ऑनलाइन पढ़ाई के बिना फीस लेने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई

अतिरिक्त विषय की पढ़ाई पर अतिरिक्त फीस ले सकेंगे स्कूल, पर कौन से विषय?

Chetan Gurung

हाई कोर्ट के आदेश के बाद त्रिवेन्द्र सरकार ने आज निजी स्कूलों की फीस पर अभिभावकों-स्कूलों को राहत देने वाला संशोधित शासनादेश जारी किया। सरकार ने व्यवस्था दी है कि सरकारी और अर्द्ध सरकारी अफसर व कर्मचारी कोरोना लॉक डाउन अवधि की फीस पूरी देंगे। अन्य लोगों को फीस देने में स्कूल जबर्दस्ती नहीं करेंगे और उनको इसके लिए वांछित वक्त देंगे। फीस न दे पाने की वजह से किसी बच्चे को स्कूल से निकाला नहीं जाएगा।

हाई कोर्ट के आदेश में सरकार को इस तरह की व्यवस्था करने को कहा गया था। आदेश के मुताबिक सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को नोडल अफसर नियुक्त करते हुए शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने आदेश दिया कि कोई भी स्कूल किसी बच्चे को फीस न दे पाने की खातिर नहीं निकालेगा। ऐसे बच्चों के अभिभावकों को ये छूट दी गई है कि वे ऑनलाइन और अन्य संचार माध्यमों से पढ़ाई के बावजूद फीस दे पाने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं तो स्कूल प्रबंधन से फीस देने में वक्त देने संबंधी राहत के लिए अपील कर सकेंगे।

ट्यूशन फीस पर ये भी तय किया गया है कि अगर स्कूल अतिरिक्त विषयों की भी ऑनलाइन पढ़ाई कराते हैं तो उनको इसके लिए फीस लेने का अधिकार होगा। सरकार का ये फैसला इसलिए पेचीदा कहा जा सकता है कि स्कूल अभी पूरे विषय ही नहीं पढ़ा रहे हैं। वे सिर्फ 2-3 विषय ही पढ़ाते हैं। ऐसे में उनको अतिरिक्त विषय के नाम पर अतिरिक्त फीस लेने की सुविधा दिया जाना सवाल खड़े कर रहा है। अतिरिक्त विषय का तात्पर्य क्या होगा, ये भी शासनादेश में स्पष्ट नहीं है।

अभिभावकों-स्कूलों को फीस मुद्दे पर साधने की कोशिश

सरकार ने निजी स्कूलों पर ऑनलाइन पढ़ाई के बिना भी फीस लेने या फिर फीस के लिए जबरन दबाव डालने की शिकायत पर कार्रवाई करने के लिए नोडल अफसरों को निर्देश दिए हैं। साथ ही ये भी निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी कार्रवाई करने से पहले वे स्कूलों से भी उनका पक्ष जरूर जाने।

स्कूलों के लिए राहत की बात ये है कि सरकार ने सरकारी और अर्द्ध सरकारी अफसरों-कर्मचारियों को फीस देने में किसी भी किस्म की राहत देने से इनकार कर दिया है। सरकार का तर्क है कि उनको लॉक डाउन के बावजूद तनख्वाह मिल रही है। उनके सामने आजीविका संबंधी कोई समस्या नहीं है। इस फैसले से सरकार ने स्कूलों को खुश और संतुष्ट करने की कोशिश काफी हद तक की है।

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