दिया है। इसमें आइसोलेशन के मरीजों को रखा जाएगा। इन बड़े मेडिकल यूनिवर्सिटी और प्रमुख अस्पतालों को देख के ये साफ हो जाता है कि भारत सरकार ने किस कदर लापरवाही Corona के खिलाफ की। 19 मार्च 2020 तक भारत सरकार ने Corona किट और अन्य उपकरणों के निर्यात को मंजूरी दी। जनवरी में देश में Corona का पहला केस सामने आने के बावजूद ये आदेश रद्द न होना ही देश के लिए अब महामारी से लड़ाई में महा संकट बन कर खड़ा हो गया है।

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  1. मुझे ऐसा लगता है कि योगी जी ने बहुत ही अच्छी तत्प रता दिखाई है corona को रोकने के लिए व्यवस्था चाहे जो भी उपलब्ध रही हो। इस तत्परता की वजह से पिछले चौबीस घंटे में एक भी मरीज बढ़ा नहीं है। सभी राज्यों को इस तरह की तत्परता दिखानी चाहिए। सम्पूर्ण देश एक बहुत ही भयानक परिस्थिति से गुजर रहा है। उत्तराखंड में तो नौकरशाही पर भी लगाम लगानी पड़ेगी अन्यथा corona कमाई का जरिया बन जाएगा, मारना तो है ही।

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