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योगी-केजरीवाल फंसे उत्तराखंडियों को सेफ पैसेज के हक में नहीं!

त्रिवेन्द्र सरकार ने टेलीफोन लाइन 2 से बढ़ा के 30 की

फिलहाल, आपातकालीन मामलों में ही लोगों को लाने का फैसला

90 फीसदी फंसे हुए लोगों को सता रही घर की याद

दिल्ली में ही राहत-आवासीय शिविर पर विचार

Chetan Gurung

UP की योगी सरकार और दिल्ली के केजरीवाल सरकार से त्रिवेन्द्र सरकार को Corona संकट में फंसे लोगों को निकाल लाने के मामले में झटका लग सकता है। दोनों ही सरकारें अपनी सीमाओं को किसी भी सूरत में आने-जाने देने के लिए खोलने के हक में नहीं दिख रहीं। ऐसे में दिल्ली-नोएडा में फंसे उत्तराखंडियों के लिए संकट और समस्या और बढ़ सकती है। फंसे लोगों की मदद कार्यों के इंचार्ज सचिव शैलेश बगौली ने हर कॉल को सुनने के लिए कॉल सेंटर में टेलीफोन लाइन 2 से बढ़ा के 30 कर दी है।

यूपी सरकार ने दो दिन पहले कई उत्तराखंडियों को दिल्ली के गाजीपुर से निकाल के उनके घरों में अपनी बसों से भेजा था। उसके बाद उत्तराखंड सरकार भी नींद से जागी। उसकी बसों ने भी कई लोगों को दिल्ली से निकाला। देहरादून पुलिस लाइन में कॉल सेंटर खोल के नंबर प्रचारित किए। अब हजारों कॉल लगातार मदद के लिए दिल्ली, बंगलुरु, मुंबई, यूपी से आ रही है।

बगौली को जिम्मा दिया गया है कि वह हर संबन्धित राज्यों से बात करें। फिर उनके यहाँ फंसे उत्तराखंडियों की हर मुमकिन मदद करें। उनको राहत पहुंचा सके। इसमें अब पेच फँसता दिख रहा है। `Newsspace’ से बगौली ने कहा, `दोनों राज्य सरकारों से बात हुई है। उनका रुख सकारात्मक नहीं दिख रहा। उनको आशंका है कि इससे कोरोना वाइरस के फैलने और लोगों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाएगा’।

सचिव के अनुसार वे अपनी सरहद उत्तराखंडियों को सेफ पैसेज देने के लिए खोलने में हिचक रहे हैं। सरकार के पास अन्य विकल्प ये है कि फंसे उत्तराखंडियों के रहने और खाने का बंदोबस्त वहीं करा दिया जाए, जहां वे अभी हैं। इसके लिए वहाँ की सरकारों से बात कर ली जाएगी। फंसे हुए कई लोगों से उनकी बात हुई है। ज़्यादातर को रहने और खाने की दिक्कत नहीं है।

बगौली ने कहा, `उनको घर-परिवार की याद आ रही। वे घर जाना चाह रहे। ऐसे लोग 90 फीसदी हैं’। सरकार की कोशिश है कि पहले उन लोगों को निकाल के घर छोड़ा जाए, जिनके यहाँ आपात स्थिति है। मसलन परिवार में कोई निधन या फिर बड़ा धार्मिक संस्कार। मदद-राहत कार्यों के कमांडर बगौली के मुताबिक सरकार की कोशिश है कि हर फंसे-परेशान व्यक्ति की कॉल सुनी जाए। इसके लिए फोन लाइनें बढ़ाई जा रही हैं।

हेल्प लाइन कॉल सेंटर में पहले सिर्फ 2 टेलीफोन लाइन थी। सरकार ने इसको बढ़ा के कल 15 किया था। आज और बढ़ा के 30 कर दिया है। सचिव के अनुसार, `इससे हर शख्स को अपनी बात कहने का मौका मिल रहा है। सरकार उनकी आवाज सुन पा रही है। पहले ये शिकायत मिल रही थी कि कॉल सेटर पर कॉल नहीं हो पा रही है। लाइन लगातार व्यस्त हैं’। हेल्प लाइन नंबर 0135-2722100..9997954800 (सिर्फ व्हाट्सएप्प के लिए)।

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