उत्तराखंड क्रिकेट:वित्तीय लेन-देन-नियुक्तियों-मनमानियों पर छिड़ा महासमर

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उपाध्यक्ष संजय रावत, `खिलाड़ियों की बर्बादी देखने वाले मुर्दा लाश-CAU में गड़बड़ घोटाला’

सोशल मीडिया में लिखा, `जो डराए (सीएयू वाले) उसको मेरा नंबर दे देना

CEO अमृत माथुर-चयनकर्ता निष्ठा फ़रासी समेत तमाम पेशेवरों की नियुक्तियों पर कोषाध्यक्ष का एतराज

डिप्टी AG योगेश अग्रवाल:मेरे से कभी कोई चर्चा नहीं हुई,कोई फ़ाइल मुझे नहीं दिखाई

करोड़ों के भुगतानों पर SBI मुख्य शाखा-BCCI की भी भूमिका पर अंगुली  

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट में वित्तीय लेन-देन और नियुक्तियों को ले कर भूचाल आ गया है। करोड़ों के भुगतान के मामले में BCCI के साथ ही SBI की मुख्य शाखा की जबर्दस्त लापरवाही भी सामने आई है। इस मामले को Deputy AG (एपेक्स काउंसिल में सुप्रीम कोर्ट के कारण सदस्य) योगेश अग्रवाल ने ये कह कर गर्मा दिया है कि उनके पास आज तक कोई फाइल न तो आई न ही उनसे वित्तीय मामलों को ले कर कोई चर्चा क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखण्ड के जिम्मेदार ओहदेदारों ने की। इस बीच CAU के उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री के भतीजे संजय रावत ने सोशल मीडिया में साफ-साफ ईशारा कर दिया है कि सीएयू में सब कुछ गड़बड़ है। जो क्रिकेटरों की बर्बादी को खामोशी से देख रहे, वे मुर्दा लाश हैं। अगर इन धांधलियों को सामने लाने पर किसी को कोई धमका रहा तो उसको मेरा नंबर दे दें।

BCCI पर आरोप है कि उसने बिना कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी के दस्तखतों के ही तकरीबन पौन चार करोड़ के भुगतान कर दिए। सूत्रों के अनुसार नेगी ने बोर्ड के AGM (वित्त) से बात कर के कड़ा एतराज भी जताया कि वह बिना कोषाध्यक्ष की मंजूरी के भुगतान कैसे कर रहे हैं। कल अगर कुछ गड़बड़ी होती है तो BCCI ही इसके लिए जिम्मेदार होगा। इसके बाद बोर्ड ने आगे का भुगतान खुद नहीं किया। उसने CAU के देहरादून स्थित SBI मुख्य शाखा में पैसे ट्रांसफर कर दिए।

CAU के एक ओहदेदार ने `Newsspace’ से कहा, बीच में तकरीबन पाँच महीने माहिम वर्मा CAU सचिव से हट के BCCI में चले गए थे। बैंक में दस्तखत के लिए अध्यक्ष,सचिव और कोषाध्यक्ष अधिकृत हैं। माहिम के हटने के बाद उनकी दस्तखत करने संबंधी वैधता खुद ही खत्म हो गई। वह दुबारा फिर CAU लौटे और फरवरी में फिर सचिव बने। उनके दस्तखत और नाम के बारे में बैंक को कोई विधिवत जानकारी नहीं दी गई है। इसके बावजूद बैंक ने करोड़ों के भुगतान CAU को माहिम के दस्तखत के आधार पर कर दिए और किए जा रहा है।

कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी:बिना बिल देखे दस्तखत नहीं करूंगा

CAU का हाल ये है कि पेशेवरों की नियुक्ति संयुक्त सचिव रहने के दौरान माहिम ने ही कर दी। नियुक्ति का अधिकार सिर्फ सचिव को है। कई नियुक्तियाँ ऐसी भी की गई, जिसमें CAU और पेशेवर के बीच का करार पहले हो गया, नियुक्ति बाद में की गई। CEO अमृत माथुर का मामला और गज़ब का है। उनको BCCI से उत्तराखंड को मान्यता मिलने पर शुरू में एक महीने के लिए सलाहकार के तौर पर लाया गया। फिर 31 दिसंबर तक (3 महीने के लिए) का सेवा विस्तार दिया गया। इसके बाद उनको न तो सेवा विस्तार दिया गया न ही कोई नई नियुक्ति उनकी की गई है। इसके बावजूद वह CEO बने हुए हैं।

सीईओ की नियुक्ति पर अंगुली:अमृत माथुर

एक प्रमुख पदाधिकारी ने इस पर कहा कि अगर माथुर की नियुक्ति विधिवत फिर से हुई है या फिर पुराने अनुबंध को आगे बढ़ाया गया है तो फिर एपेक्स काउंसिल के सामने इसको क्यों नहीं लाया गया? पेशेवरों की नियुक्तियों में इतने पेंच क्यों हैं? निष्ठा फ़रासी की नियुक्ति पर खुद कोषाध्यक्ष ने ही कई मुद्दे उठाते हुए एतराज जताया है। उनकी तरफ से माथुर और निष्ठा की नियुक्ति को ले कर एसोसिएशन के अध्यक्ष को कड़ा पत्र लिखा गया है। इसमें नियुक्तियों को ले कर चल रही धांधली या लापरवाही की पोल खोली गई है।

न देखुंगा, न सुनुंगा न बोलूँगा:अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला

