DA काटने से सिर्फ 1000 करोड़ की भरपाई

केंद्र से पुनर्वास पैकेज अभी तक नहीं मिला

कामकाज-उद्योगों-कारोबार ठप होने से आर्थिक संकट बढ़ा  

Chetan gurung

चालू कॉरोना संकट से ही उत्तराखंड सरकार को अभी तक 7,000 करोड़ का चूना खजाने में लग जाना तयशुदा है। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के DA काटने से भी सिर्फ 1000 करोड़ तक की भरपाई साल भर में होगी। केंद्र सरकार से अभी तक कोई पुनर्वास पैकेज उत्ताराखंड को नहीं दिया है। आम तौर पर ये पर्यटक सीजन है, जो बुरी तरह पिट चुका है। वित्त सचिव अमित नेगी ने कहा, `राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार समीक्षा बैठकें लगातार कर रही हैं’।

कॉरोना लॉक डाउन ने उत्तराखंड में होटल सेक्टर को चौपट कर दिया है।

सरकार को जो कमाई होती है वह उद्योगों, GST से केंद्र सरकार के जरिये मिलने वाला लाभांश, खनन और शराब महकमे से आती है। कॉरोना ने पूरी दुनिया की अर्थ व्यवस्था चौपट कर डाली है। उत्तराखंड और बुरी तरह तबाह हो चुका है। यहाँ वैसे ही कमाई के साधन बहुत सीमित हैं जो महामारी के कारण सब कुछ बंद होने से पूरी तरह खत्म हो गए हैं।

वित्त सचिव:अमित नेगी

उद्योगों से एक तरफ खूब टैक्स आता था तो बिजली की खपत ज्यादा होने से उससे भी काफी राजस्व मिलता था। कारोबार-बाजार के चलने से GST मिलता था। जो भले केंद्र को जाता है लेकिन राज्य को लाभांश दिया जाता है। ये हजारों करोड़ में होता है। खनन और शराब सरकार ने खोल दिया है, लेकिन दोनों से इस बार शायद ही उतना राजस्व आने की उम्मीद है, जितना मिला करता था।

खनन में तमाम औपचारिकताएँ कामकाज को धीमा बनाती हैं। साथ ही कारोबार, निर्माण कार्य भी मामूली ही खुलने के कारण खनन में भी कारोबारी ठंडे पड़ गए हैं। शराब से उम्मीद है, लेकिन वह नाकाफी होगी। ऐसे नाजुक दौर में केंद्र सरकार से भी कोई पुनर्वास पैकेज अभी तक नहीं मिला है। इसके बगैर राज्य के कारोबारियों को फिर से खड़ा करना त्रिवेन्द्र सरकार के लिए दाँत में पसीना आने जैसा होगा।

वित्त सचिव अमित नेगी ने पूछे जाने पर कहा, `पुनर्वास पैकेज जैसा अभी कुछ केंद्र से नहीं मिला है, लेकिन गृह विभाग को शायद 30-40 करोड़ रुपए कॉरोना से पार पाने के लिए दिल्ली से कुछ वक्त पहले आया है’। उन्होंने कहा कि करचरियों और पेंशनरों के DA काटने से जो पैसा एक साल में मिलेगा, वह 1000 करोड़ के आसपास ही होगा। ये काफी नहीं होगा।

नेगी के मुताबिक कॉरोना संकट ने बाकी सेक्टरों की तरह Hospitality Sector को धराशायी कर दिया है। ये सीजन इसी सेक्टर के लिए होता है। शादी-ब्याह का सीजन भी खत्म होने से कई अन्य सेक्टर ऑटोमोबाइल, कैटरिंग, कपड़ा सेक्टर भी पूरी तरह भरभरा गया है। सिर्फ इतने दिनों के लॉक डाउन में ही उत्तराखंड को 7-8 हजार करोड़ का राजस्व घाटा हो जाने की आशंका है। आगे भी जारी रहने की सूरत में ये कहाँ तक जाएगा, कहा नहीं जा सकता।

वित्त सचिव ने कहा, `सरकार हालात को समझने के बाद राजस्व की दशा को बेहतर करने के लिए जुटी हुई है। वन, आबकारी और अन्य महकमों की समीक्षा बैठक इस संबंध में हो चुकी है। जितने भी महकमे राजस्व अर्जन वाले हैं, उनको कैसे सशक्त कर सरकारी खजाने को भरा जाए, इस पर मंथन चल रहा है’।

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