CM ने समीक्षा में दिए सिस्टम को और बेहतर करने के निर्देश

शासन की मंजूरी ले के आरोपियों पर विजिलेन्स छापों को मंजूरी

सोशल मीडिया की भी सख्त मॉनिटरिंग होगी

Chetan Gurung

सरकार ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए ट्रैपिंग-विजिलेन्स-इंटेलिजेंस पर फोकस रखने का फैसला किया है। तीनों महकमों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को साफ कहा कि अपनी ज़िम्मेदारी और फर्ज के निर्वहन में बिना हिचके-डरे कार्रवाई होनी चाहिए। इंवेस्टिगेशन पर भी उन्होंने खास तौर पर ज़ोर दिया।

भष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस (यानि भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं) का ऐलान करने वाली त्रिवेन्द्र सरकार विधानसभा चुनाव से पहले अपने सभी किस्म के दाग-धब्बे मिटा डालना चाहती है। इसके लिए वह भ्रष्टाचार उन्मूलन से जुड़े हर महकमे के कील वील दुरुस्त कर लेना चाहती है। आज की बैठक में उन्होंने माना कि सतर्कता अधिष्ठान को ट्रैप एवं  अन्वेषण सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने ट्रैपिंग सिस्टम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। शासन स्तर से महत्वपूर्ण प्रकरणों पर उन्होंने कहा कि गोपनीय जांच के बजाय खुली जांच एवं FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए। बैठक में निदेशक (सतर्कता) को हक दिया गया कि अभिसूचना संकलन एवं संदिग्ध मामलों में स्वतः संज्ञान लें। फिर इसके आधार पर आरोपी के आवासों या अन्य स्थानों पर छापे मारे जाएँ। इसके लिए सिर्फ अपर मुख्य सचिव (सतर्कता) के अनुमोदन की जरूरत होगी।

मुख्यमंत्री इस पर नाराज हुए कि कई महकमे लम्बी अवधि के बाद जांच विजिलेंस को देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि विभाग को प्रकरण विजिलेंस को ट्रांसफर करना है तो यह कार्रवाई एक साल के अन्दर पूर्ण कर जी जाय। प्रत्येक विभाग में विजिलेंस नोडल अफसर एक माह के भीतर अपेक्षित सूचना सतर्कता विभाग को उपलब्ध कराने के लिए उत्तरदायी होंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक राज्य कर्मचारियों को हर साल प्रॉपर्टी रिटर्न अनिवार्य रूप से ऑनलाइन दाखिल करना होगा।

त्रिवेन्द्र ने कहा कि अभिसूचना तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाए। इसके लिए थाना स्तर पर निरंतर समन्वय स्थापित किए जाएँ। राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दें। सीमांत क्षेत्रों के लोगों से निरंतर समन्वय स्थापित किया जाय। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं और वहां इन्फ्रास्टक्चर को विकसित किए जाने को प्राथमिकता दी जाय।

साथ ही केन्द्र सरकार की सीमांत क्षेत्र विकास परियोजना एवं राज्य सरकार की मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना पर फोकस करने पर भी बल दिया गया। सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग के लिए भी सिस्टम को मजबूत बनाने पर ज़ोर दिया गया। लॉ एवं आर्डर की दृष्टि से दुष्प्रचार करने वाले लोगों को चिन्हित कर उनके विरूद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव न्याय प्रेम सिंह खिमाल, सचिव गृह नितेश झा, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, डीजीपी कानून एवं व्यवस्था अशोक कुमार, एडीजी सतर्कता वी विनय कुमार, आईजी अमित सिन्हा उपस्थित थे।

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