कोरोना संकटकाल में चुनौती भरे महकमे संभाले हुए हैं

ACS मनीषा पँवार एक बार फिर नजरंदाज

PWD हटना ओमप्रकाश के मुख्य सचिव बनने का ईशारा!

विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष बनेंगे CS उत्पल!

Chetan Gurung

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने 16 IAS अफसरों को इधर-उधर तो किया लेकिन उनके इस फैसले से माटी पुत्र (उत्तराखंडी) लॉबी में भीतर ही भीतर असंतोष छा गया है। फेरबदल में ACS होने के बावजूद मनीषा पँवार पूरी तरह नजर अंदाज की गईं। कुछ तबादलों पर सरकार सवालों के घेरे में है। इस सबके बीच ये ईशारा हवा में तैर रहा है कि ओमप्रकाश की बतौर मुख्य सचिव ताजपोशी की तैयारी शुरू हो गई है। उनसे PWD महकमा हटाना इसका संकेत माना जा रहा है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह जुलाई में विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष बनाए जाएंगे, ये तय है।

शैलेश बगौली:खामोशी से काम

हैरानी इस पर भी है कि सरकार ने ऐन कोरोना महामारी के बीच सचिव नितेश झा को स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा से हटा दिया। ये कदम तब नहीं उठाया गया जब वह खुद हटना चाहते थे। हालांकि  अंदरखाने कहा जा रहा है कि नितेश ने खुद ही स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा महकमे को छोड़ा है। ऐसा है तो फिर सरकार ने उनकी इच्छा का पालन तो किया लेकिन गलत वक्त पर। अब नए स्वास्थ्य-चिकित्सा शिक्षा सचिव अमित सिंह नेगी के लिए कोरोना पर काम करना आसान नहीं होगा। उनको पहले तो पूरा सिस्टम जड़ से समझना होगा।

अमित सिंह नेगी:कोरोना संकटकाल में स्वास्थ्य का जिम्मा

इसमें वक्त लगता है। ऐसे आपात काल में वक्त की बहुत अहमियत है। ये भी नहीं कहा जा सकता है कि नितेश की कार्य क्षमता या दक्षता से सरकार संतुष्ट नहीं है। उनको पेयजल, सिंचाई और लघु सिंचाई दिया गया है। गृह और आवास सचिव भी वही हैं। लिहाजा ये साफ होता है कि सरकार को उन पर पूरा विश्वास है। अमित जैसा ही बर्ताव सचिव शैलेश बगौली के साथ हुआ। उनसे परिवहन आयुक्त की अहम कुर्सी ले ली गई। बदले में बेहद चुनौती भरा आपदा प्रबंधन दे दिया गया।

ये महकमा अमित देख रहे थे। काफी कुशल तरीके से। बगौली पहले ही प्रवासियों को सुरक्षित लाने की अहम और रूखी ज़िम्मेदारी में घिरे हुए हैं। देहरादून मूल वाले नेगी और पिथौरागढ़ के बगौली-अरविंद सिंह ह्यांकी को सरकार के काबिल और लोकप्रिय नौकरशाहों में शुमार किया जाता है। अरविंद ह्यांकी को अचानक कुमायूं का आयुक्त बना दिया गया। उनकी छवि और सादगी की मिसाल दी जाती है। सूत्रों के मुताबिक वह शासन में रमे हुए थे।

अगले मुख्य सचिव तय! शक्तिमान ACS ओमप्रकाश

वन, पर्यावरण,पेयजल महकमे को वह भली-भांति संभाले हुए थे। कुमायूं आयुक्त के तौर पर जाने की उनकी कोई इच्छा नहीं थी। ऐसा उनके करीबी बताते हैं। हकीकत ये है कि आज के दौर में कम ही नौकरशाह ऐसे हैं जो कुमायूं के आयुक्त बनना पसंद कर रहे हैं। इस कुर्सी की प्रतिष्ठा काफी नीचे आ चुकी है। जिलाधिकारी महज कहने को उनके मातहत हैं। सच एकदम जुदा है। ज़्यादातर कलेक्टर सिर्फ CMO की सुनते हैं।

धमाकेदार वापसी:आरके सुधांशु

फेरबदल में अगर किसी की मुख्य धारा में धमाकेदार वापसी हुई तो वह सचिव आरके सुधांशु हैं। PWD हमेशा ही मुख्यमंत्री के बेहद विश्वासपात्र नौकरशाह के पास रहा है। राज्यपाल के सचिव की ज़िम्मेदारी से हटने के बाद सुधांशु के पास काम के नाम पर अधिक कुछ नहीं था। वह सुर्खियों में हैं। इसलिए कि PWD उनको शक्तिमान ACS ओमप्रकाश के महकमों से कट के मिला है। ओमप्रकाश से इतना अहम महकमा हटाए जाने का मतलब साफ है। उनको अब मुख्य सचिव की ज़िम्मेदारी संभालने की तैयारी करनी है।

नितेश झा:कोरोना महामारी के दौरान ही स्वास्थ्य सचिव की ज़िम्मेदारी से मुक्त

उत्पल कुमार सिंह को जुलाई में रिटायर होना है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष की पोस्ट विज्ञापित हो गई है। वह उसी कुर्सी पर जाएंगे। ये तकरीबन तय है। सुधांशु ओमप्रकाश के करीब के अफसरों में हैं। इस सबके बीच सुनाई न देने वाला शक्तिशाली शोर ये है कि एक ही लॉबी के पास अधिकांश अहम महकमे चले गए हैं। ये भी कि माटी पुत्रों की उपेक्षा की गई। इस शोर के बीच मनीषा पँवार और सचिव एल फैनाई की तरफ किसी का ध्यान ही नहीं गया।

मनीषा हो या फैनाई। दोनों की प्रतिष्ठा अच्छी है। मनीषा ने जिंदगी में ज़्यादातर नौकरी देहरादून और उत्तराखंड में ही की है। यहीं की पली-बढ़ी-पढ़ी हैं। उत्तराखंड को बहुत अच्छे से समझती हैं। सही मायने में वह भी माटीपुत्री हैं। उम्मीद थी कि उनको ACS बन जाने के बाद बड़ी जिम्मेदारियाँ दी जाएंगी। फेरबदल में उनको अछूता रखा जाना ताज्जुब पैदा कर गया। उनके पास औद्योगिक विकास विभाग है।

एक पूर्व मुख्य सचिव ने `Newsspace’ से कहा, `मनीषा की काबलियत और वरिष्ठता का इस्तेमाल सरकार को करना चाहिए। औद्योगिक पैकेज की समाप्ति के बाद इस महकमे की अहमियत बहुत कम हो चुकी है। वह बेहतर और बड़े महकमों को संभालने की कुव्वत रखती हैं। हकदार हैं’। एक अन्य पूर्व मुख्य सचिव ने फेरबदल पर `Newsspace’ से कहा, `महकमों के बंटवारे में संतुलन का घोर अभाव दिखता है। इस तरह के तबादले सरकार के काम की रफ्तार को और धीरे करेंगे’।

देखना होगा कि आने वाले हफ्तों में मुख्यमंत्री अपनी फैसलों की पुनर्समीक्षा करते हैं या नहीं। इस पर नजर रहेगी कि क्या वह महकमों के बँटवारों में असंतुलन को दूर करने की कोशिश करेंगे? इस बीच ये खबर भी है कि उत्तराखंड मूल के नौकरशाह फेरबदल के फैसलों को खुद की उपेक्षा से जोड़ कर आपस में इस संबंध में चर्चा कर रहे हैं। वे सरकार से इस बारे में अपनी बात रखेंगे या नहीं, ये अभी तय नहीं है।

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