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मुद्दा:IPL के लिए खोले खेल स्टेडियम!

बिना दर्शकों के सिर्फ टीवी चैनलों-स्पोंसरशिप से आ जाएंगे अरबों

देश के दिग्गजों और बड़ी कंपनियों के करोड़ों दांव पर हैं

Chetan Gurung

केंद्र सरकार ने लॉक डाउन-4 में स्पोर्ट्स स्टेडियम खोलने की मंजूरी दे दी है। दर्शकों के बगैर। लोगों के पल्ले नहीं पड़ रहा कि आखिर इसका मतलब क्या है? वे सिर धुनने लगे हैं, लेकिन मतलब दिख नहीं रहा है। वे सोच रहे हैं कि आखिर केंद्र सरकार को ऐसी क्या गरज पड़ी है जो स्टेडियम खोलने पड़े। घुमा-फिरा के सिर्फ इतना ही दिख और समझ आ रहा है कि इस फैसले के पीछे शायद परोक्ष तौर पर IPL को शुरू करने की मंजूरी देना है? दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग में अरबों रुपए दांव पर लगते हैं और देश की बड़ी कंपनियों और दिग्गज उद्योगपतियों की दिलचस्पी इस लीग में रहती है।

ये महीना आम तौर पर IPL का होता है, और खिलाड़ी करोड़ों रुपए दे के बुक किए जा चुके हैं। BCCI इस लीग के प्रसारण अधिकार और स्पानसरशिप बेच चुका है। ये ऐसी लीग है जिसमें खेलने के लिए दुनिया के बड़े से बड़े खिलाड़ी लालायित रहते हैं। गेल-ब्रावो जैसे तो वेस्ट इंडीज की टीम तक छोड़ के यहाँ खेलने आते हैं। प्रतिस्पर्द्धा का स्तर ऐसा होता है कि मुरलीधरन और मैक्ग्राथ सरीखे दुनिया के शीर्ष गेंदबाज बाहर बैठे होते हैं।

ये माना जा रहा है कि IPL नहीं होता है तो BCCI को तो जो घाटा होगा वो होगा लेकिन जिन कंपनियों और लोगों के पास टीमों का स्वामित्व है, वे डूब जाएंगे। उनको अरबों का करार बतौर प्रायोजक मिला हुआ है। 5 सितारा होटल्स आदि बुक किए थे। वे सब रद्द हो जाएंगे। पैसा मिलेगा नहीं। दूसरी तरह खिलाड़ी को करार के मुताबिक निश्चित फीस, जो कि लीग न होने की दशा मे पूरी न भी देनी पड़े तो भी अच्छी-ख़ासी होगी।

नीता अंबानी, विजय माल्या, BCCI के पूर्व अध्यक्ष श्रीनिवासन, शाहरुख खान सरीखों की टीमें IPL में उतरती हैं। अंबानी और श्रीनिवासन उन लोगों में से हैं, जो मनचाहे फैसले बीसीसीआई-सरकार से करवाने की ताकत रखते हैं। BCCI को मनाना और समझाना या फिर दबाव में लाना उनके लिए बाएँ हाथ का खेल हो सकता है। असली मामला तो सरकार को पटाने का है। खेल गतिविधियों और स्टेडियम को उसने ही बंद किया हुआ था।

लॉक डाउन-4 में स्टेडियम खोलने का मतलब है कि खेल गतिविधियां तो जरूर होंगी। सिर्फ स्टेडियम खोलने का कोई तुक तो है नहीं। ऐसे में IPL जैसी दुनिया की सबसे आकर्षक और ग्लैमर से भरी लीग अब मुमकिन दिख रही है। बीसीसीआई खाली स्टेडियम में लीग करा सकता है। उसका असली पैसा तो स्पोंसरशिप और टीवी प्रसारण अधिकार से आने हैं। दर्शकों के टिकट से कहीं गुना ज्यादा।

इससे उनकी कमाई पर फर्क तो पड़ सकता है लेकिन घाटे की नौबत नहीं आएगी। खिलाड़ी सब पेशेवर हैं। उनको गर्मी या फिर खाली स्टेडियम से फर्क शायद ही पड़े। टेस्ट मैच और प्रथम श्रेणी के मैच वे खाली स्टेडियम में खेलते रहने के आदि हैं। भारत के खिलाड़ियों को तो बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ेगा। दिल्ली की गर्मी में वे हॉट वेटर क्रिकेट खेलते रहे हैं। ऐसे में IPL कुछ देर से हो तो सकता है लेकिन होने की संभावना बन गई है।

यूं भी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर कोरोना के कारण तहस-नहस हो चुका है। सभी टीमें और खिलाड़ी अपने देशों और घरों में लॉक डाउन हैं। वे भी नहीं जानते कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट अब कब होगा। ये तो तय है कि आईसीसी को अब नए सिरे से अपना कैलेंडर बनाना होगा। ऐसे में आईपीएल के लिए कहीं कोई रुकावट केंद्र सरकार के ताजा फैसले से अब नहीं दिख रही है।

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