देहरादून में सबसे ज्यादा 35 पाए गए

सख्ती भी कर ली, युक्ति भी देख ली, कोरोना चढ़ता जा रहा पहाड़

Chetan Gurung

उत्तराखंड में कोरोना ने आज 2000 का आंकड़ा पार करते हुए 2023 के स्कोर को स्पर्श कर लिया। सुबह देहरादून में 8 पॉज़िटिव निकले लेकिन रात तक 27 केस और सिर्फ देहरादून से निकल आए। चिंता इस बात की है कि सरकार की तमाम कोशिशें-रणनीति भी कोरोना को पहाड़ चढ़ने से नहीं रोक पा रही है।

कोई भी दिन अब ऐसा नहीं जा रहा जब भारी तादाद में कोरोना पॉज़िटिव केस सामने न आ रहे हों। अब तक 26 कोरोना पॉज़िटिव की मृत्यु भी हो चुकी है। उत्तराखंड सरीखे छोटे से पहाड़ी राज्य के लिए अब तक के आंकड़े निस्संदेह भयभीत करने वाले कहे जा सकते हैं। संकट इस बात का है कि सरकार के तमाम प्रयासों को कोई पुख्ता फल मिलता नहीं दिख रहा।

कोरोना संक्रमितों की तादाद तो बढ़ती ही जा रही है, लेकिन कोविड-19 वाइरस का पहाड़ों पर भी चढ़ाई कर देना बहुत ही सोचनीय है। अभी तो सैंपलिंग की रफ्तार संतोषजनक भी नहीं है। फिर भी तकरीबन 5000 सैंपल के नतीजे अभी आने बचे हैं। आज 24 लोग ठीक भी हुए। 1254 लोग अब तक डिस्चार्ज किए जा चुके हैं।

11175 लोग कोविड केयर सेंटर में हैं। 26 लोग जीवन-मृत्यु के संघर्ष में हार गए। आज जो लोग पॉज़िटिव पाए गए, उनमें देहरादून शीर्ष पर है। अल्मोड़ा में देहरादून के बाद दूसरे नंबर पर 14 केस सामने आए। आज पॉज़िटिव पाए गए अधिकांश केस प्रवासियों से ताल्लुक रखते हैं। खतरे की बात ये है कि पहाड़ों में अब कोरोना अच्छे ढंग से पहुँच चुका है। आने वाले दिनों में ये पहाड़ के लिए घातक किस्म का सिर दर्द न बन जाए।

कोरोना केस बढ़ते जा रहे, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों ने लॉक डाउन ऐसे खोल दिया, मानो कोरोना को मार भगाया जा चुका है। दिन में बाजार की तरफ निकलें तो कोरोना प्रभाव दूर-दूर तक नहीं दिखता है। सरकारें सिर्फ मास्क पहनो-हाथ धोते रहो और दूरी बना के रखो में सिमट के रह गई है। मानो कोरोना का यही अचूक राम बाण ईलाज है। इस बीच अस्पतालों और प्रबंधन की लापरवाही का गज़ब नजारा भी सामने आता जा रहा है।

जिन दो भाई-बहनों को दून अस्पताल में एक साथ रखा गया था, उनमें अब बहन भी पॉज़िटिव हो गई है। `Newsspace’ में इस महा चूक की पोल खुली तो स्वास्थ्य विभाग ने और गज़ब कर दिया। दोनों भाई-बहनों को पहले तो कोरोनेशन अस्पताल ले गए। वहाँ भाई को तो भर्ती कर दिया, लेकिन बहन को कोविड केयर सेंटर भेज दिया। अब कोरोनेशन के स्टाफ और डॉक्टर सहमे हुए हैं कि आखिर क्यों भाई को अस्पताल में भर्ती कर दिया गया।

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