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बेहाल क्रिकेट:ज्ञानेन्द्र को अपेक्स मेम्बर बनाने पर CaU में बवंडर

गज़ब!सचिव माहिम ने स्वागत किया, उपाध्यक्ष,कोषाध्यक्ष,संयुक्त सचिव का खुला विरोध

एक सुर में बोले, एपेक्स काउंसिल के अधिकारों का हनन

अध्यक्ष गुनसोला से तत्काल EC बुलाने की मांग

पूर्व अध्यक्ष HSB:एपेक्स काउंसिल सदस्य सिर्फ CaU में तय होगा

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट में यूपी के दखल और शुक्ला-वर्मा लॉबी गठबंधन की ताजा-तरीन मिसाल ज्ञानेन्द्र पांडे को क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड का सदस्य बनाया जाना है। पूर्व क्रिकेटर पर आपराधिक आरोपों में फंसे होने और CaU के अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए एसोसिएशन के 3 अहम ओहदेदारों ने इस मुद्दे पर तत्काल एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक बुलाने की मांग की। सचिव माहिम वर्मा ने ज्ञानेन्द्र का उत्तराखंड एपेक्स काउंसिल का सदस्य बनने पर स्वागत किया है।

ज्ञानेन्द्र को क्रिकेटर्स एसोसिएशन की तरफ से एपेक्स काउंसिल में BCCI ने भेजा है, ऐसा कहा जा रहा है। इस पर CaU के उपाध्यक्ष संजय रावत, कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी और संयुक्त सचिव अवनीश वर्मा बुरी तरह भड़क गए हैं। उन्होंने अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला को व्हाट्स एप संयुक्त रूप से करते हुए मांग की कि वह तत्काल ही कार्यकारिणी की बैठक बुला के इस मसले पर विचार करें।

तीनों ने आरोप लगाया कि ज्ञानेन्द्र पर उन्नाव में आपराधिक मुकदमा चल रहा है। उन पर पैसे लेने का आरोप है। एपेक्स काउंसिल में किसको रखना है, ये काउंसिल को तय करना है। ऐसे में ज्ञानेन्द्र को थोपा जाना (नियुक्ति) पूरी तरह अवैध है। ये भी कहा गया है कि ये मामला मीडिया में सुर्खियां बन सकता है। CaU के आजीवन सदस्य ओपी सूदी ने भी गुनसोला को व्हाट्स एप कर ज्ञानेन्द्र की नियुक्ति पर अंगुली उठाई है।

सचिव माहिम वर्मा ने एपेक्स काउंसिल सदस्यों के विरोध के बावजूद ज्ञानेन्द्र पांडे का स्वागत किया है

उन्होंने कहा कि बिना एपेक्स काउंसिल की मंजूरी के ज्ञानेन्द्र की नियुक्ति एसोसिएशन के संविधान के विरुद्ध है। इस तरह के फैसलों से लोगों में संविधान विरुद्ध फैसले लिए जाने का संदेश जा रहा है। ये न्यायोचित नहीं है। घोर निंदनीय है। अपेक्स काउंसिल की बैठक तत्काल बुला के इस मसले पर विचार किया जाए। पिछले वित्तीय वर्ष (2019-2020) के आय-व्यय का ब्योरा भी समस्त सदस्यों को भेजने की मान की।

ज्ञानेन्द्र के संदर्भ में उन्होंने कहा कि जिसके खिलाफ भी आपराधिक मामले अदालत में चल रहे हैं, उनको एसोसिएशन से दूर रखा जाए। साथ ही अपेक्स काउंसिल की बैठक बुला के मनोनयन (वास्तव में नियुक्तियाँ) और लंबित भुगतानों के बारे में सर्व सम्मति से फैसले हों। सूदी ने CaU की समितियों के भी गठन को अंजाम दे के CaU की छवि सुधारने की अपेक्षा अध्यक्ष से की। पृथ्वी ने `Newsspaace’ से कहा कि उनको बताया गया है कि ज्ञानेन्द्र को BCCI ने भेजा है, लेकिन इंडियन क्रिकेटर्स एसोसिएशन ने भेजा होगा, उनको ऐसा लगता है। ऐसा है तो ये भी पूरी तरह अनुचित है।

पहले ही दो फाड़ में बुरी तरह बंटी CaU में शुक्ला-वर्मा-यूपी लॉबी के ज्ञानेन्द्र को भेजने के फैसले से जबर्दस्त सुनामी आना तय है। वर्मा लॉबी इसलिए ज्ञानेन्द्र के सामने बिछी जा रही है कि उसके पीछे शुक्ला-यूपी लॉबी का हाथ है। माहिम को भी शुक्ला का ही मोहरा शुरू से कहा जाता है। BCCI में उनका चुनाव और फिर वहाँ से छुट्टी के पीछे शुक्ला का ही फैसला था, बताया जाता है। एसोसिएशन के व्हाट्स एप ग्रुप में भी वर्मा लॉबी न सिर्फ ज्ञानेन्द्र के सम्मान में अभी से बिछती दिख रही है, वहीं दूसरी लॉबी के ओहदेदारों के लिए विरोधात्मक सुर दिखा रहे हैं।

पूरे मामले में अध्यक्ष गुनसोला का रुख हैरतनाक ढंग से खामोशी वाला है। वह इस मामले में जुबान खोल के राजी नहीं हैं। उनकी सियासी और क्रिकेट सियासत में गुरु पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट अलबत्ता, उनसे और वर्मा लॉबी से बेहद खफा दिख रहे हैं। उन्होंने कहा, `इस तरह एसोसिएशन कभी आगे नहीं बढ़ती है। ज्ञानेन्द्र या किसी को भी एपेक्स काउंसिल में रखने का अधिकार CaU के पास है। न कि BCCI या फिर क्रिकेटर्स एसोसिएशन को। इस मामले को हम हल्के में नहीं ले रहे हैं। जल्दी ही इस मामले में एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक बुलाने के लिए वह अध्यक्ष से बात करेंगे’।

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