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हे भगवान! आधे दिन तक 9 कोरोना पॉज़िटिव मिले

120 पहुंचा टोटल, 4 उधम सिंह नगर से,अचानक बढ़ी संक्रमितों की रफ्तार

संक्रमण के खौफ से मरीजों को टाल रहे डॉक्टर

पूर्व नौकरशाह विजेंद्र पाल की नेगेटिव आई रिपोर्ट

Chetan Gurung

प्रवासियों की रेल-बसों से वापसी की तादाद बढ़ते ही देश के बाकी हिस्सों की तरह अब उत्तराखंड में भी अचानक ही कोरोना वाइरस ने रफ्तार पकड़ ली है। कल के झटके से अभी सरकार और लोगों ने सांस ढंग से ली भी नहीं थी और आज सुबह फिर 9 संक्रमितों की रिपोर्ट पेश हो गई। पूर्व IAS अफसर विजेंद्र पाल भी संक्रमण की आशंका से घिरे थे, उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। आलम या है कि संक्रमण के डर से डॉक्टर भी मरीजों से दूर-दूर भाग रहे हैं।

आज जो 9 कोरोना पॉज़िटिव मिले उनमें 4 उधम सिंह नगर के, 2 नैनीताल के, और 1-1 अल्मोड़ा, उत्तरकाशी तथा हरिद्वार के हैं। प्रदेश में कुल 120 लोग अब तक संक्रमित हो चुके हैं। चिंता की बात ये है कि डबलिंग रेट, जो बहुत अहम होती है, हफ्ते भर में ही 45 दिनों से गिर कर 10.3 दिन की हो गई है। देर शाम तक इसमें इजाफा होने की आशंका है।

इस बीच पूर्व नौकरशाह विजेंद्र पाल ने शंका होने पर अपना परीक्षण कराना चाहा। उनको मालूम चला कि दून अस्पताल में एक दिन अनिवार्य रूप से भर्ती किया जाएगा। उन्होंने निजी चिकित्सक से बात की, लेकिन वह परीक्षण के लिए भी घबराए दिखे। पाल ने `Newsspace’ से कहा, `उन्होंने कोशिश की कि मैं न ही आऊँ। मैं जब क्लीनिक के पास पहुंचा तो उन्होंने दूर में ही अपना स्टाफ भेज के कोविड-19 परीक्षण किया’।

ये बात अलग है कि उनकी सैंपल रिपोर्ट नेगेटिव आई। पाल ने कहा कि निजी लैब में सैंपल टेस्ट (covid-19) बहुत महंगा है। 45,00 रुपए एक टेस्ट के लिए जा रहे हैं, जो सभी के लिए कम नहीं है। साथ ही डॉक्टर अन्य बीमारी का ईलाज करने के लिए भी भाग रहे हैं। एक डॉक्टर उन्होंने पता किया तो वह घर पर ही गेट पर ताला लगा के बैठे हैं। लोगों को बोला है कि बाहर हैं। वह मरीज सिर्फ फोन पर या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंस में देखने को तैयार हैं।

पाल के मुताबिक सरकार को चाहिए कि डॉक्टरों को अपने पेशे के प्रति ईमानदारी से काम करने के लिए प्रेरित करें वरना सख्ती अपनाएं। ये नहीं भूलना चाहिए कि आज भी कोरोना मरीजों से ज्यादा लोग टीबी से मर रहे हैं। खास बात ये है कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत खुद दो बार डॉक्टरों से अपील कर चुके हैं कि वे ओपीडी चलाएं। मरीजों को ईलाज करना शुरू करें।

इसके बावजूद तमाम डॉक्टर घर बैठे हुए हैं। इससे सामान्य बीमारी से पीड़ित लोग बहुत परेशान हैं। हिमालयन अस्पताल जौली ग्रांट और सिनर्जी अस्पताल के बारे में पता चला है कि वे अपनी ओपीडी चालू रखे हुए हैं।  

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