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अच्छी बात:हरीश रावत ने त्रिवेन्द्र की सुनी और पाई तारीफ

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पूर्व CM ने किया CM की गुजारिश पर कार्यक्रम स्थगित

Chetan Gurung

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज पूर्व सीएम और काँग्रेस के आला नेताओं में शुमार हरीश रावत का आभार जताया कि उनकी गुजारिश पर उन्होंने अपने सियासी कार्यक्रम स्थगित कर दिए। सियासत में ऐसे पल विरले ही आते हैं जब सरकार के मुखिया और विपक्ष के सबसे बड़े नेता एक-दूसरे की बातों को सम्मान दें।

हरीश विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर लड़ने के बावजूद विधायक नहीं बन सके। फिर भी इसमें कोई शक नहीं है कि उनका कद आज भी कहीं से कम नहीं हुआ है। उनको आज भी काँग्रेस के सबसे लोकप्रिय और बड़े नेता जैसी तवज्जो और वजन मिलता है। सरकार के खिलाफ काँग्रेस के राज्य के शीर्ष नेता जहां खामोश से दिखते हैं, हरीश कहीं अधिक सक्रिय और आक्रामकता प्रदर्शित कर रहे हैं।

सरकार को काँग्रेस से नहीं बल्कि सिर्फ हरीश के हमलों से झटके लगते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री न सिर्फ आम लोगों और अवाम की नब्ज जानते हैं बल्कि अपने तड़ातड़ कार्यक्रमों से इन दिनों ऑनलाइन और ऑफलाइन छाए हुए हैं। अखबारों-चैनलों और सोशल मीडिया की सुर्खियां लूट रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उनसे गुजारिश की थी कि कोरोना सरीखे संकट को देखते हुए उनके सरीखे आला काँग्रेस नेता को फिलहाल सियासी कार्यक्रमों से दूरी बनानी चाहिए। इससे प्रदेश का भला होगा। सरकार को कोरोना से लड़ने में अपना ध्यान केन्द्रित करने का अवसर मिलेगा।

हरीश ने त्रिवेन्द्र की बातों का सम्मान करते हुए सारे कार्यक्रम स्थगित कर सभी को चौंका दिया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने आज इस पर पूर्व मुख्यमंट्री का आभार जताया तथा धन्यवाद किया कि आखिर सभी का मकसद फिलहाल कोरोना से लड़ना है। उन्होंने हरीश को सुलझा हुआ नेता करार भी दिया। दो घनी दुश्मन पार्टी के दिग्गजों के इस रवैये को हैरानी से देखा जा रहा है। साथ ही इसको साफ-सुथरी-वैमनस्यता विहीन सियासत भी करार दिया जा रहा है।

दोनों के मध्य वैसे आपसी रिश्ते निजी तौर पर अच्छे समझे जाते हैं। दोनों एक-दूसरे पर कभी भी निजी स्तर पर जा के आरोप लगाने से बचे हैं। हरीश रावत को आम की दावतें देने का शौक है। त्रिवेन्द्र को जब भी बुलाया गया वह उनकी आम पार्टी में जरूर गए। भले इसके लिए उनको पार्टी के अंदर से भी विरोध का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वह किसी की परवाह न कर हरीश के बुलावे को सदा सम्मान देते रहे हैं।

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