सरकार के रुख में उदासीनता या फिर संसाधन नहीं!

विधायक गणेश जोशी,राज्यमंत्री दर्जाधारी भूटिया-CEO तनु जैन से भी मिलीं पॉज़िटिव युवक की माँ

Chetan Gurung

मुझे सुबह-सुबह अपनी कॉलोनी के एक सज्जन का फोन आया। बोले कि उनके बगल वाले घर (कॉमन वॉल) में कोरोना पॉज़िटिव रिपोर्ट वाला युवक है। मुंबई (महाराष्ट्र) से आए हुए 5 दिन हो गए हैं। घबराए हुए उस शख्स ने कहा, युवक की माँ बेटे के कोरेंटिन होने के बावजूद सामान्य रूप से घूम रही। लोगों से मिल रही। ऐसा कैसे मुमकिन? प्रशासन क्या कर रहा? हालात ये है कि स्थानीय विधायक गणेश जोशी, राज्यमंत्री दर्जा वाले टीडी भूटिया, मुख्य कार्यकारी अधिकारी तनु जैन और स्थानीय कैंट बोर्ड सदस्य मेघा भट्ट समेत कई लोग आशंकित हैं। हालांकि, CEO जैन ने कहा कि वह पूरी सतर्कता बरत रही हैं।

मैंने NHM निदेशक और नोडल अफसर (covid-19) युगल किशोर पंत तथा DM डॉ. आशीष श्रीवास्तव को फोन पर जानकारी दी कि अभी तक कोई एंबुलेंस या पुलिस कोरोना पॉज़िटिव को लेने नहीं आई है। लोगों में दहशत है कि युवक के परिवार वाले खुले में घूमे हैं। खुफिया विभाग के लोगों को भी बताया गया। इसके बावजूद तकरीबन 6 घंटे बाद पुलिस और एंबुलेंस हमारी कॉलोनी आई। युवक को अपने साथ ईलाज के लिए ले गए।

उम्मीद है कि युवक जल्दी स्वस्थ हो के लौट आएगा। हिंदुस्तान और उत्तराखंड में ये तथ्य सुकून देने वाला है कि यहाँ पाए जा रहे पॉज़िटिव लोगों के स्वस्थ होने का औसत अच्छा है। बाकी देशों से कहीं बेहतर। शायद गरीबी-संघर्षपूर्ण जीवन और ठोस इच्छा शक्ति से बचपन से ही वास्ता होना इसकी प्रमुख या एक वजह हो। हैरानी और चिंता की बात ये है कि मेरी कॉलोनी के जिस युवक को पुलिस एंबुलेंस में ले गई वह 25 मई को देहरादून आशा रोड़ी पहुंचा था।

वहीं उसका सैंपल लिया गया। उसकी रिपोर्ट आने में 5 दिन लग गए। छठे दिन उसको ईलाज के लिए ले गए। इस बीच देखिये क्या-क्या हुआ? जिस गली में युवक का घर है, वहाँ गर्मी शुरू होते ही पीने का पानी नहीं आ रहा। शिकायत मिलने पर मसूरी विधायक जोशी, राज्यमंत्री दर्जा वाले भूटिया, CEO तनु जैन, स्थानीय वार्ड मेम्बर मेघा और पूर्व कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष तथा बीजेपी नेता बिष्णु प्रसाद के साथ ही स्थानीय नेता गुफ़ी डंगवाल गली में 3 दिन पहले पहुंचे थे।

उन्होंने गली में जिनके घर थे, उनसे पानी की दिक्कत के बारे में बात की। कोरोना पॉज़िटिव युवक की माँ भी उनसे मुलाक़ात और बात करने वालों में शुमार थीं। अब भीड़ में कौन-किसके संपर्क में आया या नहीं आया, साफ कहने की सूरत में कोई नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक युवक के संपर्क में अगर उसकी माँ भी रही है तो फिर स्थिति खतरनाक हो सकती है। उसकी माँ लगातार कई लोगों से घुली-मिली है।  

युवक के पॉज़िटिव पाए जाने के बाद घर को कोरेंटिन किया गया, लेकिन पुलिस निरंतर नजर रखने नहीं आई। न ही घर की दीवार पर कोई नोटिस ही चस्पा किया कि यह घर कोरेंटिन किया गया है। अब लोग दहशत में हैं। वे इसलिए भी परेशान हैं कि युवक की माँ का सैंपल आज भी नहीं लिया गया है। इस बारे में सचिव और प्रवासियों को सुरक्षित लाने के इंचार्ज सचिव शैलेश बगौली से भी बात हुई।

उन्होंने कहा कि वह इस बाबत संबन्धित अफसरों को निर्देशित करेंगे। सवाल ये है कि पॉज़िटिव केस होने की रिपोर्ट मिलने के बावजूद आखिर प्रशासन को इतना वक्त जरूरी-अनिवार्य कदम उठाने में क्यों और कैसे लग रहा है? क्यों कोरेंटिन लोगों और उनके घर वालों पर पैनी नजर नहीं रखी जा रही है? प्रशासन की लापरवाही सिर्फ और सिर्फ लोगों की जान को खतरे में ही डाल रही। लोगों को डर-डर के जीने को मजबूर कर रही।

Covid-19 ऑपरेशन से मुताल्लिक एक अफसर के मुताबिक देहरादून में बहुत अधिक पॉज़िटिव केस सामने आ रहे हैं। प्रशासन के लिए फटाफट सभी को एंबुलेंस और स्टाफ मुहैया कराना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। इससे ये सवाल उठ खड़ा होता है कि क्या सरकार के पास जरूरी और बुनियादी संसाधनों के लिए पैसा नहीं है या सोच-विचार नहीं? PM और CM केयर में लोग करोड़ों-अरबों दान दे रहे हैं। देश को कोरोना से लड़ने के लिए शक्तिशाली बनाने के लिए। फिर कैसे संसाधनों की कमी सामने आ रही है?

1 COMMENT

  1. आप सभी पत्रकार बंधुओं को “पत्रकारिता दिवस’ कि हार्दिक बधाई..आप के अथक प्रयास एवं तत्काल खबर से तुरंत जानकारी देने के लिए ए सधन्यवाद एवं ढेर सारी शुभकामनाएं..!

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