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गायत्री वाले पाण्ड्या और हमारे मंत्री-सांसद-विधायक

निधि, एक महीने की तनख्वाह दे के Mr.India हो गए हमारे दुखहर्ता

The Corner View

Chetan Gurung

`Corona’ (Covid-19) ने दुनिया की अर्थव्यवस्था ध्वस्त कर दी है। लोगों को अपने पैसे से ज्यादा अपने-अपनों के जान की अधिक फिक्र है। हर देश की सरकार आत्मसमर्पण की मुद्रा में है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्र के नाम संदेश में साफ कहा-`Lock Down’ के जरिये नहीं संभले तो 21 साल पीछे चले जाएंगे। ऐसे दौर में सरकार को भी पैसे की भारी किल्लत रहती है। दुनिया के कई बड़े खरबपति-नीलपति सामने आ के मदद कर रहे हैं। उत्तराखंड में ही गायत्री परिवार (शांतिकुंज-हरिद्वार) ने एक करोड़ रुपए की मदद सरकार को दी। अपनी सामर्थ्य अनुसार सामान्य लोग भी गरीबों को खाना-पानी दे रहे। जान की परवाह किए बिना सड़कों पर आ रहे। मलिन बस्तियों में जा रहे। हमारे सांसद-विधायक और मंत्री लेकिन कहाँ हैं?

क्या उनका फर्ज नहीं बनता कि वह भी सामने आएँ। लोगों को संयम दिखाने, घरों में रहने के लिए प्रेरित करते। उनकी तकलीफ़ों को दूर करने की कोशिश करते। खुद को चौकीदार कहने वाले भाजपाई सांसद, विधायक और केंद्र-राज्य में मंत्री लोग हों या फिर काँग्रेस के गिनती के विधायक। सभी आइसोलेशन में चले गए हैं। उन वोटरों को संकट में छोड़ के, जिनके बूते वे आज मौजूदा कुर्सी पर हैं। वे Mr. India हो गए हैं। यानि अदृश्य। ऐसे में खटीमा वाले बीजेपी विधायक पुष्कर सिंह धामी को जरूर याद करना होगा। जो अपने इलाके में लोगों के खाने-पीने की समस्या दूर करने में जुटे हैं।

जो काम हमारे एमपी-एमएलए का है, वे कौन कर रहे? हमारे आसपास रहने वाले सामान्य लोग, एनजीओ, सिविल डिफेंस, पुलिस, पत्रकारिता से ताल्लुक रखने वाले। अपनी खाल बचाने के लिए नेता लोग सिर्फ क्या कर रहे? केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने एक महीने का वेतन देने का ऐलान किया। जो शायद 50 हजार के करीब होगा। सांसद अजय भट्ट ने सांसद निधि से 5 करोड़ देने का फैसला किया।

एमपी अजय भट्ट:साल खत्म हुआ तो पूरी बची निधि दान कर दी

कुछ और विधायकों ने अपनी निधि से कुछ लाख देने की गर्व से घोषणा की। गोया सांसद या विधायक निधि उनकी अपनी कमाई हो। ये बात अलग है कि अधिकांश ने तो ये भी नहीं किया। इसको बेशर्मी भले न कहे। ये जरूर कहा जा सकता है कि वे वक्त-संकट आने पर, ज़िम्मेदारी से भाग खड़े हुए हैं। अगर ऐसे वक्त पर वे कहीं और रह के लोगों की सेवा में जुटे हैं तो फिर बताएं। बताने के सौ साधन सोशल मीडिया के दौर में हैं।

भट्ट ने सांसद निधि से 5 करोड़ दिए। कमाल है! यानि साल भर में उन्होंने निधि से एक पैसा भी खर्च नहीं किया! ये पैसा तो विकास कार्यों के लिए होता है। अब जबकि मार्च महीना चल रहा। देशव्यापी लॉक डाउन है। निधि से कुछ होना भी नहीं था। सो कोरोना संकट काल को निधि समर्पित कर देना उनका एक स्मार्ट मूव कह सकते हैं। कहने को निधि सौ फीसदी खर्च भी हो गई। उपलब्धि रेकॉर्ड में यही आएगा।  

सतपाल महाराज उन मंत्रियों-राजनेताओं में शुमार हैं, जो अरबपति हैं। उनका दिल्ली में पंजाबी बाग में शानदार–आलीशान आश्रम है। अरबों की कीमत का। हरिद्वार समेत देश के तमाम हिस्सों में आश्रम हैं। उत्तराखंड के लोग दिल्ली में लॉक डाउन के कारण मारे-मारे फिर रहे। भूख-प्यास से। रहने का ठिकाना नहीं है। उनके पास। गायत्री परिवार के प्रणव पाण्ड्या ने सीधे नकद एक करोड़ रुपए से सरकार की मदद कर दी। कोरोना वालों को राहत दिलाने के लिए।

पाण्ड्या ने फिर साबित किया। वह अलग किस्म के हैं। राज्यसभा की सीट-पद्मश्री को भी वह नमस्ते कह चुके हैं। सतपाल महाराज क्या ऐसा करने के लिए सक्षम नहीं हैं? अपना पंजाबी बाग-हरिद्वार का आश्रम उत्तराखंड वालों के लिए नहीं खोल सकते? ऐसे आड़े वक्त पर। खास तौर पर जब वह सियासत में हैं। उत्तराखंड में त्रिवेन्द्र सरकार के कैबिनेट मंत्री हैं। उनका तो फर्ज है। राजनेता के नाते भी। फिर वह बेशुमार दौलत-माल-असबाब के स्वामी भी हैं। संत हैं। उन्होंने करना भी क्या इतनी दौलत का?

वैसे भी सब दान और चंदे में आई दौलत है। अपना अर्जित कुछ नहीं। मेहनत के नाम पर प्रवचन ही किया। क्या वह पाण्ड्या से कुछ प्रेरणा नहीं ले सकते? उनके विपरीत साधारण लोग तक आपस में इकट्ठे हो करहे। खाने-पानी के पैकेट बना के भूखे-प्यासों को बाँट रहे। कभी खाकपति रहे हमारे करोड़पति मंत्री-विधायक क्या इतना करने की हैसियत भी नहीं रखते हैं! ऐसा है तो फिर उनको अपना जनप्रतिनिधि चुन के, उनके मंत्री बनने की खुशी में उछल के हमने बहुत बड़ी गलती कर दी।

मत भूलिए कि हमारे पास 71 विधायक (एक नामित) और पाँच सांसद हैं। वे ऐसे दौर में बिलों में छिप के और सांसद-विधायक निधि का पैसा दे के बच रहे। एक महीने की तनख्वाह दे कर ज़िम्मेदारी पूरी समझ रहे। अगली बार जब चुनाव आए तो अवाम को इनके चेहरे, नाम, कर्म जरूर याद रखने चाहिए। वोट तभी दें। देश और समाज का भला तभी होगा। सियासत में सफाई भी तभी आएगी।

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