एडिटर-प्रबंध संपादक-Edition Incharge-महामंत्री (संगठन) में कोई नहीं पकड़ पाया गलती

Font परिवर्तन में हुई गड़बड़ी,चूक स्वीकार:साकेती

अध्यक्ष पर भी बाणवर्षा की कोशिश,भितरघात का शक एक पूर्व ओहदेदार पर  

Chetan Gurung

BJP के मुखपत्र `देवकमल’ के ताजातरीन अंक ने पार्टी की मिट्टी पलीद तो कर ही दी, साथ ही इस भीषण गलती या भूल को आधार बना के अंदरखाने विरोधियों को निबटाने का खेल चालू हो गया है। पत्रिका से जुड़े तकरीबन सभी जिम्मेदारों ने खुद को इस मामले में खुद को बेदाग दिखाने की कोशिश शुरू कर दी है, लेकिन संपादक राम प्रताप मिश्रा साकेती ने `Newsspace’ से साफ-साफ कहा-`ये गलती Font परिवर्तन के चलते हुई है, लेकिन इसके लिए कोई नहीं सिर्फ मैं जिम्मेदार हूँ। मुझसे अंक छापने के लिए देने से पहले अंतिम नजर मारने में चूक हो गई’।  

उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष बंशीधर भगत:विरोधियों के निशाने पर

देवकमल' में इतनी तथ्यात्मक त्रुटियाँ हैं कि बिना संपादक वाले कस्बाई 4 पन्ने वाले अखबार में भी ऐसा होना नामुमकिन हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े तथ्य तक इस कदर गलत हैं कि ताज्जुब होता है। केंद्र और राज्य में सत्ता चला रही बीजेपी के`माउथपीस’ में ऐसी और इस कदर त्रुटियों की भरमार ने पार्टी को मजबूर कर दिया है कि वह अपने सभी अंक को वापिस मंगा लें। ये बात और है कि जितनी भद पार्टी की पिटनी थी, पिट चुकी है।

अजय कुमार (उत्तराखंड बीजेपी महामंत्री-संगठन)-नाखुश धड़ा उनके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश में

2 जुलाई को इस अंक का विमोचन प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने देहरादून में किया था। उस मौके पर महामंत्री (संगठन) अजय और तमाम अन्य पार्टी ओहदेदार मौजूद थे। पत्रिका से जुड़े जिम्मेदार लोग तो थे ही। इसका विमोचन करने को ले के बहुत जल्दबाज़ी भी थी। मोदी राज-2 के पहले वर्ष की समाप्ति को ले के ये अंक निकालने में पहले ही देरी हो गई थी। ये अंक जून का है। इसमें शामिल गलतियों को सिर्फ एतिहासिक कहा जा सकता है।

पांचजन्य के पूर्व संपादक तरुण विजय के साथ राम प्रताप मिश्र साकेती (बाएँ)-गलतियों के लिए सिर्फ मैं जिम्मेदार हूँ

विमोचन के बावजूद इसमें शामिल भीषण चूक को कई लोग अगले दिन जा के पकड़ पाए। डॉ. देवेंद्र भसीन इस अंक के प्रभारी थे। उन्होंने कहा, `मेरी ज़िम्मेदारी अंक के लिए उचित लेखों की व्यवस्था करना था। मैंने प्रूफ भी पढ़े थे। वे ठीक थे। गलती कहाँ हो गई, कहा नहीं जा सकता’। डॉ. भसीन पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी हैं। पत्रिका के संपादक साकेती पुराने पत्रकार हैं। उन्होंने कहा कि प्रूफ पढ़ने तक में कोई गलती नहीं थी। इसके बाद जब प्रकाशन के लिए भेजा गया तो फॉन्ट को परिवर्तित करने के दौरान ये तमाम अशुद्धियाँ हो गईं। इसकी तरफ किसी ध्यान नहीं गया।

साकेती ने `Newsspace’ से कहा, `संपादक होने के नाते मेरी ज़िम्मेदारी थी कि एक अंतिम नजर पत्रिका की प्रिंटिंग शुरू होने से पहले या छपने के तत्काल बाद डालता। यहीं चूक हो गई। इसके लिए अकेला मैं जिम्मेदार हूँ। मैंने इस संबंध में महामंत्री (संगठन) से मिल के अपनी गलती स्वीकार कर भी ली है। पार्टी जो सजा मुझे देना चाहे, सहर्ष मंजूर है’। उत्तराखंड बीजेपी में इस प्रकरण को ले के आंतरिक द्वंद्व और एक-दूसरे को नीचा दिखाने-निबटाने की कोशिश शुरू हो गई है। देवकमल की प्रबंध संपादक विनोद उनियाल हैं। उनके पति संघ पृष्ठ भूमि से हैं और खुद भी पार्टी की वरिष्ठ नेता हैं। ये बात अलग है कि देवकमल का सारा काम सिर्फ साकेती ही देखते हैं। विनोद की कोई सक्रिय भूमिका पत्रिका निकालने में नहीं हैं।

पार्टी में एक लॉबी भगत और अजय के खिलाफ है। साथ ही साकेती का संपादक रहना भी उनको चुभ रहा है। इस प्रकरण में उनको निशाना बना के वे अपने नंबर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। डॉ. भसीन को भी जबरन निशाने पर लेने की कोशिश तभी से की जा रही, जब से वह दुबारा मीडिया प्रभारी बनाए गए हैं। भसीन भी वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार रहे हैं। इस बात को ले कर भी सरगोशियां हैं कि पार्टी के ही किसी खास बंदे ने ये आग दुनिया-मीडिया में लगाई है। देवकमल ऐसी पत्रिका नहीं है कि लोग उसका बेकरारी से इंतजार करें।

कानाफूसी पर यकीन किया जाए तो एक मीडिया का काम देखने वाले एक पूर्व ओहदेदार पर संदेह किया जा रहा है कि इस चिंगारी रूपी गलती को ज्वालामुखी बनाने का काम और मुखबिरी उसी ने की है। पार्टी के एक बड़े और अहम ओहदेदार ने `Newsspace’ से कहा, `ये मामला यकीनन बहुत गंभीर किस्म का है। इसकी जांच कराई जाएगी कि आखिर ये सब हुआ कैसे। ये भी देखा जाएगा कि इस मामले को तूल दे के पार्टी को बदनाम करने में क्या हमारे ही लोग तो शामिल नहीं हैं’। बीजेपी के अधिकांश लोगों का शक एक ही नाम पर जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here