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किरकिरी के बाद पकड़ी सरकार ने राहत-मदद की रफ्तार

वरिष्ठ नौकरशाह शैलेश बगौली को सौंपी राज्यों से समन्वय की कमान

इला गिरि का फोन बिजी मोड पर,आलोक को जहां भर की कॉल दे दी

कॉल सेंटर में आ रही फंसे लोगों की सैकड़ों कॉल

Chetan Gurung

फंसे उत्तराखंडियों की मदद न कर पाने की किरकिरी झेलने के बाद त्रिवेन्द्र सरकार ने रफ्तार पकड़ी है। हालात को काबू से बाहर होते देख और फजीहत रोकने के लिए वरिष्ठ नौकरशाह शैलेश बगौली को ओवरऑल प्रभारी बना दिया गया है। साथ ही जिस काम की ज़िम्मेदारी PCS आलोक पांडे अकेले को सौंपी गई थी, उसके लिए देहरादून पुलिस लाइन में कॉल सेंटर स्थापित कर दिया गया है। तमाम हंगामे के बावजूद ARC दिल्ली इला गिरि से फोन पर बात कर पाना नामुमकिन हो गया है।

सरकार की फजीहत इसलिए भी अधिक हो गई कि यूपी सरकार ने अपने बसों से उत्तराखंड के लोगों को उनके घरों में कल भेज दिया। दिल्ली में अभी भी सैकड़ों उत्तराखंडी किसी न किसी वजह से फंसे हुए हैं। उनके पास रहने और खाने का संकट भी हो गया है। साथ ही Corona वाइरस से संक्रमित होने की आशंका भी झेल रहे हैं। उनको सुरक्षित निकालने और फंसे होने तक रहने,खाने-पीने और गंतव्य तक पहुंचाने के लिए सरकार ने कई टीम बना दी है। देहरादून में आईपीएस अफसर रिद्धिम अग्रवाल के आधीन कॉल सेंटर स्थापित कर दिया है।

वरिष्ठ आईएएस अफसर शैलेश बगौली:राज्यों से समन्वय का इंचार्ज बनाए गए

कोरोना संकट के कारण फंसे लोगों की मदद के लिए परिवहन और शहरी विकास सचिव बगौली को कमान सौंपी गई है। वह जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों की सरकारों से बात कर के उत्तराखंडियों को फंसे हुए स्थानों पर राहत पहुंचाएंगे। निकाल के लाने का भी कार्य करेंगे। और भी कई पीसीएस अफसरों को इस मुहिम में झोंका गया है। ये सभी ज़िम्मेदारी पहले पीसीएस अफसर आलोक पाण्डेय के मत्थे अकेले थी। उनको खूब लानत-मलानत झेलनी पड़ी।

पीसीएस अफसर आलोक पांडे:सुर्खियों में

कोरोना के कारण उनको राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में भी एडी बनाया गया है। आलोक के दो नंबर वाइरल कर दिए गए थे। उन्होंने फोन पर `Newsspaace’ से कहा, `मेरा एक फोन फंसे लोगों और उनके परिजनों की कॉल के कारण लगातार व्यस्त रहता है। दूसरा उठाने की फुर्सत ही नहीं मिलती’। पांडे ने कहा कि वह अकेले ही इस ज़िम्मेदारी को देख रहे थे। ऐसे में हर कॉल उठा पाना उनके लिए मुमकिन नहीं हो पा रहा था।

रुद्रप्रयाग में टिहरी सीमा पर बाहरी लोगों के पूरे परीक्षण के लिए चिकित्सकों संग डिप्टी कलेक्टर डीपी सिंह

पांडे का निजी नंबर मुख्यमंत्री ने अपनी एफ़बी पोस्ट पर वाइरल कर दी थी। जो बंद था। इससे लोगों को सरकार पर हमले का खूब मौका मिला। जो काम पांडे अकेले देख रहे थे, उसके लिए कॉल सेंटर स्थापित और अन्य पीसीएस अफसरों की भी ज़िम्मेदारी तय होने से अब लोगों को कुछ राहत मिली है। इसके बावजूद दिल्ली में एआरसी इला गिरि का फोन उठवा पाना किसी के लिए मुमकिन नहीं हो रहा।

एक अफसर के अनुसार उन्होंने भी जरूरी कार्य से इला को फोन किया था। उनका फोन भी नहीं उठा। अन्य लोगों के अनुसार एआरसी का फोन हर वक्त बिजी मोड पर रहता है। खास बात ये है कि दिल्ली में फंसे उत्तराखंडियों की व्यवस्था का जिम्मा इला को ही सरकार ने सौंपा है। धीरे-धीरे सही, लेकिन अधिकांश अफसरों ने खुद को कोरोना संकट से पार पाने की सरकार की मुहिम में खुद को झोंकना शुरू कर दिया है।

रुद्रप्रयाग में डिप्टी कलेक्टर दिनेश प्रताप सिंह के मुताबिक वे खुद खराब मौसम के बावजूद टिहरी-रुद्रप्रयाग सरहद पर डॉक्टरों और अन्य मेडिकल टीम के साथ डटे हैं। उनके अनुसार मेडिकल परीक्षण के बाद ही बाहर से आ रहे लोगों को प्रवेश करने दिया जा रहा है। 15 ऐसे लोगों को होम कोरंटाइन के लिए कह दिया, जो बाहर से आए।  

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