, ,

त्रिवेन्द्र जी, गायब अफसरों-MP-MLA का क्या करें, बताइये..

जिस आलोक पांडे का नंबर आपने दिया, वह तो फोन बंद कर के बैठे हैं, जिनके खुले वे उठाते नहीं

ARC इला गिरि फंसे उत्तराखंडियों की कितनी खोज खबर ले रही, पता तो करिए

Corona से डरे जनप्रतिनिधि अपने आलीशान बंगलों में दुबक लिए

Chetan Gurung

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत अपनी तरफ से हम मुमकिन कोशिश कर रहे। Corona संकट में अवाम को कम से कम तकलीफ हो। उनको अधिक से अधिक राहत मिले। दिल्ली और अन्य शहरों में लॉक डाउन उत्तराखंडियों को मदद दी जाए। दूसरी तरफ उनके दिल्ली के दोनों जिम्मेदार अफसरों आलोक पांडे और इला गिरि का कहीं अता-पता नहीं। MP-MLA लोगों का साहस बढ़ाने-मदद करने के बजाए आलीशान बंगलों में कैद हो के अपनी खैर मनाने में लगे हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने FB अकाउंट से आलोक पांडे का नंबर जारी किया है। 6398500571 है ये नंबर। या तो मुख्यमंत्री ने ही गलत नंबर दे दिया है, या फिर पांडे ने फोन ही बंद कर दिया। न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। कहाँ लोगों की मदद के लिए AC दफ्तरों-घरों से निकलें। बंदोबस्त में लगे रहे। इधर मुख्यमंत्री ने ये मदद वाला नंबर सोशल मीडिया में डाला, उधर लोग परेशान कि नंबर तो बंद है। अब वे चारों तरफ पता करते फिर रहे। क्या इस अफसर का कोई और नंबर भी है?

दिल्ली में अपर स्थानिक आयुक्त की कुर्सी पर इला गिरि बैठी हैं। उनको भी इस वक्त तलाश के देख ले सरकार। पूछा जाए कि दिल्ली-नोएडा में जो लोग फंसे हैं, विदेश से फ्लाइट से आने के बाद दिल्ली फंसे उन लोगों को, जिनको न होटल न गेस्ट हाउस न धर्मशाला में प्रवेश मिल रहा, की मदद के लिए क्या किया है? मोहतरमा की खोज खबर कोई लेगा? `Newsspace’ के पास अनेकों ऐसे संदेश और फोन काल्स आ रहीं, मदद के लिए, जो दिल्ली-नोएडा में कई दिनों से फंसे हुए हैं।

नोएडा में फंसे दिलबर, नरेश के मुताबिक लॉक डाउन के बाद उनकी हालत बहुत खराब है। पैसे हैं नहीं। राशन लेने बाहर जाओ तो पुलिस लाठी ले के दौड़ती है। घर जाएँ तो कैसे जाएँ? गाड़ियाँ भी बंद हैं। फंसे हुए लोगों को लेने के लिए राज्य सरकार पुलिस पायलट गाड़ी के साथ बसों को भेजे। उनके ठिकानों या फिर एक तय जगह से उनको ला के घर तक पहुंचाए तो बहुत बड़ी मदद होगी। Corona लॉक डाउन से परेशान लोगों की मदद के लिए पुलिस, पत्रकार और अन्य समाजसेवी खुद सामने आ के राहत कार्यों में लगे हैं।

उत्तराखंड के पांचों सांसदों और बीजेपी-काँग्रेस के विधायकों की कोई सूरत राहत-मदद कार्यों में दिखाई नहीं दे रही। उनको कोई टॉर्च ले के तलाश दिखाए तो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। वे गधे के सिर से सींग की तरह गायब हैं। ये वे जन प्रतिनिधि हैं, जिनको इस उम्मीद से वोट देने के लिए अमीर, गरीब, बुजुर्ग, विकलांग, बीमार लाइन में घंटों खड़ा होता है कि आड़े वक्त में वे अपना जन प्रतिनिधि होने का फर्ज निभाएंगे।

ये सभी MP-MLA आलीशान बंगलों और महलों में ऐश कर रहे। कोरोना के डर से वे बाहर निकल के लोगों के दुख-दर्द को बांटने की कोशिश ही नहीं कर रहे हैं। शासन में बैठे अफसरों और मुख्यमंत्री अकेले को ही Corona के खिलाफ जंग में रात-दिन जुटना-खटना पड़ रहा। बेहतर होगा, त्रिवेन्द्र सिंह रावत ऐसे अफसरों को सबसे पहले तो मुअत्तल करें, फिर उनके ACR में लाल स्याही चलाएं।

उनके लिए उनकी फ़ाइल में लिख दिया जाए। ताजिंदगी अहम पोस्टिंग से महरूम रखने की व्यवस्था की जाती है। MP-MLA के बारे में हाई कमान को लिखें। फिर कभी दुबारा पार्टी का टिकट न दीया जाए। ऐसे जनप्रतिनिधियों को।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *