बुनियादी सुविधाएं भी हैं और सुरक्षित भी, एकदम खाली पड़े हैं

Chetan Gurung

सरकार ने जो संस्थागत कोरेंटिन सेंटर्स बनाए हैं, उनकी बदहाली छिपी नहीं है। हैरानी इस बात पर है कि देहरादून में इस तरह के कोरेंटिन सेंटर्स के लिए तमाम विकल्प सरकार के सामने हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

देहरादून में कोरेंटिन सेंटर्स के लिए जगह की कमी सरकार के लिए बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए। उसके पास अपने ही संसाधन इतने अधिक हैं कि उसको कहीं बाहर मुंह ताकने की जरूरत ही नहीं है। राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम का कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इसको वैसे भी सरकार ने तकरीबन मुफ्त में IL and FS को लीज पर दिया हुआ है।

इस स्टेडियम को संस्थागत कोरेंटिन के लिए अधिग्रहित किया जा सकता है। खास तौर पर जो लोग विमानों से आ रहे हैं, उनके लिए तो ये और मुफीद है। जौली ग्रांट हवाई अड्डे से आते समय ये रास्ते में शहर के एक किनारे है। यहाँ न सिर्फ तमाम बड़े-बड़े हाल और कमरे हैं बल्कि किचन, पर्याप्त टाइलेट्स और जरूरी खुला वातावरण भी है।

स्टेडियम की क्षमता भी बहुत ज्यादा है। यहाँ काफी तादाद में लोगों को कोरेंटिन किया जा सकता है। बीजापुर गेस्ट हाउस, रेसकोर्स का ओफिसर्स गेस्ट हाउस, सर्किट हाउस एनेक्सी सब खाली हैं। आने वाले दिनों में भी यहाँ किसी वीवीआईपी के आने की उम्मीद नहीं है। इन भवनों को अधिग्रहित कर उनका इस्तेमाल कोरेंटिन सेंटर के लिए किया जा सकता है।

इसके साथ ही तमाम आईटीआई या पोलिटेक्निक संस्थान भी हैं। वहाँ भी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सरकार उनका इस्तेमाल क्यों नहीं कर रही, इस पर ताज्जुब है। ये सरकारी इमारतें इतनी क्षमता रखती हैं कि सरकार को कहीं और देखने की जरूरत ही नहीं है। इनका इस्तेमाल करने की तरफ सरकार सोच नहीं रही। अन्य जिलों में भी सरकारी भवनों का इस्तेमाल कोरेंटिन सेंटर के लिए करना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

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