स्कूल फीस मामले में HC के अन्तरिम आदेश से बढ़ा कद

नोटिस के जवाब में बोले कुँवर-जो फैसला करना है करे, मैं मोदी जी के साथ रहूँगा

Chetan Gurung

बीजेपी के लिए कुँवर जपिंदर सिंह पर कोई भी संभावित दंडात्मक कार्रवाई अब उल्टा पड़ सकती है। स्कूल फीस वाले मुद्दे पर नैनीताल हाई कोर्ट के अन्तरिम आदेश ने पार्टी के इस नए-नवेले उत्साही सफेद पोशाक प्रेमी को झटके में लोकप्रिय कर दिया है। उन्होंने पार्टी के नोटिस का जवाब दे दिया है। `Newsspace’ से उन्होंने कहा, `बीजेपी नेतृत्व को पूरा हक है कि वह नोटिस के जवाब के बाद कोई भी कदम उठाए। मेरा रुख साफ है। मैं अपने नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हूँ। उनको कभी नहीं छोड़ूंगा’।

जपिंदर सिंह:पार्टी जो भी फैसला करे, मोदी के साथ रहूँगा

जपिंदर के खिलाफ पार्टी ने नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया था। दरअसल, बीजेपी में शरीक होने के बावजूद जपिंदर ने सामाजिक कार्यकर्ता वाला अंदाज नहीं छोड़ा है। राजधानी के ज़्यादातर स्कूलों के मालिकों के बारे में माना जाता है कि उनके रिश्ते सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं से बहुत गहरे हैं। इसके चलते ही फीस मुद्दे पर सरकार की तरफ से बहुत सख्त किस्म के आदेश जारी नहीं हुए थे।

सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत

अनेक स्कूलों ने दो महीने की फीस लॉक डाउन के बावजूद वसूल ही ली। इसके लिए उन्होंने नोटिस-संदेश भेजे और ऑनलाइन क्लासेस चलाईं। स्कूलों के इस रुख के खिलाफ जपिंदर ने अखबारों में विज्ञापन दिए। सोशल मीडिया में अभियान चलाया। बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगवा। ये बात अलग है कि उनकी फोटो सबसे बड़ी होती थी और बाकी नेताओं की छोटी। इतना ही नहीं, हाई कोर्ट तक चले गए।

उनके इस तरह के आक्रामक रुख तथा अभियान से बीजेपी के भीतर और स्कूल मालिकों में खलबली मच गई। उनकी शिकायत की गई कि वह अपनी पार्टी की सरकार के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। इस पर उनको कारण बताओ नोटिस पार्टी ने जारी कर दिया। ये बात अलग है कि जपिंदर को मिलने से पहले ही नोटिस सोशल मीडिया में वायरल हो चुकी थी।

जपिंदर ने पार्टी को नोटिस का जवाब देते हुए कह दिया है कि वह जो भी फैसला करे, मंजूर है, लेकिन उनके नेता मोदी हैं। उनको छोड़ के कहीं नहीं जाएंगे। पार्टी के लिए जपिंदर के खिलाफ किसी भी किस्म की छोटी-बड़ी कार्रवाई मुश्किल हो गई है। हाई कोर्ट उनके अभियान को एक किस्म से सही साबित कर चुका है। फीस मुद्दे पर अदालत का अन्तरिम आदेश सरकार की अगर शिकस्त है तो जपिंदर की साफ जीत है।

जपिंदर पर कार्रवाई बीजेपी को जन विरोधी की छवि में फंसा सकती है। साथ ही जन मुद्दों को उठाने वालों को नापसंद करने का ठप्पा भी लग सकता है। जपिंदर ने नोटिस का जवाब देने के साथ ही पार्टी के प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजय कुमार से भी मुलाक़ात कर अपनी बात अलग से भी रखी है। जपिंदर को बीजेपी में केन्द्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की पैरवी से प्रवेश मिला, ऐसा कहा जाता है।

न्यूज़ स्पेस पर चलायी गयी ख़बर हुक्मरोनों तक पहुँची

ये माना जाता है कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और पार्टी अध्यक्ष बंशीधर भगत से उनके प्रवेश के बारे में ज्यादा रायशुमारी नहीं की गई। ये बात अलग है कि दोनों ने जपिंदर के प्रवेश का विरोध भी नहीं किया।    

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