जो पकड़े गए, उनमें देहरादून के 2 और 24 हरिद्वार से हैं

पुलिस और खुफिया विंग को भी आशंका से इंकार नहीं

Chetan Gurung

दिल्ली के निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह के करीब तबलीगी मरकज में शामिल कॉरोना पॉज़िटिव की मौत और 200 संदिग्धों के सामने आने के बाद उत्तराखंड के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। ये संदिग्ध इस वक्त दिल्ली पुलिस-सरकार की देख-रेख में हैं। जमात में जितने लोग अभी भी शामिल थे, उनमें से देहरादून के 2 और हरिद्वार के 24 लोग हैं। आशंका ये जताई जा रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उत्तराखंड से और लोग भी वहाँ गए थे और खामोशी संग पहले ही लौट आए हों। साथ में कॉरोना संक्रमण भी ले आए हों।

पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अशोक कुमार ने `Newsspace’ से कहा, `ये पता कराया जा रहा है कि क्या कोई और भी पहले ही तबलीगी मरकज गया था, और पहले ही लौट आया हो’। उन्होंने इसकी पुष्टि की कि हरिद्वार-रूड़की से 24 लोग वहाँ अभी भी थे। देहरादून से 2 लोग थे। ये सभी दिल्ली में ही हैं। उनका कॉरोना संक्रमण के मद्देनजर वहीं पर परीक्षण किया जा रहा है। उत्तराखंड पुलिस इस मामले में दिल्ली पुलिस-प्रशासन के संपर्क में है।

उत्तराखंड के लिए खतरे की बात ये है कि तबलीगी मरकज का ये धार्मिक सम्मेलन, जिसमें इस्लाम के प्रचार का काम किया जाता है, का आयोजन 1 मार्च से 15 मार्च तक हुआ था। इसके चलते ये मुमकिन है कि कई अन्य लोग भी उत्तराखंड से वहाँ गए हों और खामोशी संग पहले ही लौट आए हों। वे ट्रेवेल हिस्ट्री की जानकारी छुपा के कॉरोना को फैला न रहे हों। उनको तलाशने में पुलिस और खुफिया विंग जुटी हुई है।

हालांकि, पुलिस के पास अभी इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है। वह इस संबंध में कोई जोखिम लेना नहीं चाहती है। पुलिस और खुफिया शाखा का काम इस दिशा में करना इसलिए भी जरूरी है कि जम्मू के जिस बुजुर्ग शख्स की मौत कॉरोना से हुई, वह भी इसी तबलीगी मरकज से लौटा था। अब उसके परिवार के साथ ही संपर्क में आए लोगों को भी संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है।

दिल्ली में उन 200 लोगों को आइसोलेशन में रखा गया है, जो इस मरकज में शरीक हुए थे। कई इस्लामिक देशों के लोगों के भी इसमें शामिल होने से कॉरोना संक्रमण का खतरा अधिक बना है। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि इसमें शामिल लोगों का खुले आम घूमना कितना घातक साबित हो सकता है। इस आशंका के कारण ही उत्तराखंड सरकार भी तबलीगी मरकज से लौटे लोगों की खोज-खबर को ले कर गंभीर हो गई है।

राज्य के साथ ही केंद्र की खुफिया एजेंसियां (IB और R and AW) तथा MI भी सुरागरशी में जुट गई हैं कि जैसा दिल्ली में जमात में लोग खामोशी संग जमा हो के गतिविधियां चला रहे थे, वैसा उत्तराखंड में भी तो नहीं हो रहा। हालांकि, संवेदनशील मामला होने के कारण इस बारे में शासन तथा पुलिस के आला अफसर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

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