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मुद्दा:नवंबर तक बरकरार रहेगा लॉक डाउन! छूट के साथ फैल रहा कहर

मंत्री कौशिक बोल चुके हैं-व्यवस्था सितंबर तक की थी,2 महीने बढ़ाई है

ऑड-ईवन नंबर की गाड़ियों से वाकई कोरोना रुकेगा?

Chetan Gurung

लॉक डाउन-4 के लागू होने से पहले से ही लोग इस ऊहा-पोह में हैं कि आखिर देश बंदी कब तक चलेगी? क्या ये इसी तरह पखवाड़ों में बंट के आगे बढ़ती रहेगी? इसका अंत है भी या नहीं? इसका जवाब तो हकीम लुक़मान के पास भी नहीं दिखता लेकिन इतना जरूर है कि उत्तराखंड सरकार को अंदेशा है कि ये संकट लंबा खिंच सकता है। इतना कि नवंबर को भी स्पर्श कर लें तो अजूबा नहीं होगा। इसलिए तैयारी भी तभी तक की है। एक सवाल ये भी उठ रहा है कि आखिर ऑड-ईवन नंबर की गाड़ियों को चलने देने के फैसले का कोरोना से जंग में क्या मतलब है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब पहला लॉक डाउन घोषित किया था तो ऐसा माना जा रहा था कि एक चरण शायद और आएगा। उसके बाद ये खत्म होगा। ऐसा नहीं हुआ। आज आलम ये है कि तीसरा चरण खत्म हो चुका है। चौथा चरण शुरू हो गया है। लॉक डाउन से कोरोना से जंग में फतह मिलती दिख रही हो या फिर कोरोना का कहर थमता दिख रहा हो, ऐसा बिल्कुल भी नहीं दिख रहा।

अभी तो ये भी अंदाज नहीं लग रहा है कि लॉक डाउन के कितने चरण आने वाले हैं। कब ये व्यवस्था खत्म होगी? जब व्यवस्था खत्म होगी तो कोरोना पर अंकुश लग चुका होगा? ये भी कोई नहीं जानता है। कहाँ तो शुरुआत में सिर्फ दो विदेश से आए और 3 आईएफ़एस अफसर तथा बाद में तब्लीगी जमात वाले ही कोरोना पॉज़िटिव मिले थे। कहाँ अब पहाड़ का कोना-कोना भी कोरोना कहर से थरथरा रहे हैं। भले सबसे ज्यादा केस देहरादून, उधम सिंह नगर और नैनीताल में पाए गए हैं।

इसके बावजूद इस कठोर हकीकत से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि अब अचानक ही कोरोना पॉज़िटिव केस पहाड़ों में अधिक पाए जा रहे हैं। तो क्या लॉक डाउन व्यवस्था से कोरोना को थामा नहीं जा सकता? सरकार फिर भी लॉक डाउन को इसके साथ जंग में बहुत बड़ा उपाय मान रही है। इतना कि वह इसको नवंबर तक खींचने के लिए भी तैयारी कर चुकी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के प्रवक्ता और मंत्री मदन कौशिक कह चुके है, `पहले व्यवस्था सितंबर तक लॉक डाउन की थी। अब नवंबर तक कोई दिक्कत नहीं है’।

इस बीच सरकार ने ऑड और ईवन नंबर की गाड़ियाँ चलाने का फैसला किया है। ये फैसला हैरान इसलिए करता है कि इससे ये साफ नहीं हो पा रहा है कि आखिर क्या इस कदम से कोरोना के खिलाफ जंग में मदद मिल पाएगी? क्या इसका मतलब ये है कि गाड़ियों से गाड़ियाँ छू भी जाए तो कोरोना फ़ेल सकता है? ऐसा है तो सरकार के इस फैसले को स्वीकार किया जा सकता है।

एक पूर्व आला नौकरशाह के अनुसार इससे न सिर्फ गाड़ियों में भीड़ बढ़ेगी, बल्कि सोशल डिस्टेन्सिंग के नियम टूटने का खतरा रहेगा। दफ्तरों में कर्मचारियों के आने या फिर श्रमिकों के काम पर जाने में दिक्कत होगी। मुख्य सचिव रह चुके एक अफसर के अनुसार ये व्यवस्था अटपटी है। जरूरी नहीं है कि सभी के पास अपने वाहन हों। कई लोग आज भी बसों और टेम्पो से दफ्तर आना-जाना करते हैं। इस फैसले पर पुनर्विचार होना जरूरी है।

खास बात इस ऐतराज को ले कर ये भी है कि ऋषिकेश-हरिद्वार-विकासनगर-मसूरी से देहरादून आना-जाना करने वाले भारी तादाद में  हैं। उनके लिए सार्वजनिक वाहन पर्याप्त तादाद में उपलब्ध होना जरूरी होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑड-ईवन व्यवस्था सिर्फ अफरा-तफरी मचाएगी। हालात को बिगाड़ेगी।

ऑड-ईवन व्यवस्था महज प्रदूषण रोकने के लिए दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने अपनाई थी। कोरोना रोकने में ये व्यवस्था कारगर किस तरह दिखती है, ये समझ पाना मुश्किल साबित हो रहा है।

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