निष्ठा को ले कर एतराज जताया गया है कि वह भारत सरकार की कर्मचारी है। इसके बावजूद उसके महकमे से अभी तक कोई NOC नहीं ली गई। सीधे ही चयनकर्ता नियुक्त कर दिया गया। इस मामले में CEO से भी कोई सत्यापन उनकी नियुक्ति को ले कर नहीं किया गया है। माहिम की तरफ से जारी कई नियुक्ति पत्रों में न तो पत्रांक है न ही तारीख। इससे ये साफ नहीं हो रहा है कि करार कब से कब तक है। करार में भी सिर्फ एक पक्ष के दस्तखत हैं। जो नियम विरुद्ध हैं।

लगातार गंभीर विवादों में:सचिव माहिम वर्मा

बात यहीं खत्म नहीं हो रही। CAU में नियुक्तियों-मनमानियों-धांधलियों के खिलाफ सोशल मीडिया (FB-whatsapp) पर सिर्फ खिलाड़ी या अन्य लोग सामने नहीं आ रहे हैं। एसोसिएशन के दमदार उपाध्यक्ष संजय रावत खुद भी खुल के आ गए हैं। खरा और बेलौस बोलने वाले संजय ने FB पर किसी संजय सिंह की वॉल पर लिखा है। जो लोग खिलाड़ियों की नाइंसाफी के खिलाफ खामोश हैं, वे जिंदा लाश हैं। अगर कोई किसी को धमका के क्रिकेट में गड़बड़ियों को सामने नहीं लाने देना चाहता है, तो उसको मेरा फोन नंबर दे दिया जाए। डरो मत, खुल के लिखें। उन्होंने कई पेशेवरों को फिर नियुक्ति देने के फैसले पर कहा कि इन लोगों ने पिछले सीजन में उत्तराखंड की भद पिटवा दी।

उपाध्यक्ष संजय रावत:गलत हरकतों के खिलाफ खुल के मैदान में

संजय ने पोस्ट में अपने नाम राशि से ये भी कहा कि जो धमकाए उसकी कॉल रेकॉर्ड कर के मुझे भेज दो। मेरी सरपरस्ती में तुम महफूज हो। उन्होंने पेशेवरों को बनाए रखने के लिए लिखा है, गड़बड़-घोटाला है ये। CAU के ही संस्थापक सदस्य ओमप्रकाश सूदी ने भी इसी वॉल पर लिखा है कि संजय रावत योद्धा हैं। सबको एक हो कर उत्तराखंड क्रिकेट को ऊंचा उठाना है। संजय भी उन तीन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने एजेंडा लीक हो जाने के कारण हाल की एपेक्स काउंसिल की बैठक का बहिष्कार किया था।

पृथ्वी नेगी और संयुक्त सचिव अवनीश वर्मा भी बैठक में शरीक नहीं हुए थे। इस पर सचिव वर्मा ने टिप्पणी की थी कि किसी के बैठक में आने या न आने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। बैठक में पूर्व क्रिकेटर ज्ञानेन्द्र पांडे भी थे, जिनको BCCI ने सीधे उत्तराखंड एपेक्स काउंसिल का सदस्य बना दिया। इसके पीछे UP लॉबी का हाथ बताया जाता है। काउंसिल में AG ऑफिस से डिप्टी AG योगेश अग्रवाल भी सदस्य हैं। उनका काम वित्तीय मामलों में एक किस्म से CAU को सलाह देना और लेन-देन के मामलों में गड़बड़ी रोकना है।

 `Newsspace’ के पूछे जाने पर उन्होंने कहा, `मेरे पास न तो कोई फ़ाइल कभी सलाह के लिए भेजी गई न ही उनके साथ कोई भी चर्चा वित्त संबंधी की जाती है। जो भी हो रहा है, वह CAU खुद अपने स्तर पर कर रहा है। उसके अपने चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। वही देख रहे हैं। मुझे नहीं पता कि करोड़ों के बिलों के भुगतान हुए हैं या फिर भुगतान बगैर जरूरी औपचारिकताओं के कर दिए गए’। 

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नीचे FB पर संजय रावत और संजय सिंह (क्रिकेटर) के बीच की बातचीत के अंश…..

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Sanjay Rawat मरना अच्छा है मुर्दा होने से…….
.हक के लिए लड़ना चाहिए यदि हमारा हक है तो ……..क्या फायदा मुर्दों की तरह जीने से

  •  संजय सिंह Sanjay Rawat हक के लिए तो लड़ना चाहिए सर
  •  Sanjay Rawat संजय सिंह तभी तो बोल रहा हूँ डरो मत खुल के लिखो ……..जो डराए उसे मेरा नंबर देना
  •  Sanjay Rawat और बातें रिकॉर्ड करो मुझे भेजो वो……..यहां इस लिए लिख रहा हूँ कि तुम महफूज हो मेरी सरपरस्ती में………..धमकाने वालों को भी देखते हैं कितना दूध पिया है उन्होंने
  •  Sanjay Rawat जिंदा हो तो जिंदा नजर आना भी जरूरी है ……..मुर्दों पे सिर्फ कसफ़न डाले जाते हैं……..सपने हक के लिए सिर्फ जिंदा लड़ते हैं …………बहुत सारे लोग मेरे तुम्हारे कॉमेंट पढ़ रहे होंगे ……..ये मुर्दा है जिंदा लाश …………..अपनी बर्बादी उत्तराखंड के खिलाड़ियों की बर्बादी देख के मुर्दा लाश की तरह ठंडे पड़े है ………….ये लाश ही तो हैं

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