अध्यक्ष खामोश, सचिव विवादित, कोषाध्यक्ष बिना बिल भुगतान को राजी नहीं

14 जून को बुलाई आपातकालीन एपेक्स काउंसिल की VC बैठक

कोरोना संकट के कारण प्रभावित अगले क्रिकेट सीजन पर होगा मंथन

नए स्टाफ और पेशेवरों की नियुक्तियों पर भी होगी चर्चा

Chetan Gurung

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) में अध्यक्ष की चुप्पी और सचिव-कोषाध्यक्ष में बिलों और भुगतान को ले कर तनातनी का खामियाजा CEO-GM-प्रशिक्षक के साथ ही अन्य सहयोगी स्टाफ भुगत रहे हैं। 14 जून को एसोसिएशन की एपेक्स बॉडी की आपात बैठक में कोरोना के कारण अगले क्रिकेट सीजन पर मंडरा रहे खतरे के साथ ही भुगतानों और तनख्वाह को भी एजेंडा में शामिल किया गया है।

उत्तराखंड को BCCI की मान्यता मिलने के बाद अभी पहली सालगिरह भी बहुत दूर है। इसके बावजूद देश भर में सबसे बदनाम और गलत कारणों से चर्चित एसोसिएशन सिर्फ CAU है। चर्चा है कि ये ऐसी एसोसिएशन है, जिसके अध्यक्ष मीडिया के लोगों के तो दूर अपनी एसोसिएशन के ओहदेदारों के फोन तक नहीं उठाया करते हैं। वह एसोसिएशन में हो रहे आपसी विवादों-झगड़ों को दूर करने की कोशिश करते भी नहीं दिखते हैं। परमहंस की मुद्रा में दिखाई देते हैं।

कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी इस बात पर अडिग हैं कि वह कोई भी भुगतान तब तक नहीं करेंगे, जब तक उनके सामने बिल पेश नहीं होगा। कार्य और नियुक्तियों के वाजिब दस्तावेज़ सामने नहीं होंगे। सचिव माहिम वर्मा कोषाध्यक्ष की एक भी वाजिब शर्तों को पूरा करने में खुद को नाकाबिल पा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अधिकांश नियुक्तियों को ले के जबर्दस्त लोचा है। चाहे वह CEO अमृत माथुर या प्रशिक्षक और GM की नियुक्ति का मामला हो या फिर फिजियोथेरेपिस्ट का।

सूत्रों के मुताबिक रेवाड़ी बांटने की तरह लाखों रुपए तनख्वाह वाली कुर्सियाँ बादशाहों की तरह बाँट दी गई। खास बात ये है कि जिनकी भी तनख्वाह रुकी हैं, वे सभी एक ही लॉबी की मनमर्जी से नियुक्त किए गए। इसके लिए कोई भी जरूरी औपचारिकताएँ पूरी नहीं की गई। एक ओहदेदार के अनुसार CEO के तौर पर माथुर की नियुक्ति पर भी पेच है। उनको सलाहकार के तौर पर लाया गया था। बाद में उनको किसने और किस आधार पर सीधे CEO बना दिया, फ़ाइल में कहीं नहीं है।  

जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री रहने के बावजूद ED-CBI जांच के फंदे में हैं। CAU के एक ओहदेदार के मुताबिक किसी के कहने या दबाव में गलत कार्यों को समर्थन देने का जोखिम लेना पाँव पर कुल्हाड़ी मारना होगा। वैसे भी विनोद राय की अध्यक्षता वाली CoA ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी जो रिपोर्ट जमा की है, उसमें कई सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं।उस रिपोर्ट में माहिम के BCCI में चुने जाने के सूरत में एतराज था तो ये भी कहा गया था कि CAU के चुनाव पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला के प्रभाव में कराए गए।

CAU में किस कदर बेहाली है, इसको समझने के लिए इतना काफी है कि आज तक लोकपाल (HC का पूर्व CJ या फिर SC के जस्टिस) और आचरण अधिकारी (HC के पूर्व जस्टिस) की नियुक्ति की गई है। दो दर्जन से अधिक समितियों का गठन अभी तक नहीं किया जा सका है। माहिम सीएयू को मान्यता मिलने के बाद पहले सचिव बने, इस्तीफा दे के बीसीसीआई गए, वहाँ से फिर इस्तीफा दे के सीएयू सचिव का चुनाव लड़ा और फिर सचिव बन गए। इसके बावजूद उत्तराखंड क्रिकेट आज लगातार जमींडोज़ हो रही है।

भरी-पूरी सीएयू से बेहतर पिछले साल अमित पांडे और दिनेश शर्मा ने पूरी उत्तराखंड क्रिकेट को चला के दिखाया था। तब रणजी टीम नॉक आउट राउंड में भी पहुंची। इस साल नॉक आउट राउंड में टीम तबाही भरा प्रदर्शन कर के फिर प्लेट ग्रुप में लौट आई। एपेक्स की बैठक दोपहर 2 बजे से है। कोविड-19 के कारण बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये होगी। बैठक में अगले सीजन में नई नियुक्तियों और मौजूदा पेशेवरों में से कुछ के करार को आगे बढ़ाने पर भी विचार होगा।

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