स्वास्थ्य-आयुष महकमा इस बारे में फिलहाल कन्नी काट रहे

NIMS ने हाथ खींचे:सिर्फ 100 लक्षणविहीन केसों पर किया था परीक्षण

Chetan Gurung

इसको बाबा रामदेव का त्रिवेन्द्र सरकार पर गहरा रसूख कह सकते हैं। देश-दुनिया में पतंजलि की महामारी कोरोना ठीक करने संबंधी विवादित खोज Coronil दवा को ले कर बवाल है। अन्य राज्यों ने इसकी बिक्री पर रोक लगाना शुरू कर दिया है। जिस राज्य उत्तराखंड में इसकी खोज हुई और निर्माण हुआ, वहाँ फिलहाल इसकी बिक्री पर रोक का कोई विचार नहीं है। स्वास्थ्य सचिव और आयुष सचिव का इस बारे में `Newsspace’ से एक जैसा कहना है, `इस बारे में फिलहाल कोई फैसला अभी नहीं किया गया है’।

कोरोनिल को ले कर दिलचस्प पहलू ये है कि NIMS जयपुर ने विवाद भड़कने के बाद अब कह दिया है कि उसके अस्पताल में सिर्फ 100 और बिना लक्षण वालों पर ही इसका परीक्षण किया गया था। मेरठ-गाजियाबाद में जो परीक्षण हुए हैं, उसके बारे में वह कुछ नहीं जानता है। NIMS के साथ मिल के ही पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट ने कोरोना दावा ईजाद की है।

कोरोनिल को ले के बवाल इसलिए भी है कि खुद केन्द्रीय और राज्य आयुष मंत्रालय ने कहा कि कोरोना के ईलाज के नाम से दवा बनाने की अनुमति ली ही नहीं गई है। सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा बनाने की मंजूरी ली। महाराष्ट्र और NIMS जिस राजस्थान में है, वहाँ भी इस दवा की बिक्री पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन उत्तराखंड सरकार की हिम्मत नहीं हो रही कि वह भी कुछ सख्त कदम इस बारे में उठा ले।

स्वास्थ्य सचिव अमित सिंह नेगी ने कहा कि इस बारे में आयुष मंत्रालय ही फैसला कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकार और कार्य क्षेत्र से ये बाहर है। आयुष सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि इस बारे में पूरी रिपोर्ट का इंतजार करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। दोनों सचिवों के जवाब का लब्बो-लुआब यही है कि दवा अगर उत्तराखंड में बेची जाती है, तो उस पर अभी कोई रोक नहीं है।

राज्य सरकार पतंजलि पर ऐसी कोई कार्रवाई भी नहीं कर पा रही है, जिससे ये लगे कि पतंजलि पर उसको अंधेरे में रखने के लिए दंडित ही किया जा सके। उत्तराखंड सरकार से उसने कोरोना की दवा के निर्माण के बारे में मंजूरी ली ही नहीं गई। इसकी संभावना है भी नहीं कि पतंजलि या फिर रामदेव और कंपनी के सीईओ आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ राज्य सरकार कुछ कार्रवाई करेगी।

बीजेपी ने जब भी उत्तराखंड में राज किया, रामदेव-बालकृष्ण-पतंजलि को हमेशा पूरी मदद सरकार से मिली। ये बात दीगर है कि कभी बालकृष्ण फर्जी पासपोर्ट-शैक्षिक दस्तावेज़ मामले में तो कभी रामदेव-पतंजलि श्रम क़ानूनों के उल्लंघन, दवाओं के निर्माण में विवादित साल्ट मिलाने और खुल के काँग्रेस का विरोध व बीजेपी का समर्थन करने को ले के विवादों में रहे हैं।

दो महीने पहले त्रिवेन्द्र सरकार के बोर्डिंग स्कूलों को खोलने के आदेश के पीछे भी माना गया कि रामदेव के स्कूल आचार्यकुलम को खोलने के लिए ये फैसला किया गया। रामदेव और पतंजलि के कोरोना दवाई को ले कर विवाद भड़कने और NIMS के बैक आउट करने के बाद अब दोनों के सुर भी बदले हुए से हैं। वे इस विवाद के लिए बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों की साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। साथ ही ये भी कह रहे हैं कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर मीडिया पेश कर रहा है।  

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